ईंधन क्या है | ईंधन किसे कहते है?

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ईंधन क्या है | ईंधन किसे कहते है? | indhan kise kahate hain: खाद्य पदार्थ पकाने के लिए लोगबाग गाय, भैंस के गोबर के कंडे, जंगली पेड़-पौधों की लकड़ियों को चूल्हे में जलाकर काम चलाते है। इसके अलावा लकड़ी का कोयला, पत्थर का कोयला, मिट्ठी का तेल, बिजली की सिगड़ी, गैस आदि साधनों का इस्तेमाल ईधन के रूप में होने लगा हैं।

अच्छे ईंधन का चयन कैसे करे?

गांवों में अभी भी गाय और भैंस के गोबर के कंडे से भोजन पकाया जाता है। इसकी धीमी आंच मेँ पका भोजन पोषक तत्वों से युक्त रहता है। आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के भस्म कंडे की अग्नि में ही सर्वोतम बनते है।

ऐसा विश्वास किया जाता है कि कंडों में पके भोजन करने वालों को क्षय (टी.बी.) की तकलीफ नहीं होती।

लकड़ी जलाकर पकाए गए भोजन को धीमी- धीमी आंच पर रखने से उसके पोषक तत्व नष्ट नहीं होते। लकड़ी के कोयले की धीमी आंच में भी भोजन के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते। पत्थर के कोयले से बने भोजन में स्वाद कम ही आता है। स्टोव के माध्यम से भोजन पकाने के लिए मिट्टी का तेल आसानी से मिल जाता है।

आधुनिक समय का सर्वाधिक लोकप्रिय ईंधन एल पी गैस का चूल्हा है, क्योंकि इसमें खर्च कम और प्रयोग करने में काकी सुविधाएं होती हैं।

ईंधनों के प्रयोग करने से क्या नुक़सान होता है?

धुएं द्वारा परेशानी: लकड़ी, कोयले और कंडे का धुआं आंखों में पहुंचना खतरनाक होता है। यह आदमी को अंधा बना सकता है। आंखों में धुआं पहुंचने से फूल पड़ सकते हैं। फूल यानी मोतियाबिंद पड़ने का विकास धीरे-धीरे शुरू होता है। इनको यथास्थिति में लाना कठिन कार्य होता है, क्योंकि धुएं से लेंस को स्थाई क्षति पहुंचती है। धुएं में सम्मिलित जहरीले पदार्थ आंखों के लेंस की पारदर्शिता को धीरे-धीरे कर देते हैं।

पत्थर का कोयला: इसकी आंच एकदम तेज होने के कारण भोजन के पोषक तत्व अकसर नष्ट हो जाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से इसका अधिक प्रयोग करना ठीक नहीं है। भोजन पकाते समय ध्यान रखे कि इसके कंधा उड़कर खाने में न चले जाएं। क्योंकि इससे भोजन के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचने के अलावा कैंसर रोग होने को संभावना होती है। इनकी दुर्गन्ध और धुएं को न सूंघें।

मिट्टी का तेल: यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक होता है। इसकी गंध का दूषित प्रभाव हमारे ऊपर पड़ता है और वातावरण भी प्रदूषित होता है। इसकी लौ में सीधे रोटी पकाने है उसमें इसको गंध आती है और भोजन करने वाले को जी मिचलाहट, अरुचि पैदा होती है।

बिजली को सिगडी (अंगीठी): इसकी तेज आंच में अकसर खाद्य वस्तुएं जल जाती हैं। खाना बनाते समय अत्यंत सावधानी रखनी पड़ती है। जरा-सी चूक से करंट लग कर मौत भी हो सकती है।

एल पी गैस का चूल्हा: इसमें प्रयुक्त होने वाली गैस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। अग्नि में भोजन तो अच्छा पकता है, लेकिन लौ पर रोटी सेंक कर फुलाने से रोटी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं और गैस के आशिंक दुष्प्रभाव उसमें मिलने की पूरी संभावना होती है।

अमेरिका में बच्चों पर किए गए एक शोध से स्पष्ट है कि कुकिंग गैस पर बने भोजन से अधिकांश बच्चों को श्वास की बीमारी लग गई। इस गैस के उच्च ताप पर जलने के करण नाइट्रोजन डायआक्साइड और कार्बन डायआक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलती है। इसलिए रसोई को हवादार तथा स्वच्छ रखना चाहिए। फिर भी एल .पी.जी. चूल्हे पर पका भोजन काफी हद तक अच्छा होता है।

ईंधन का एक अच्छा विकल्प (ऑप्शन) है सोलर कुकर

सोलर कुकर रसोई घर में इस्तेमाल होने वाले खाना पकाने के साधनों जैसा ही एक यंत्र होता है। इसके प्रयोग के लिए गैस, मिट्टी का तेल , कोयला, लकड़ी आदि किसी प्रकार के ईंधन की आवश्यकता नहीं होती और न ही इसमें बिजली की जरूरत पड़ती है।

यह सूर्य की गर्मी को अधिकतम अवशोषित कर अंदर का तापमान 140० डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंचा देता है, ताकि आपका भोजन बिना किसी ईधन के खर्चे के पक जाएं।

इसकी विशेषता यह है कि तापक्रम क्रमिक रूप से बढ़ने के कारण भोजन के पौष्टिक तत्व नष्ट नहीं होते। यही वजह हैं कि इसमें पकाए गए व्यंजन अन्य माध्यमों की अपेक्षा स्वादिष्ट होते हैं।

इस यंत्र में एक साथ चार पदार्थ पकाए जा सकते हैं, जो पांच सदस्यों के लिए पर्याप्त होते हैं। इस पर निगरानी रखने की भी जरूरत नहीं होती जिससे समय की बचत होती है।

ईंधन क्या है | indhan kise kahate hain

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