एग्जिमा – कारण,लक्षण,उपाय

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एग्जिमा का कारण: इस रोग में त्वचा पर छोटे-छोटे दानें या चकत्ते बन जाते हैं, जिनमें खुजली व जलन होती है। आयुर्वेद में पामा के नाम से इस रोग का वर्णन किया गया है।

किसी भी द्रव्य के प्रति शरीर में असात्म्यता (एलर्जी) उत्पन्न होने से यह रोग होता है। तनाव, चिंता, आदि मानसिक विकार भी रोग की उत्पत्ति में सहायक कारण हैं।

आनुवंशिक रूप में भी यह रोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। धूप, साबुन, ऊनी या सिंथेटिक कपड़ों से भी एलर्जी उत्पन्न हो जाती है।

एग्जिमा का लक्षण

खुजली व दानें पड़ना, दोनों ही मुख्य रूप से इस रोग के लक्षण हैं।

एग्जिमा का घरेलू उपाय

पके केले के गूदे को नीबू के रस में पीसकर दानों पर लगाएं।

कटहल के पत्तों को पीसकर लेप करें।

तुलसी की 20 पत्तियां सुबह खाली पेट चबाएं।

पाव भर सरसों का तेल लोहे की कड़ाही में उबालें। जब उबलने लगे, तो उसमें 50 ग्राम नीम की कोंपलें डाल दें। जब नीम की कोंपलें जलकर काली पड़ जाएं, तो कड़ाही उतार लें व तेल को छानकर रख लें। दिन में 2-3 बार यह तेल लगाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

सिंदूरादि तेल, दूर्वादि तेल, हरिद्रादि तेल, मरिचादि तेल, गंधक पिष्टी तेल व तुम्बरू आदि चूर्ण का स्थानीय प्रयोग इस रोग में करते हैं।

एग्जिमा – कारण,लक्षण,उपाय

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