चीनी से होने वाले नुकसान | Chini se hone wale nuksan

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चीनी से होने वाले नुकसान: चीनी आज हमारे दैनिक जीवन में इतनी घुल मिल गई है कि इसकी मिठास के अतिरिक्त उसकी उस कड़वाहट का अंदाजा ही नहीं हो पाता, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

चीनी से नुक़सान

सफेद चीनी के निर्माण के लिए गन्ने के रस में मिलने वाले प्रोटीन, विटामिन्स, खनिज आदि उपयोगी पदार्थ निकाल कर बिलकुल साफ किया जाता है, जिसके कारण चीनी में मिठास के अलावा दूसरी और कोई वस्तु नहीं रह जाती है, जो शरीर के पोषण में सहायक हो।

इसीलिए चीनी शरीर में पूरी तरह घुल नही पाती और बाहर निकलने की कोशिश में कई विकृतियाँ और बीमारियां पैदा कर देती है।

चीनी से होने वाले रोग

साधारण व्यक्ति यहीं जानता है कि चीनी या इससे बनी चीजों के अधिक सेवन से केवल दांत ही खराब होते है, किंतु इसके अलावा ह्रदय रोग, अपच मोटापा, मधुमेह, हिंसक व्यवहार चिड़चिड़ापन, मूत्राशय का कैंसर, त्वचा के रोग, क्रोमोसोम की क्षति, मूत्र संबंधी रोग, स्नायविक विकृति, बेचैनी, अनिद्रा जैसी बीमारियां पैदा होने की आशंकाएं भी होती हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञों के मतानुसार चीनी का अधिक सेवन करने से खून में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण अन्त: स्रावी प्रणाली (पेंक्रियाजन्य अनुक्रिया) को बढ़ावा मिलता है। इसके परिणाम स्वरूप ‘हाइपोग्लाइसेमिया’ नामक बीमारी, यानी खून में शर्करा की कमी की तकलीफ होती है।

चीनी का दांतों पर दुष्प्रभाव

दंत विशेषज्ञ का कहना है कि चीनी का सबसे अधिक प्रभाव दांतों पर ही पड़ता है। जो बच्चे मीठी चीजें ज्यादा खाते है , उनके दांत शीघ्र ही खराब हो जाते हैं।

दांतों का सड़ना, गलना, टूटना, हिलना, खोखला होना, कीड़ा लगना और दर्द करना जैसी अनेक खराबियां उत्पन्न होने से दांत न केवल अपना सौंदर्य खो बैठते है, वरन् आहार को चबाने के अपने प्रमुख कार्य को भी पूरा नहीं कर पाते हैं।

चीनी के आदर्श विकल्प

सफेद चीनी मनुष्य के लिए कुदरती खाद्य पदार्थ नहीं है। उसमें वे तत्व नहीं पाए जाते, जो गुड़ या खांड़ की बनी चीनी में होते हैं। चीनी के बदले में यदि आप मिठास लेना ही चाहे तो गुड़, शहद, छुहारे, मुनक्का, खजूर का उपयोग बड़े मजे में कर सकते हैं।

इनके सेवन से स्वाद की तृप्ति तो होगी ही साथ में प्रोटीन, लोहा, कैल्शियम, विटामिन्स जैसे पोषक तत्व भी शरीर को मिल जाएंगे, जिससे मांसपेशियों को बढ़ाने, रक्त का निर्माण तथा हड्डियों के मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

गुड़ गन्ने के रस से, ताड़ के रस से या खजूर के रस से बनाया जाता है। ताड़ का गुड़ पौष्टिकता की दृष्टि से अधिक लाभप्रद होता है। कारण यह है कि यह सूर्य की किरणों के प्रभाव की और प्राकृतिक विटामिनों की अधिक मात्रा में प्राप्त कर लेता है।

वैज्ञानिको के मतानुसार 100 ग्राम गुड़ में सुक्रोज 29.70 प्रतिशत, ग्लूकोज 21.20 प्रतिशत, खनिज द्रव्य 3 26 प्रतिशत तथा जल 8 66 प्रतिशत होता है। महर्षि चरक के अनुसार गुड़ के सेवन से मज्जा, रक्त, मांस और चर्बी बढ़ती है जिससे शरीर में पुष्टता व सुडौलता आती है। इसका नियमित सेवन शारीरिक दुर्बलता दूर करता है।

फलों की प्राकृतिक मिठास स्वास्थ्य के लिए अत्यतं लाभप्रद होती है। जो चीनी हमेँ फलों से प्राप्त होती है , उसमें कार्बोंहाइड्रेट की पर्याप्त मात्रा रहती है और शारीरिक विकास प्राकृतिक तौर पर चलता रहता है। इसलिए जहां तक संभव हो, चीनी के स्थान पर गुड़ का ही प्रयोग करें।

चीनी से होने वाले नुकसान

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