भोजन का महत्व in hindi

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भोजन का महत्व: इसमें संदेह नहीं कि हमारे अधिकार रोगो का कारण बेमेल भोजन करना होता है। यहि हम गलत भोजन करने की अपनी आदतों में थोड़ा-सा भी परिवर्तन करें, तो अधिकाशं रोग जन्य ही न लें।

इस कारण बेमेल या गलत भोजन की जानकारी प्राप्त करके तथा उस पर अमल करने से लंबे समय तक रोगो से बच कर दीर्घ आयु प्राप्त कर सकते हैं।

भोजन की अलग-अलग प्रकृति

दुनिया भर में अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ भिन्न-भिन्न तरीके से सेवन किए जाते हैं। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ व पेय भी होते है, जिनको मिलाकर पीने या खाने से उनके पौष्टिक गुण बंद जाते है। इसके विपरीत कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ या पेय है जिनका सेवन करने से व्यक्ति विपरीत प्रभाव के कारण तकलीफ़ झेलता है।

क्योंकि बेमेल भोज्य पदार्थ से विष का निर्माण होता है। उदाहरणार्थ अमृत तुल्य गुणकारी शहद और घी जब बराबर की मात्रा में मिलाकर सेवन किए जाते हैं, तो उनका प्रभाव विषतुल्य होता है।

भोजन का महत्व

दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए समय पर हितकारी और मौसम के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। इसलिए खानपान ऐसा करें, जो स्वास्थ्यप्रद हो। एसे बहुत से खाद्य पदार्थ हैं. जिन्हें ‘साथ-साथ नहीं खाना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर हिन्दुस्तान में दाल-रोटी और दाल भात में नीबू, इमली, आम की खटाई खाने का काफी प्रचलन है और इसी प्रकार मांस, तरी के साथ रोटी खाना आम रिवाज है। यहीं वजह है कि हम जल्दी ही इस बात को नहीं समझ पाते कि इस प्रकार के भोजन में कोई हानि है।

वैज्ञानिक मत से विचार जरिये, तो हमे ज्ञात होगा कि गेंहू, चावल आदि अन्नों के साथ दाल तथा गोश्त, मांस जातीय पदार्थ नहीं खाने चाहिए और उनके साथ नींबू, दही, आम की खटाई आदि का मेल ठीक नहीं होता।

ऐसा भोजन स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत हानिकारक होता है। जब तक शरीर में शक्ति रहती है, तब तक इस प्रकार का नियमित भोजन कोई प्रत्यक्ष हानि नहीं दिखाता, लेकिन पाचक अवयवों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है, भारी परिश्रम करना पड़ता है।

हमारे आहार का कार्बोंज यानी श्वेतसार पदार्थ (रोटी, चावल, आलू आदि) और शकर वाले अंश का पाचन सबसे पहले मुंह में क्षार के रूप में होता है और हर तरह की खट्टी चीजे, नीबू इमली, दही आम की खटाई से विरोधी स्वभाव की होने के कारण उनकी खटास मुंह के पाचक रस की क्षारीयता की नष्ट कर देती है, जिससे श्वेततसार (स्टार्च) का प्रारंभिक पाचन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता।

इसी प्रकार प्रोटीन प्रधान खाद्य पदार्थ (दाल, मांस, अंडे आदि) मुंह की लार से तो बिलकुल प्रभावित नहीं होते, क्योंकि इनका पाचन आमाशय में अम्ल और पाचक रस, एन्जाइम्स के द्वारा अस्त के रूप में होता है।

कार्बोंज के साथ प्रोटीन बिलकुल नहीं खाना चाहिए, क्योंकि मुंह की थूक के क्षार से जो पाचन शुरु होता है, वह पेट में पहुंचकर भी जारी रहता है।

अगर कार्बोंज, शकर और मिठास वाली चीजों के साथ दाल, गोश्त, अंडा आदि प्रोटीन वर्ग की वस्तुएं खाईं जाएंगी, तो आमाशय में पहुंचने पर उनके पाचन के लिए उनकी ग्रंथियों से अम्ल भी निकलने लगेगा, जो कार्बोंज के साथ आए हुए क्षार रस को बेकार कर देगा। परिणामत: कार्बोंज और प्रोटीन, दोनों को पचने में बाधा पहुंचेगी।

प्रोटीन के साथ सभी तरह की खट्टी खाद्य सामग्री जैसे-दही नीबू, इमली आम की खटाई खाई जा सकती है, क्योंकि यह पाचन में किसी प्रकार की रुकावट नहीं डालती।

केवल दूध अकेला ही पिया जाए, तो वह शीघ्र पचकर शरीर में शोषित हो जाता है लेकिन कार्बोंज या प्रोटीन के साथ लेने से पाचन में कठिनाई आती है।

बेमेल भोजन

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सम आहार लेना ही उचित माना गया है। यहां हम कुछ बेमेल खाद्य वस्तुओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें आपस में मिलाकर या एक दूसरे के बाद खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होता है-

  • शहद और घी बराबर-बराबर की मात्रा में मिलाकर खाने से विष-सा प्रभाव होता है और पालिज रोग तक हो सकता है।
  • दूध और दूध से बनी खाद्य सामग्री के साथ खट्टी चीजें खाने से वमन और बदहजमी की शिकायत होती है।
  • मछली के साथ दूध हैं शहद या गन्ने का रस सेवन करने से कोढ़ या त्वचा के रोग हो सकते हैं।
  • किसी भी प्रकार का गोश्त खाने के बाद उपर से दूध पीने से वमन, पेट दर्द या हैजा हो सकता है।
  • खिचड़ी और खीरा, पनीर और दही, अंगूर और शहद, केले के बाद दही या लस्सी खाना या पीना पेट दर्द पैदा करता है।
  • लहसुन के साथ खरबूजा और शहद खाने से खून खराब होता है।
  • दूध और शराब यदि पेट में जाकर मिल जाएं, तो पैरों में दर्द, हैजा अथवा मृत्यु भी संभव है।
  • गर्मी में तरबूज के साथ पुदीना खाने से बदहजमी होती है।
  • अमरूद खीरा, ककड़ी खाकर शीघ्र भरपेट पानी पीने से उलटी-दस्त लगकर हैजा हो सकता है।
  • मछली और मुर्गी के अंडे मिलाकर खाने से बवासीर (अर्श) रोग को जाता है।
  • चावल और सिरका एक साथ खाने से पेट में अनेक विकार पैदा हो जाते हैं।

इनके अतिरिक्त गुड़ और मूली, मांस और मूली, शहद के साथ गर्म पानी, कांसे के बर्तन में कई दिन रखा घी, गर्म पानी के साथ दही, उड़द के साथ मूली, कबूतर का मांस और तेल, दूध के साथ नमक, गुड़, तेल, बेल फल आदि दही के साथ दूध मूली , खीर, पनीर केला, खरबूजा आदि, ठंडे पानी के साथ मूंगफली, घी, तेल, अमरूद, गर्म, दूध, खीरा आदि।

चाय के साथ दही, खीरा और ककड़ी खाने से भी स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और अनेक प्रकार के रोग होने की संभावना बढ़ जाती हैं।

बेमेल भोजन के अलावा आयुर्वेद शास्त्रानुसार भोजन किसी भी समय, कितनी ही मात्रा में, कभी जल्दी-जल्दी, तो कभी बहुत धीरे-धीरे ग्रहण करना भी विषम या बेमेल भोजन के अंतर्गत आता है।

इस प्रकार से बेमेल भोजन करने से वातादि दोष, रक्तादि धातुएं तथा मल, मूत्र, स्वेद सभी विषमता प्राप्त रोगों का कारण बनते है। बेमेल भोजन से रस रक्तादि धातुओं का सही निर्माण नहीं हो पाता।

इसके साथ ही पाचन-क्रिया में भी व्यवधान उत्पन्न होता है। अधपचे और अपरिपक्व भोजन रस को आयुर्वेद शास्त्रानुसार ‘आम’ के नाम से जाना जाता है। यही सभी रोगों का मूल कारण माना गया है।

यहीं वजह है कि शरीर में उपयोगी तत्वों का निर्माण नहीं होता, जिससे शारीरिक पुष्ठता नहीं आती। इसलिए कम से कम विविधता लिए हुए सादा और पौष्टिक भोजन करना ही स्वास्थ्य के लिए हितकर होगा।

भोजन का महत्व in hindi

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