कान बहना – कारण,लक्षण,उपाय

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कान बहना कारण:जुकाम, खांसी या गले के संक्रमण की चिकित्सा न की जाए, तो कान में भी संक्रमण हो जाता है। छोटे बच्चे जिनका गला खराब हो या खांसी हो, जब कान में मुंह लगाकर धीरे से कोई बात करते हैं, तो सांस के साथ रोग के जीवाणु कान में पहुंच जाते हैं।

कान में फोड़ा-फुंसी हो, पानी, रुई या अन्य कोई बाहरी वस्तु कान में रह जाए, तो भी कान में संक्रमण हो सकता है।

कान बहना लक्षण

रोगी के कान से बदबूदार स्त्राव या मवाद बाहर निकलती है।

कान बहना घरेलू उपाय

लहसुन की 2 कलियां व नीम की दस कोंपलें तेल में गर्म करें। दो-दो बूंद दिन में तीन-चार बार डालें।

150 ग्राम सरसों का तेल किसी साफ बरतन में डालकर गर्म करें और गर्म होने पर 10 ग्राम मोम डाल दें। जब मोम पिघल जाए तो आग पर से उतार लें और इसमें 10 ग्राम पिसी हुई फिटकरी मिला दें। 3-4 बूंद दवा कान में सुबह-शाम डालें।

2 पीली कौड़ी का भस्म 200 मिली ग्राम व दस ग्राम गुनगुने तेल में डालें। छानकर 2-3 बूंद कान में डालें।

नीबू के रस में थोड़ा-सा सज्जीखार मिलाकर 2-3 बूंद कान में टपकाएं। आग से उतार कर ठंडा करें व छानकर रख लें। 2-3 बूंद कान में डालें।

10 ग्राम रत्नजोत को 100 ग्राम सरसों के तेल में जलाएं। ठंडा होने पर छानकर रखें और 2-3 बूंद कान में डालें।

धतूरे की पत्तियों का रस निकालकर थोड़ा गुनगुना करें व 2-3 बूंद कान में डालें।

नीम की पत्तियों का रस 2-3 बूंद कान में डालें।

तुलसी की पत्तियों का रस 2-3 बूंद कान में डालें।

आधा चम्मच अजवायन को सरसों या तिल के तेल में गर्म करें। फिर आंच से उतार लें। गुनगुना रह जाने पर 2-3 बूंद डालें।

आयुर्वेदिक औषधियां

आरग्वधादि क्वाथ से कान को धोएं। पंचवकल क्वाथ या पंचकषाय क्वाथ का प्रयोग भी किया जा सकता है। समुद्रफेन चूर्ण का प्रयोग भी लाभदायक होता है।

कान बहना – कारण,लक्षण,उपाय

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