बांझपन – कारण,लक्षण,उपाय

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बांझपन का कारण: गर्भधारण न कर पाना बांझपन कहलाता है। यदि पुरुष वीर्य में शुक्राणुओं की कमी है, तो नारी स्वस्थ होते हुए भी गर्भधारण में असमर्थ रहती है। यदि शुक्राणु स्वस्थ है और संख्या में 1000-1250 लाख प्रति मि. ली. हैं, तो नारी की विकृतियों के विषय में विचार करना चाहिए।

गर्भाशय का आकार छोटा होना, गर्भाशय उलटा स्थित होना, गर्भाशय में सूजन, गर्भाशय का मुख सुई की नोक जैसा होना, डिम्ब ग्रंथियों में संक्रमण या अन्य कोई रोग, डिम्बवाही नलिकाओं में सूजन पर उनका बंद होना आदि कारण ऐसे हैं, जिनसे गर्भधारण संभव नहीं हो पाता।

बांझपन का लक्षण

एक वर्ष तक लगातार यौन सम्बन्धों के बाद भी गर्भधारण न कर पाना ही इस रोग का लक्षण है।

बांझपन का घरेलू उपाय

सर्वप्रथम पुरुष के वीर्य की जांच कराएं। यदि वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो या अन्य कोई असामान्यता हो, तो उसकी चिकित्सा कराएं।

कायफल को कूट-पीसकर उसमें समभाग मिसरी मिला लें। मासिक आरंभ होने के पांचवे दिन से 6-6 ग्राम दवा चार दिन तक सेवन करें।

सोंठ, काली मिर्च, नागकेसर व छोटी पिप्पल सम मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। आधा चम्मच दवा गाय के घी में मिलाकर सेवन कराएं।

नागदमनी को गाय के घी में मिलाकर योनि में लेप करें।

नागकेसर को बारीक पीसकर 4 ग्राम की मात्रा में बछड़े वाली गाय के दूध से मासिक शुरू होने के दिन से आठ दिन तक खिलाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

लक्ष्मणा लौह, लक्ष्मणारिष्ट, आशोकारिष्ट, मुक्तापिष्टी, प्रवाल भस्म एवं लौह भस्म का प्रयोग बांझपन की चिकित्सा हेतु कर सकते हैं।

पेटेंट औषधियां

एम-2 टोन सीरप (चरक), एमीकोर्डियल सीरप व गोलियां (एमिल)।

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