बाल यकृत वृद्धि – कारण,लक्षण,उपाय

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बाल यकृत वृद्धि का कारण: भोजन में जब वसा और कार्बोहाइड्रेट (40-50 प्रतिशत से) अधिक तथा प्रोटीन (10 प्रतिशत से) कम मात्रा में रहते हों, तो यकृत के सेलों में वसा की मात्रा बढ़ने से यकृत वृद्धि होती है।

जन्म से लेकर 2-3 वर्ष की आयु में बच्चों को यह रोग मां का दूध कम मात्रा में मिलने या बिल्कुल न मिलने के कारण होता है। गाय-भैंस के दूध में वसा की मात्रा कम करने के उद्देश्य से उसमें लगभग बराबर की मात्रा में पानी मिलाकर बच्चों को देते हैं। वास्तव में ऐसे दूध में वसा की मात्रा कम होने के साथ प्रोटीन की मात्रा बिल्कुल ही कम हो जाती है।

मां के दूध में घुलनशील प्रोटीन दो तिहाई तथा अघुलनशील एक तिहाई होता है, साथ ही मां के दूध में वसा के दानें बहुत छोटे होते हैं। दूसरी ओर गाय के दूध में घुलनशील प्रोटीन एक चौधाई व अघुनशील तीन चौथाई होते हैं, इसके अतिरिक्त वसा के दानों का आकार भी बड़ा होता है, जो आसानी से नहीं पच सकते।

इससे यकृत के सेलों में वसा का संचय अधिक होने से वे फैल कर फूल जाते हैं जिससे सेलों को ऑक्सीजन और पोषक द्रव्य पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते और यकृत के सेल नष्ट होना शुरू हो जाते हैं।

यदि किसी बच्चे को दस्त, अजीर्ण आदि कोई रोग रहा हो और इनके जीवाणु आंत में मौजूद हों, तब भी उनके विष से यकृत के सेल नष्ट हो जाते हैं। इससे यकृत के सेलों में स्नायुतन्तु बन जाते हैं, जिससे यकृत की शिराएं पूर्णत: या आंशिक रूप से अवरुद्ध हो जाती हैं और यकृत वृद्धि का कारण बनती हैं।

बाल यकृत वृद्धि का लक्षण

आंखों में पीलापन, भूख में कमी, पेट का तना रहना व उभरा हुआ दिखना। कब्ज़ या दस्त रहना, कमजोरी, व उदासीनता होना। हलका बुखार हो सकता है। रोग बढ़ने पर मूत्र की मात्रा कम हो जाती है, पेट अधिक उभर आता है, मल मिट्टी के रंग का व बदबूदार हो जाता है। बुखार लगातार रहने लगता है।

बाल यकृत वृद्धि घरेलू उपाय

बच्चे को माता का दूध ही पिलाएं। मां का दूध कम उतरने की स्थिति में इलाज कराएं, जिससे दूध पर्याप्त मात्रा में उतर सके।

बच्चे को विटामिन ‘बी’ व ‘सी’ युक्त आहार द्रव्य दें। इनमें संतरा व मुसम्मी का रस उत्तम है।

एक-एक आंवले का रस बच्चे को सुबह-शाम सेंधानमक मिलाकर दें।

आयुर्वेदिक औषधियां

पुनर्नवामंडूर, यकृतहर लौह, यकृतदारि लौह हरीतकी चूर्ण, मंडूर वटी, एम्लीक्योर डी.एस. सीरप, लिव-52 सीरप, लिवोमिन सीरप।

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