ज्यादा रोटी खाने के नुकसान

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ज्यादा रोटी खाने के नुकसान: आम लोगों में धारणा यह है कि जितना अधिक भोजन किया जाएगा है उतना ही वह ताकत देगा, शरीर को बलिष्ठ बनाएगा। जबकि वास्तविकता यह है कि अधिक और गरिष्ठ भोजन खाने वालों की अपेक्षा थोड़ा और सादा भोजन करने वाले ही अधिक शक्तिशाली और बड़ी आयु के होते हैं।

कुछ आंकडों के अनुसार संसार में भोजन के अभाव से जितने लोग अकाल पीड़ित होकर मरते है, उससे कहीं अधिक अनावश्यक व ज्यादा भोजन करने के कारण रोग ग्रस्त होकर मरते है। डॉक्टर लोएंड ने मनुष्य की आयु घटाने वाले जो 10 कारण बताए है, उनमें से सबसे पहले नंबर पर रखा है अधिक खाने की आदत।

अधिक भोजन से हानि – ज्यादा रोटी खाने के नुकसान

आवश्यकता से अधिक भोजन करने वालों की स्फूर्ति चली जाती है। बहुत समय तक वे नि:चेष्ट व आलस्यग्रस्त पड़े रहते हैं। उनींदापन छाया रहता है। अजीर्ण के कारण छाती में जलन, सिर में दर्द, भारीपन, जी मिचलाना, खट्टी डकारे आना, पेट में दर्द, पेट फूलना, मुंह में पानी भर आना, पेट में गैस का अधिक बनना, पेट में भारीपन लगना और पत्थर जैसा कड़क होना जैसी तकलीफें हो सकती है।

तले व गरिष्ठ भोजन से हानियां

आजकल लोगों को तला और भुना भोजन अधिक पसंद आता है। अकसर पूरी तरह गर्म न हुए तेल में इन्हें पकाने से तेल का बहुत-सा भाग ये भोज्य पदार्थ सोख लेते है, जिससे अधिक तैलीय और अस्वास्थ्यकर सामग्री सेवन कर ली जाती है। इसके प्रभाव से शरीर में वसा की मात्रा बढ़ जाती है।

एक बार गर्म करके उपयोग करने के बाद दोबारा जब तेल के गर्म कर खाद्य पदार्थ तले जाते है तो एक्रोलीन की मात्रा और भी बढ़ जाती है और अनुपात में ज्यादा नुकसान की संभावनाएं बढ़ती हैं।

हानिकारक प्रभावों से कैसे बचे

भोजन जीवन की अनिवार्य शर्त है किंतु संतुलित और निश्चित मात्रा में भोजन करना ही स्वास्थ्यप्रद होता है। आयुर्वेद मतानुसार पेट का आधा भाग आहार से भरे, चौथाई को पानी के लिए और शेष चौथाई को हवा के लिए खाली रहने दें। इस नियम से भोजन करने वाले को पेट में आराम और हलकापन अनुभव होता रहेगा।

चिकित्सकों का कहना है कि हमारी पाचन शाक्ति से अधिक किया गया भोज़न पोषक होने की बजाय शोषक सिद्ध होता है। अत: हमें अधिक भोजन करने से अधिक लाभ होगा, इम प्रवृत्ति को बदलना चाहिए।

वास्तव में हम भरपेट जितना भोजन करते है, उसका एक चौथाई हिस्सा ही हमारे शरीर की क्षतिपूर्ति के लिए पर्याप्त होता है। शेष तीन चौथाई भोजन नुकसान ही करता है।

दावतों में अकसर लोगबाग आवश्यकता से अधिक तला-पका गरिष्ठ भोजन खा लेते है। ज़ल्दी-जल्दी में खाया यह भोजन बिना अच्छी तरह चबाए ही खाना ठीक नहीं। इससे अपच अजीर्ण की शिकायत होकर पेट दर्द, जी मिचलाहट की तकलीफ़ भी हो सकती है। अत: आराम से बैठकर चबा-चबा करके, शांत भाव से भोजन करें। इससे लार व एंजाइम्स का स्राव भोजन में मिलकर उसका पाचन बिना किसी दुष्प्रभाव के हो जाता है।

ज्यादा रोटी खाने के नुकसान

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