हेपटाइटिस (यकृत) शोथ – कारण,लक्षण,उपाय

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हेपटाइटिस का कारण: जब आंत में से जीवाणु, अमीबा या वायरस भोजन के परिपाचन के दौरान अथवा रक्तसंधान के दौरान यकृत में पहुंच जाते हैं, तो यकृत में शोथ उत्पन्न हो जाता है। यह मुख्यत: उन्हीं व्यक्तियों में होता है, जिनमें प्रतिरोधक शक्ति कम होती है।

यदि रोग प्रतिरोधक शक्ति पर्याप्त हो, व्यक्ति शराब, मांस, मिर्च-मसालों का सेवन न करता हो, भोजन में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में लेता हो, तो हलके बुखार और हलके दर्द के बाद यकृत की कोशिकाओं में होने वाली प्रतिक्रिया के फलस्वरूप रोगाणु नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति में रोग नहीं पनप पाता। रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने की दशा में यकृत में संक्रमण होकर शोथ उत्पन्न हो जाता है।

हेपटाइटिस का लक्षण

पेट से अफरा, भूख बिलकुल न लगना, कमजोरी, शरीर, आंखों व पेशाब में पीलापन, तेज बुखार, पसलियों के नीचे दाईं ओर भारीपन तथा दबाने या छूने से दर्द होना।

हेपटाइटिस का घरेलू उपाय

तुलसी का रस 2-3 चम्मच की मात्रा में दिन में तीन-चार बार दें।

रोगी को बथुए की सब्जी दें, बथुआ उबालकर उसका पानी पीने को दें।

250 ग्राम पपीता शहद के साथ सुबह-शाम खाएं। विकल्पत: पपीतों की छोटी-छोटी फांकें काटकर 2 सप्ताह के लिए सिरके में डाल दें। दो सप्ताह बाद सुबह-शाम 2-4 फांकें खाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

मण्डूकी रस योग, कामलाहर क्वाथ, आमलकी अवलेह, धात्र्यरिष्ट, विशालादियोग।

पेटेंट औषधियां

एम्लीक्योर डी.एस. सीरप व गोलियां (एमिल), लिवोमिन सीरप व गोलियां (चरक), निरोसिल गोलियां व सीरप (सोल्यूमिक्स) हैपेटाइटिस में प्रभावकारी हैं।

हेपटाइटिस (यकृत) शोथ – कारण,लक्षण,उपाय

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