एड़िया फटने के कारण,लक्षण,उपाय

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एड़िया फटने के कारण,लक्षण,उपाय: आज के समय में एड़िया फटने की शिकायत बहुत रहती है। क्युकी एड़ी जब सख्त होती है तो फटने लगती है।

एड़िया फटने के कारण

आयुर्वेद में एड़ियां फटने की स्थिति का वर्णन विपादिका के नाम से किया गया है। इसमें अत्यधिक तकलीफ होती है तथा एड़ियों में दरारें पड़कर खून निकलने लगता है। पैरों की उचित देखभाल न होने से एड़ियों में बिवाइयां फटती हैं। यह बीमारी स्त्रियों में अधिक होती है, क्योंकि स्त्रियां अधिकतर चप्पल ही पहनती हैं।

एड़िया फटने के लक्षण

एड़ियों में दरारें आकर फट जाती हैं। जिससे चलने में कठिनाई, जलन व दर्द होता है।

एड़िया फटने के घरेलू उपाय

रोज रात को गर्म पानी में नमक डालकर एड़ियों को डुबोकर रखें। कोई भी दवा उसके बाद लगाएं। नहाते समय भी पैरों को रगड़ कर साफ करें।

अजवायन को बारीक पीसकर व शहद में मिलाकर रात में बिवाइयों में लगाएं व सुबह उठकर गोमूत्र या स्वमूत्र से धो लें।

एरंड के बीजों को पीसकर बिवाई में लगाएं।

पुराना गुड़, मोम, सेंधानमक, गुग्गुल व राल सम मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। इसमें दोगुनी मात्रा में गाय का घी मिलाकर मलहम बनाकर रख लें। रात को नमक मिले गर्म पानी से पैर धोकर, पोंछकर लगाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

सैन्फवादि लेप व मदनादिलेप का प्रयोग बिवाइयों की चिकित्सा हेतु करते हैं।

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