ज्वर के कारण और घरेलु उपाय

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ज्वर के कारण: शरीर का तापमान सामान्य अवस्था में (98.60 फारेनहाइट या 370 सेंटीग्रेड) से बढ़ना ज्वर का सूचक है। वात, पित्त और कफ दोषों की न्यूनाधिकता के आधार पर आयुर्वेद में ज्वर के अनेक भेद बताए गए हैं। वास्तव में ज्वर तो एक सामान्य लक्षण है, जो शरीरगत किसी अन्य रोग को इंगित करता है। इसके निम्न कारण हैं:

  • ऋतु के अनुसार शास्त्रों में वर्णित भोजन न करना अर्थात् मिथ्या आहार-विहार करना विशेषकर बदलते हुए मौसम में ठंडी चीजें खाना।
  • बासी भोजन, सड़ी-गली वस्तुएं, कटे हुए फल व सब्जियों का प्रयोग करना।
  • अधिक गर्मी, धूप, ठंड, शीतल वायु व वर्षा से अपना बचाव न करना।
  • ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, लोभ, अभिमान आदि मानसिक भावों से मन में क्षोभ उत्पन्न होना।

ज्वर के कारण घरेलू उपाय

ज्वर के लक्षणों के आधार पर रोग विशेष की अलग-अलग चिकित्सा की जाती है, तथापि हलका-फूलका बुखार होने पर निम्नलिखित चिकित्सा शुरू में रोगी को दे सकते हैं

फायदा न मिलने और बुखार न उतरने पर रोग का भलीभांति निदान करने के लिए चिकित्सक की परामर्श लेनी चाहिए।

लहसुन को पीसकर कल्क बनाएं और 5 से 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम रोगी को दें।

फुलाई हुई गुलाबी फिटकिरी 250 मि.ग्रा. की मात्रा में सुबह-शाम दें।

छोटी पीपल का चूर्ण शहद के साथ एक-एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दें।

सिर दर्द हो, तो बादाम रोगन अथवा भृंगराज तेल की मालिश करें।

पसीना न आ रहा हो, तो रोगी को गुनगुना पानी पिलाएं।

बेचैनी हो तो बादाम रोगन और गुलरोगन मिलाकर माथे पर मालिश करें।

सिर में दर्द होने पर घी में कपूर मिलाकर मलें।

रोगी को कब्ज़ और बेचैनी हो, तो 20-30 मिली लीटर एरंड तेल को गर्म दूध के साथ दें। एरंड तेल के स्थान पर हरड़ व सोंठ या हरड़ व सौंफ आधा-आधा चम्मच मिलाकर दूध के साथ ले सकते हैं।

ज्वर के साथ जुकाम भी हो, तो छोटी कटेरी और पित्तपापड़ा बराबर मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाएं और दिन में तीन बार 20 मि.ली. की मात्रा में लें।

यदि वर्षा में भीगने या ठंडी हवा में रहने के कारण बुखार हुआ हो, तो चाय में तुलसी के 5 पत्ते, 2 लौंग, 3 काली मिर्च व चुटकी भर काला नमक डाल कर दें।

शीत ऋतु में, ठंडी हवा में या वर्षा में भीगने से होने वाले बुखार में 5 पिण्डखजूर या छुहारे दूध में उबालकर पहले खजूर खाएं, ऊपर से दूध पीकर पसीना लें।

बाइरल बुखार में 5 बादाम व 3 काली मिर्चं कूट कर एक चम्मच देसी घी में भूनें। इन दोनों के भुन जाने पर इसमें 5 किशमिश भी डाल दें और ऊपर से 400 ग्राम दूध डाल दें

जब 250 ग्राम बचा रह जाए, तो इसे पीकर कपड़ा ओढ़कर पसीना लें। जैसे-जैसे पसीना निकलता जाएगा, वाइरल बुखार उतरता चला जाएगा।

7 तुलसी की पत्तियां, 4 काली मिर्चें व एक पिप्पल पानी के साथ पीसकर आधा कप पानी में मिला लें व दस ग्राम मिसरी मिलाकर सुबह खाली पेट पिलाएं। बुखार पूरी तरह उतरने तक दवा पिलाते रहें।

धनिया और सोंठ का सम भाग करके चूर्ण बना लें। 10 ग्राम नीम की छाल को 250 ग्राम पानी में पकाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में 1 चम्मच चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम रोगी को दें।

बेलगिरी के 30 पत्तों का रस दिन में तीन बार दें।

नीम की 20 कोंपलें व 3 काली मिर्चें एक गिलास पानी में उबालें। एक चौथाई रह जाने पर इसे उतारकर सुबह-शाम पिएं।

बुखार तेज हो, तो चंदन पीसकर माथे पर लगाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

ज्वरान्तकवटी, ज्वरघ्नवटी, हिंगुलेश्वर रस, ज्वरभैरव चूर्ण, ज्वर नागमयूर चूर्ण, त्रिपुर भैरव रस आदि।

पेटेंट औषधियां

क्यूरिल गोलियां व शरबत (चरक), डिवाइन रिलीफ कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा), फीवम गोलियां (माहेश्वरी), जवरीना (संजीवन) लाभदायक हैं।

ज्वर के कारण और घरेलु उपाय

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