मूर्च्छा के लक्षण

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मूर्च्छा के लक्षण: सदमा, दम घुमना, विषपान, विषाक्तता, अथवा सिर व मस्तिष्क पर चोट आदि कारणों से व्यक्ति मूर्च्छित हो सकता है।

अन्य कारणों में मिर्गी, हिस्टीरिया, मधुमेह, दिल का दौरा आदि शामिल हैं। अत्यंत गर्मी के प्रभाव से भी मूर्च्छा हो सकती है।

मूर्च्छा के लक्षण

अपूर्ण व पूर्ण मूर्च्छा में अलग-अलग लक्षण मिलते हैं। अपूर्ण मूर्च्छा में रोगी किसी की बात का जवाब नहीं देता, रोगी की आंख छूने पर अवरोध करता है, रोगी की पुतलियां प्रकाश डालने पर सिकुड़ जाती हैं तथा रोगी की आंखें छूने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करता है।

इसके विपरीत पूर्ण मूर्च्छा में रोगी किसी भी बात का जवाब नहीं देता, उसे जगाया नहीं जा सकता, आंखें छूने पर रोगी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करता तथा प्रकाश डालने पर आंखों की पुतलियां स्थिर रहती हैं।

रोगी को खुली हवा में सांस लेने दें। यदि भीड़ जमा हो तो, हटा दें, छाती व कमर के वस्त्रों को ढीला कर दें। सांस रुकने या मंद पड़ जाने की स्थिति में कृत्रिप सांस दें।

रोगी को मुंह से कुछ न दें।

जिस कारण से मूर्च्छा हुई है, उसका उपचार करें।

मूर्च्छा के लक्षण

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