चेचक – कारण,लक्षण,उपाय

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चेचक का कारण: यह रोग प्राय: बच्चों में होता है, किंतु किशोरों, युवाओं व वयस्कों में भी हो सकता है। यह विषाणु (वाइरस) जन्य संक्रामक रोग है तथा रोगी के खांसने, छींकने व बोलने से फैलता है।

चेचक का लक्षण

इस रोग में शरीर में टूटन व दर्द, खुजली, सारे शरीर पर सूजन व लाली, जुकाम के साथ बुखार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। तीन-चार दिन के बाद शरीर पर दाने निकल आते हैं, जिनमें जलन व दर्द होता है।

प्रतिरोधक उपाय

जिस क्षेत्र में यह रोग फैलना शुरू हो जाए, वहां के लोग निम्नलिखित में से किसी एक उपाय अपनाने से रोग से बच सकते हैं :

2 काली मिर्च और 5 नीम की कोंपलें सुबह खाली पेट 1 सप्ताह तक चबाएं। बच्चों को थोड़ी-सी मिसरी भी साथ में दे सकते हैं।

बच्चों को 1 चम्मच व बड़ों को 4 चम्मच की मात्रा में गोले (नारियल) का तेल पिलाएं या गोला खाने को दें।

प्रतिषेधक उपाय

नीम की कोंपलें और तुलसी के पत्तों को पीसकर कल्क बनाएं और 10 ग्राम की मात्रा में एक चम्मच शहद के साथ या समभाग मिसरी मिलाकर सुबह के समय खिलाएं।

नीम की पत्तियां पीसकर चेचक के दानों पर लगाएं।

चावल के धोवन में तुलसी के पत्ते पीसकर पिएं।

हर दो घंटे बाद रोगी को मुनक्का के 4 दानें खिलाएं।

अनार के पत्ते मुनक्का, गिलोय, मुलेठी और ईख की जड़ समान भाग लेकर काढ़ा बनाएं। फिर इसमें थोड़ी-सी मिसरी मिलाकर 20 मि.ली. सुबह-शाम पिलाएं।

बेलगिरी के पके फल का गूदा चार चम्मच की मात्रा में गाय के दूध के साथ सुबह-शाम दें।

चेचक का घरेलू उपाय

हलदी, दारुहल्दी, लाल चंदन, त्रिफला, चिरायता और नीम की छाल सबको समान मात्रा में लेकर कल्क बनाएं और चार गुना तेल से सिद्ध करें। सुबह-शाम चेचक के दागों पर इससे मालिश करें।

आयुर्वेदिक औषधियां

आमलक्यादि चूर्ण आदि।

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