मधुमेह – कारण,लक्षण,उपाय

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मधुमेह का कारण: रक्त और मूत्र में शर्करा की मात्रा बढ़ जाने के कारण इस रोग को मधुमेह कहा गया है। आयुर्वेद में इसे प्रमेह का ही एक भेद माना गया है।

अनियमित आहार, शारीरिक श्रम का अभाव, चिंता, भय, तनाव, विषाद आदि मानसिक कष्टों की अधिकता, मोटापा, उच्च रक्तचाप आदि इस रोग के प्रमुख कारण हैं।

आधुनिक मतानुसार इन्सुलिन उत्पादन करने वाले सेलों में विकृति के फलस्वरूप इन्सुलिन का निर्माण प्रभावित होता है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। दोनों मतों का समन्वय करते हुए कहा जा सकता है कि उपरोक्त वर्णित कारणों से इन्सुलिन निर्माण की प्रक्रिया में बाधा आती है, जिससे रक्त व बाद में मूत्र में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है।

मधुमेह का लक्षण

पेशाव बार-बार आना, मुंह सूखना, प्यास अधिक लगना, पिंडलियों में दर्द, थकान, कमजोरी, आलस्य, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, किसी भी कार्य में मन न लगना आदि रस रोग के मुख्य कारण हैं। रोग बढ़ने के साथ-साथ कब्ज, नींद न आना, अपच आदि लक्षण भी उत्पन्न हो जाते हैं।

मधुमेह का घरेलू उपाय

मधुमेह के रोगी को नियमित रूप से प्रात: भ्रमण करना चाहिए। व्यायाम भी अति आवश्यक है। गरिष्ठ पदार्थों के बजाय भोजन में सुपाच्च व हलके पदार्थ लेने चाहिए। निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग किया जा सकता है-

जामुन की कोंपलें 30 ग्राम व 5 काली मिर्चें पानी के साथ पीसकर दिन में दो बार प्रयोग करें।

जामुन की सूखी गुठलियों का चूर्ण 1 चम्मच दिन में तीन बार ताजे पानी के साथ लें।

पके हुए अमरूद को उपलों (कंडे) की गर्म-गर्म राख में दबाकर भुर्ता बना लें। स्वाद के अनुसार जीरा, काला नमक व काली मिर्च मिलाकर सुबह-शाम लें।

10 बिल्वपत्र सुबह-शाम पानी के साध पीसकर लें।

एक चम्मच मेथी के दानों को थोड़ा कूटकर शाम को पानी में भिगो दें। सुबह इसे अच्छी तरह घोंटकर बिना मीठा मिलाए पी जाएं। इसके प्रयोग से 2 महीने में रोग बिलकुल ठीक हो जाता है।

सूखा आंवला और सौंफ बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। एक-एक चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लें।

आधा चम्मच बारीक पिसी हुई हलदी 2 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम चटाएं।

नाश्ते के बाद ताजे करेलों का रस 20-30 ग्राम की मात्रा में लें।

बेल के 20-30 पत्तों का रस निकाल कर सुबह-शाम लें।

लहसुन की एक कली सुबह खाली पेट लें।

2 चम्मच नीबू का रस और 4 चम्मच आंवले के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लें।

आधा चम्मच जीरा बारीक पीसकर सुबह-शाम लें।

अंजीर के बीज गूदे से अलग कर, सुखाकर पीस लें। एक चम्मच चूर्ण एक चम्मच शहद के साथ खाली पेट लें।

एक चौथाई चम्मच हींग भूनकर, पीसकर 2 चम्मच करेले के रस में मिलाकर सुबह-शाम लें।

चार चम्मच आंवले का व चार चम्मच करेले का रस मिलाकर खाली पेट लें।

करेले के पत्तों को 2 चम्मच की मात्रा के चूर्ण बनाकर उसमें चुटकी भर हींग मिलाकर सुबह के समय लें।

यदि मधुमेह वंशानुगत हो तथा मोटापा भी हो, तो मीठे नीम के दस पत्ते सुबह खाली पेट 3-4 महीने तक चबाकर खाएं।

चंदन को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 1 चम्मच चूर्ण बराबर मात्रा में आंवले के चूर्ण के साथ एक गिलास पानी में उबालें। छानकर सुबह-शाम पिएं।

दो चम्मच आंवले के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लें।

खीरे का रस 100 ग्राम की मात्रा में सुबह खाली पेट लें।

रोगी को शलगम की सब्जी खिलाएं।

रोगी को दिन में कई बार टमाटर खिलाएं या टमाटर का रस पीने को दें।

रोगी को दिन में तीन बार 4-5 चकोतरा के फल खिंलाएं।

सोयाबीन में काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट है, लेकिन स्टार्च की मात्रा नगण्य है। सोयाबीन मधुमेह के रोगी हेतु सर्वोत्तम भोजन है, क्योंकि सोयाबीन में विद्यमान कार्बोहाइड्रेट से शर्करा के स्तर में वृद्धि नहीं होती।

चने का प्रयोग मधुमेह में काफी लाभदायक है। अंकुरित चने, चने की रोटी, चने की सब्जी या भुने हुए चने खाने से इन्सुलिन ले रहे रोगियों को भी आशातीत लाभ होता है।

अंकुरित उड़द एक मुट्ठी, एक चम्मच शहद और आधी कटोरी करेले के रस के साथ खाली पेट छह माह तक लें। इस दौरान भोजन में कार्बोहाइड्रेट न लें। इससे न केवल मधुमेह के उपद्रवों की शांति होती है, बल्कि मधुमेहजन्य नपुंसकता में भी चमत्कारिक लाभ होता है।

अरहर की पत्तियों का रस 30 मि.ली. सुबह-शाम नमक मिलाकर लें।

रोज 50 ग्राम भुनी हुई मूंगफली खाएं। इससे भोजन में पौष्टिकता तो बढ़ेगी ही, साथ ही रक्तवाहिनियों से संबंधित उपद्रव भी नहीं होंगे।

आयुर्वेदिक औषधियां

बसन्तकुसुमाकर रस, मधुमेहान्तक वटी, वृहत्त् सोमनाथ रस। स्वर्णघटित चन्द्रकान्त रस, शिलाजीत आदि आयुर्वेदिक दवाएं भी इस रोग में ली जा सकती हैं।

पेटेंट औषधियां

डिवाइन डायब कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा), जम्बुलीन गोलियां (ऊंझा), डाइबिकोन गोलियां (हिमालय), एमरी प्लस (एमिल), हाइपोनिड गोलियां (चरक), मधुमेहारि योग (वैद्यनाथ), पैनक्रीओन कैप्सूल (माहेश्वरी)।

मधुमेह – कारण,लक्षण,उपाय

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