जीर्ण गुर्दा (वृक्क) शोथ – कारण,लक्षण,उपाय

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गुर्दा में रोग का कारण: यदि तीव्र वृक्क शोथ की चिकित्सा न की जाए, तो रोग बढ़ता चला जाता है और जीर्ण वृक्क शोथ का रूप ले लेता है। लेकिन यह रोग जीवाणु संक्रमण या शरीर में स्वत: उत्पन्न असात्म्यता के कारण स्वतंत्र रूप से भी हो सकता है।

तीव्र व जीर्ण वृक्क शोथ में मुख्य अंतर यह है कि जीर्ण वृक्क शोथ में धमनी गुच्छों के साक्ष-साथ मूत्र स्त्राविणी नलिकाओं तथा रक्तवाहिनियों में भी विकृति आ जाती है। दूसरे यह रोग अधिकतर प्रौढ़ावस्था या वृद्धावस्था में होता है। इस अवस्था में सूजन के कारण गुर्दों में स्थूलता हो जाती है तथा वे कुछ-कुछ सफेद रंग के दिखते हैं।

गुर्दा में रोग का लक्षण

सांस फूलना, थकान, चेहरे व पैरों पर सूजन ये इस रोग के प्रारंभिक लक्षण हैं। बाद में सूजन सारे शरीर में फैल जाती है। आंतों में सूजन होने से उलटी व दस्त की शिकायत हो सकती है।

त्वचा के नीचे, उदर, गुहा या फेफड़ों के आवरण में पानी भर सकता है। रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बहुत कम हो जाती है। पेशाब कम आता है तथा रक्त-कणों व प्रोटीन के कारण पेशाब का रंग गहरा या काला हो जाता है। रक्त में प्रोटीन 3-4% तक कम हो जाती है।

जब खून में प्रोटीन की मात्रा 5% से कम हो जाती है या एलब्यूमिन 2% से कम हो जाता है, तो कोशिकाओं में पानी जाना शुरू हो जाता है, जिससे शरीर में सूजन आ जाती है।

गुर्दा में रोग का घरेलू उपाय

तीव्र वृक्क शोथ में वर्णित चिकित्सा ही इस रोग में भी की जाती है। रोगी को पूर्ण विश्राम व कुछ दिन तक उपवास कराएं। बाद में रोगी को कम प्रोटीन युक्त भोजन दें। दूध बिलकुल न दें।

अदरक का 1-1 चम्मच रस गुड़ मिलाकर दिन में तीन बार दें।

आंवले का 2-2 चम्मच रस सुबह-शाम दे सकते हैं।

एक चम्मच सोंठ का चूर्ण समान मात्रा में गुड़ मिलाकर लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

पुनर्नवामंडूर, दशमूलादिक्वाथ, पुनर्नवासव, दशमूल-हरीतकी, त्रिफला, हरीतकी अवलेह आदि।

पेटेंट औषधियां

नीरी सीरप व गोलियां (एमिल) इस रोग की चिकित्सा में लाभकारी हैं।

जीर्ण गुर्दा (वृक्क) शोथ – कारण,लक्षण,उपाय

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