दाद – कारण,लक्षण,उपाय

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दाद: त्वचा पर फफूंदी के कारन खुजली होती है जिस से खुजली वाले स्थान पर घाव बन जाते है इसी से स्किन पर दाद बनती है। और दाद का सबसे अच्छा इलाज है नीम के पत्तो को गर्म पानी में रख कर फिर उसको पीस कर वहा लगाए।

दाद के कारण

त्वचा का यह रोग फफूंदी के कारण उत्पन्न होता है। यह रोग शरीर में कहीं भी हो सकता है, लेकिन जांघ आदि स्थानों पर विशेष रूप से होता है।

दाद के लक्षण

त्वचा में खुजली होती है तथा संक्रमण के स्थान पर गोलाकार बाहरी सीमा वाला घेरा-सा बन जाता है, जिसमें दानें या पपड़ी-सी बन जाती है।

दाद के घरेलू उपाय

दाद पर आक का दूध लगाएं।

नीम के पत्तों को दही में पीसकर दाद पर लगाएं।

हलदी को बारीक पीसकर पानी में मिलाकर लगाएं।

ढाक के बीजों को पीसकर दाद पर लगाएं।

सहजन की जड़ की छाल पीसकर लगाएं।

पपड़िया नौसादर व आंवलासार गंधक सममात्रा में तिल के तेल में मिलाकर अच्छी तरह घोट लें। नीम के पानी से साफ कर यह दवा दाद पर लगाएं।

आंवलासार गंधक व कपूर बराबर मात्रा में लेकर दोनों के पांच गुना मिट्टी के तेल में घोंटकर दाद पर लगाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

पारदादि मलहम स्थानिक प्रयोग हेतु व आरोग्यवर्धिकी वटी खाने के लिए प्रयोग करें।

पेटेंट औषधियां

स्किनेल मलहम (चरक)।

दाद – कारण,लक्षण,उपाय

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