चाय पीने के नुकसान इन हिंदी

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चाय पीने के नुकसान इन हिंदी: आजकल चाय एक ऐसा लोकप्रिय पेय है, जिसे पानी के बाद सबसे अधिक लोकप्रियता प्राप्त है। गांव, शहर, कस्बा हो या नुक्कड़, कहीं भी जाइए, हर जगह आपको यह उपलब्ध हो जाएगी।

चाय पीने का न को कोई समय रह गया है और न मात्रा की ही बंधन। चाय एक नशा है और हर नशीली वस्तु की यह प्रकृति होती है कि उसे बार-बार सेवन करने का मन करता ही रहता है।

पीने वाले को इस बात का पता भी नहीं होता कि चाय उसकी सेहत के लिए कितनी नुकसानदेह है।

चाय पर निर्भरता

आज ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिन्हें चाय के बिना शौच नहीं लगती। किसी का चाय के बिना आलस्य नहीं हटता। यानी, हालात ऐसे बन गए है कि बिना चाय के अतिधि सत्कार तक फीका रहता है।

चाय पीने के नुकसान पर डॉक्टरों की राय

  • चाय शराब से अधिक हानिकारक है। – डॉ. ओ. डी. नेड
  • चाय पीने से पेट की गड़बड़ियां बढ़ रहीं है। – डॉ. कार्तिकेय बोस
  • चाय वीर्य को पतला बनाती है। – डॉ. बूम
  • चाय पीने के बाद पेशाब में यूरिक एसिड दूना हो जाता है। – प्रो. मैंडल
  • चाय से भूख मर जाती है, फिर कब्ज, सिर में चक्कर और मूर्च्छा का आक्रमण धीरे- धीरे शुरु हो जाता है। – डॉ. ब्लाड
  • चाय के पीने से थकावट मिटती नहीं, बढ़ती ही है । – डॉ. रिवर्स
  • रोज दिन में तीन ही प्याले चाय पीने से मांसपेशियों में खिंचाव, स्नायु रोग, चिंता , भय और मस्तिष्क के रोग हो सकते हैं। – डॉ गिसमैन
  • चाय पीने से आंखों के नीचे कालापन आ जाता है और मानसिक खिन्नता हो जाती है। – डॉ. जे. डब्लू माराटन
  • चाय के निरंतर प्रयोग करने से लकवा, बहरापन आदि रोग हो जाते है – डॉ. गोपाल भास्कर
  • यदि मुझे विषों की सूची बनाने को कहा जाए, तो मैं चाय को उस सूची में प्रथम स्थान दूंगा। – डॉ. हेग

चाय के हानिकारक तत्व

रासायनिक विश्लेषण करने से पता चला है कि चाय में नाम मात्र के पौष्टिक, गुणकारी तत्व होते हैं। वरन् यह तो सिर्फ एक उत्तेज़ना देने वाला अल्कोहल रहित पेय है। इसमें उपलब्ध अन्य हानिकारक तत्वों का ब्यौरा निम्न है:

टेनिन: चाय में इसका अंश 18 प्रतिशत होता है । यह पाचन शक्ति को कमजोर कर भूख को खत्म कर देता है। टेनिन के कारण ही कब्ज, गैस, गेस्ट्राइटिस, पेप्टिक अल्सर, फोड़े-फुंसी निकलना, मंदाग्नि की शिकायत होती है।

कैफीन: चाय में इसका अंश 2 75 प्रतिशत होता है। इसके नशे के कारण ही चाय पीने की आदत पड़ जाती है। इसकी उपस्थिति से पेट में तेजाब बढ़ जाता है। यह काफी उत्तेज़क होता है।

इसकी अधिकता से पेट के रोग, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, हाईंब्लड प्रेशर, सिर दर्द, गुर्दे की कमजोरी, ह्रदय रोग, स्मरण शक्ति कमजोर होना, बालों का असमय सफेद होना जैसी तकलीफें धीरे- धीरे घर जमाने लगती है।

थीन: चाय में इसका अंश 6 प्रतिशत तक होता है। इससे खुश्की पैदा होती है, जिसके करण मस्तिष्क और फेफड़ों की अधिक परिश्रम करना पड़ता है, परिणाम स्वरूप वे कमजोर होने लगते हैं।

वोलेटाइन आइल: इसके दुष्परिणाम से आंखों की बीमारियां और अनिद्रा की तकलीफ होती है।

चाय की आदत कैसे छोड़े

यदि चाय पीने की आदत पड़ जाए, को उसे छोड़ना आसान नहीं होता, क्योंकि इसके न पीने से सिर दर्द, सुस्ती, उत्तेजना का अभाव जैसे अनेक उपद्रव पैदा होने लगते है। अत: ऐसी स्थिति से निपटने के लिए दृढ़ निश्चय करने और चाय के विकल्प को अपनाने की जरूरत पड़ती है। चाय की तलब लगने पर निम्न उपाय करें:

नीबू की चाय: एक कप गर्म पानी में आधा नीबू निचोड़ कर, एक-दो चम्मच चीनी, गुड़ या शहद स्वादानुसार थोड़ा-सा अदरक कुछ तुलसी की पत्तियां डाल कर थोड़ी देर तक ढंक दें। फिर कप में छान कर पिएं।

प्राकृतिक चाय: दो कप पानी में 1 चम्मच सौंफ, 1 इलायची सोंठ आधा चम्मच मुलेठी आधा चम्मच, 2 काली मिर्च, 10 तुलसी की पत्तियां, दूध और स्वादानुसार 2 से 4 चम्मच शक्कर मिलाकर उबाल लें। फिर छानकर चुस्कियां लेकर पिएं।

आजकल कई आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनियां भी आयुर्वेदिक चाय का पाउडर तैयार करके बेचती है, जो दवाओं की दुकान से खरीद सकते है। इससे ताजगी, स्फूर्ति प्राप्त होगी और कोई दुष्परिणाम भी नहीं भुगतने पड़ेंगे।

कॉफी पीने से नुकसान

संपन्न लोगों में चाय के स्थान पर कॅाफी पीने का चलन देखने को अधिक मिलता है। जो व्यक्ति प्रतिदिन 4-5 कप कॅाफी या इससे अधिक का सेवन करते है, उन्हें ह्रदय की बीमारियां होने का खतरा सबसे अधिक होता है।

इसके अतिरिक्त रक्त में कोलेस्ट्रोल बढ़ने, बेचैनी, चिंता, अनिद्रा, सिर दर्द, दिल की धड़कन बढ़ना, ह्रदय में जलन, पेप्टिक अल्सर, गेस्ट्राइटिस, अकसर मिचली की तकलीफ, पेशाब की मात्रा बढ़ना जैसी तकलीफें भी भुगतनी पड़ती हैं।

अमेरिका में किए गए अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि कॅाफी पीने के बाद सामान्य से लगभग दो गुना शारीरिक मानसिक श्रम बिना थके किया जा सकता हैं। यदि आप 6 प्याले से ज्यादा कॉफी रोज पिएंगे, तो ये सारी उत्तेजना और स्फूर्ति मानसिक थकान में बदल जाएगी।

एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं रोजाना 2 या 3 कप कॅाफी का सेवन करती हैं, उनके गर्भपात होने का खतरा सामान्य की अपेक्षा दो गुना अधिक हो जाता है।

फिल्टर कॉफी खतरे नहीं छानती

प्राय: सामान्य आदमी यही जानता है कि फिल्टर कॉफी पीने से कोई नुकसान नहीं होता, परन्तु शोधों से यह ज्ञात हुआ है कि यह भी दिल के लिए घातक है। इसका कारण यह है कि इसे फिल्टर करने के बाद भी इसमें वे रसायन बने रहते हैं, जिनसे कोलेस्टेरोल बढ़ता है। इन रसायनों से होमोसिसटाइन का स्तर बढ़ जाता है, जबकि अब तक की जानकारी के अनुसार उक्त रसायन फिल्टर कर देने से घट जाता था।

कॉफी कैसे छोड़ें

  • पहले कॉफी के प्यालों की संख्या धीरे-धीरे कम करना शुरू करें, फिर दृढ़ निश्चय कर छोड़ने का प्रयास करें।
  • कॅाफी के विकल्प के रूप में नीबू की चाय या प्राकृतिक आयुर्वेदिक चाय का सेवन शुरू करें।
  • कॉफी को तलब लगने पर चॉकलेट खाना शुरू की।
  • विकल्प के रूप में कुछ दिन तक कम मात्रा में प्राकृतिक चाय में कुछ पत्तियां हरी चाय की प्रयोग करें।
  • तनाव उत्पन्न होने पर गुड़, घी मिलाकर खाएं तथा थोड़ा-सा पिपरमेंट भी मुख में रखें।

उपर्युक्त उपायों से आप कॉफी के दुष्परिणामों से बच कर स्वास्थ्य की रक्षा कर सकेंगे।

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