लेडीज के लिए ब्रा के बारे में रोचक जानकारी

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लेडीज के लिए ब्रा के बारे में रोचक जानकारी: स्त्री की शारीरिक सुंदरता में उसके वक्षस्थल का आकर्षण काफी महत्त्व रखता है। अच्छी भली सुंदर स्त्री भी जब अपने ढीले और बेडौल स्तनों की ओर ध्यान नहीं देती, तो उसकी सुंदस्ता में ये बाधक बन जाते है। यही कारण है कि अपने स्तनों में उभार लाने, उनमें कसाव बनाए रखने तथा उनको सुडौल आकार में प्रदर्शित करने के लिए स्त्रियां ‘ब्रा’ का प्रयोग करने लगी हैं।

ब्रा फुल फॉर्म इन हिंदी

ब्रा को सामान्य तौर पर औरतें हिंदी में चोली बोलती है। ब्रा की फुल फॉर्म है “Breast Resting Area ब्रेस्ट रेस्टिंग एरिया” जिसको अंग्रेजी में brassiere भी कहते है।

ब्रा कब पहनें

सामान्य तौर पर लड़कियों में 12 से 14 वर्ष की आयु तक उनके वक्षस्थल पर उभार आना शुरू हो जाता है और वृद्धि की यह प्रक्रिया 14 से 38 वर्ष तक की आयु के दौरान निरक्षर होती रहती है।

इस दोरान यदि स्तनों की सही देखभाल पर ध्यान न दिया जाए, तो इनका आकार बिगड़ सकता है। सोवियत संघ के वैज्ञानिको ने चेतावनी दी है कि वक्ष का विकास प्रारंभ होते ही ब्रा न पहने क्योंकि बढ़ रहे वक्ष पर ब्रा के बंधन से बाद में उनमें शिशुओं के लिए दूध की कमी हो सकती है।

वैज्ञानिको ने 17 वर्ष की किशोरियों को ‘ब्रा’ पहनने की मनाहीं की है।

ब्रा कैसी पहनें?

सूती और सस्ते कपड़ों से बनी सादी ब्रा, जो हलकी व शीतल होती है इनसे स्तनों का तापक्रम नहीं बढ़ता, जबकि संपन्न परिवारों की आधुनिकाएं मूल्यवान, तरह-तरह की आकर्षक डिजाइनों की कलात्मक गर्म, मोटी फोम युक्त, नायलोन आदि कृत्रिम रेशों य निर्मित सिंथेटिक, अधिक कसी हुई ताकि स्तनों का उभार स्पष्ट दिखाई दे ब्रा पहनना अपनी शान समझती है। जो लाभ के स्थान पर हानि पहुंचाती है।

ब्रा पहनने के नुक़सान

नवीनतम वैज्ञानिक खोजों के अनुसार अत्यधिक कसी, मोटी और कृत्रिम रेशों की सिंथेटिक निर्मित ब्रा पहनने से स्तनों के ऊतक आवश्यकता से अधिक गर्म हो जाते है, जिससे वक्ष का कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैँ।

जो स्त्रियां नायलान आदि गर्म किस्म की ‘ब्रा’ कस कर बांधती है, उनके स्तनों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है, जबकि सूती व सामान्य किस्म की उचित प्रकार से पहनी गई ब्रा स्तनों को शीतलता प्रदान करती है, जिससे कैंसर की संभावना घट जाती है।

ब्रा का चुनाव व पहनने में सावधानी बरतें

ब्रा के चुनाव व पहनने में यदि कुछ सावधानियां बरती जाएं तो संभावित दुष्परिणामों से बचा जा सकता है। ये सावधानियां इस प्रकार है:

  • स्तन स्त्री शरीर का अत्यंत्त कोमल अंग होता है अत: ब्रा ऐसी ही पहने जो आरामदायक हो और स्तनों को सहारा देकर आकर्षण पैदा करें।
  • हर स्त्री को अपने नाप की सही फिटिंग वाली ब्रा ही पहननी चाहिए। वह न तो अधिक ढीली हो और न ही अधिक कसी हुई हो।
  • नायलॉन, फोम, मोटी सिंथेटिक वाली ब्रा न पहनें, जिससे कि आपके स्तनों को अधिक गर्मी, कसाव व तनाव मालूम पड़े। यदि किसी कारणवश पहनना ही पड़े, तो कुछ घंटों के बाद उतार दें। सोते समय स्तनों को ढीला छोड़ें, ब्रा न पहनें।
  • जहां तक हो सके, ब्रा हमेशा सूती , नर्म कपड़े की बनी हुई ही पहने ताकि उसमें पसीना सोखने की उचित क्षमता हो। इससे स्तनों की शीतलता कायम रहेगी।
  • गर्भवती व प्रसूता महिलाओं के लिए उपलब्ध मैटरनिटी ब्रा का उपयोग करें और इस दौरान स्तनों में हुई 7 से 10 सेंटीमीटर तक की वृद्धि के हिसाब से नई ब्रा खरीदें, पहले की ब्रा पहनने की कोशिश न करें, अन्यथा स्तनों को नुकसान पहुंच सकता है।

सबसे अच्छी ब्रा कौन सी है?

वो ब्रा सबसे अच्छी है जो नर्म और सूती कपडे की बनी हुई हो। और जो पसीना सोख सके।

लड़कियों को कौन सी ब्रा पहननी चाहिए?

लड़कियों को सूती कपडे की पसीना सोखने वाली नर्म ब्रा पहननी चाहिए।

ब्रा नहीं पहनने के नुकसान

ब्रा नहीं पहनने से स्त्रियों के स्तन ढीले पड़ सकते है जो की शारीरिक हेल्थ के लिए ठीक नहीं है और अगर स्त्रियाँ कुछ सालो तक लगातार ब्रा नहीं पहनतीं है तो उनके ब्रेस्ट यानी स्तनों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्रा नहीं पहनने से बच्चो के लिए स्तनों में दूध इक्कठा होना भी बंद हो जाता है।

इस तरह के और भी कई नुकसान है ब्रा नहीं पहनने के इसलिए अगर आप एक स्त्री है तो ब्रा अच्छी पहने और अपनी हेल्थ का ध्यान रखे। आज के समय में अगर इंसान के पास सबसे बड़ा कोई खजाना है तो वो उसकी हेल्थ ही है।

लेडीज के लिए ब्रा के बारे में रोचक जानकारी

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