कान दर्द – कारण,लक्षण,उपाय

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कान दर्द का कारण: कान के अंदर मैल फूल जाने, घाव हो जाने, कान में सूजन होने या संक्रमण के कारण कान में दर्द होता है। गले या नाक में संक्रमण होने पर समय रहते चिकित्सा न की जाए, तो उससे भी कान में संक्रमण हो सकता है।

कान दर्द का लक्षण

कान का सूजना, कान से मल निकलना, कानों में रुक-रुक कर दर्द होना आदि।

कान दर्द का घरेलू उपाय

तुलसी के पत्तों का रस निकालकर गुनगुना कर लें और दो-तीन बूंदें सुबह-शाम डालें।

नीबू का रस गुनगुना करके 2-3 बूंद कान में डालें।

प्याज का रस निकालकर गुनगुना करके 2-3 बूंद सुबह-शाम कान में डालें।

बकरी का दूध उबाल का ठंडा कर लें। जब गुनगुना रह जाए, तो इसमें सेंधानमक मिलाकर 2-3 बूंद दोनों कानों में टपकाएं।

मूली के पत्तों को कूटकर उसका रस निकालें। रस की एक तिहाई मात्रा के बराबर तिल के तेल के साथ आग पर पकाएं। जब केवल तेल ही बचा रह जाए, तो उतार कर छान लें। कान में 2-3 बूंद डालें।

कपूर व घी समान मात्रा में लेकर पकाएं। पकने पर उतार कर ठंडा कर लें व 2-3 बूंद कानों में डालें।

आक के पत्तों का रस, सरसों का या तिल का तेल तथा गोमूत्र या बकरी का मूत्र बराबर मात्रा में लेकर थोड़ा गर्म करें और कान में 2-3 बूंदें डालें।

लहसुन की दो कलियां छीलकर सरसों के तेल में डालकर धीमी आंच पर पकाएं। जब लहसुन जलकर काला हो जाए, तो उसे उतार कर ठंडा करें व छान कर। दो-तीन बूंदें कान में डालें।

अदरक का रस, सेंधानमक, सरसों का तेल व शहद बराबर मात्रा में लेकर गर्म करके और गुनगुना होने पर 2-3 बूंद कान में डालें।

आक की पकी हुई पीली पत्ती में घी लगाकर आग पर गर्म करें। इसे निचोड़कर रस निकालें व दो-तीन बूंदें कान में डालें।

आम की पत्तियों का रस निकालकर गुनगुना करें व 2-3 बूंद कान में डालें।

आयुर्वेदिक औषधियां

महतपंचमूल सिद्ध तेल, सुरसादि पक्व तेल का प्रयोग किया जा सकता है रामबाण रस, लक्ष्मीविलास रस व संजीवनी वटी का प्रयोग खाने के लिए करें।

कान दर्द – कारण,लक्षण,उपाय

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