खसरा – कारण,लक्षण,उपाय

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खसरा का कारण: यह रोग प्राय: बच्चों में होता है। इसमें बच्चे का मुंह कुछ फूला-फूला सा रहता है तथा सूंघने पर एक विशेष प्रकार की गंध आती है। यह एक संक्रामक रोग है, जो रोगी के छींकने, खांसने व बोलने से फैलता है, क्योंकि रोगी की आंखों, गले व नाक से निकले स्राव में इस रोग का वाइरस मौजूद रहता है।

खसरा का लक्षण

बच्चे को जुकाम रहता है व छींकों के साथ पानी निकलता है। गले में खराश के साथ सूखी खांसी होती है। बुखार के साथ आंखों में दर्द व लाली रहती है। 3-4 दिन के बाद गुलाबी या लाल रंग के दानें शरीर पर निकल आते हैं। जो अगले 3-4 दिन के बाद मुरझाने लगते हैं और बुखार उतरना शुरू हो जाता है।

बच्चे को कान में सूजन व संक्रमण हो सकता है। श्वसनक ज्वर (न्यूमोनिया) भी काफी बच्चों में देखा जाता है। आंखों में सुमन रहने के कारण घाव भी बन सकते हैं, जिनकी उपेक्षा करने पर ही दृष्टि दोष हो सकता है। ऐंठन प्राय: बच्चों में हो जाती है। इसके अतिरिक्त मुंह में घाव, आन्त्रशोथ आदि रोग की उपद्रव स्वरूप हो सकते हैं।

खसरा का घरेलू उपाय

हलदी का पिसा हुआ बारीक चूर्ण चौथाई चम्मच से लेकर 1 चम्मच तक करेले के स्वरस के साथ दें। रोगी बालक की उम्र और शारीरिक बल को देखकर सुबह-शाम देना चाहिए।

हरड़, बहेड़ा, आंवला, गिलोय, अडूसा, नीम की छाल और कत्था बराबर मात्रा में लेकर इनका काढ़ा बनाकर रखें। 10-20 बूंद सुबह-शाम दें।

करेले की पत्तियों के 4 चम्मच रस में 1 चम्मच शहद व 2 चुटकी हलदी का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम लें।

जौ का पानी उबाल कर रोगी को बार-बार दें।

आयुर्वेदिक औषधियां

खदिरारिष्ट, स्वर्ण भस्म, लौह भस्म।

पेटेंट औषधियां

निरोसिल सीरप व गोलियां (एलारसिन)।

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