मलेरिया – कारण,लक्षण,उपाय

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मलेरिया का कारण: यह रोग प्याजमोडियम नामक जीवाणु से फैलता है और मादा एनोफिलीज मच्छर द्वारा मनुष्य को काटे जाने पर इसका संक्रमण होता है।

मादा एनोफिलीज मच्छर द्वारा काटे जाने पर प्लाजमोडियम नामक जीवाणु मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है। प्रवेश के लगभग 9 दिन बाद अपनी संख्या में हजारों गुना वृद्धि करके प्लाजमोडियम शरीर में मलेरिया बुखार को उत्पन्न करते हैं।

मलेरिया का लक्षण

प्याजमोडियम की विभिन्न तीन प्रकार की किस्सों के संक्रमण के आधार पर बुखार एक दिन, दो दिन या तीन दिन छोड़कर आता है। बुखार चढ़ने से पहले रोगी को ठंड लगती है। कुछ देर के बाद पसीना आकर बुखार उतर जाता है।

मलेरिया का घरेलू उपाय

5 तुलसी के पत्ते व 3 काली मिर्च घोट कर सुबह-शाम रोगी को पिलाएं।

तीन ग्रास सत्यानाशी के साबुत बीज गर्म पानी से खिलाएं।

फिटकिरी को भूनकर पीस लें। एक ग्राम की मात्रा में सम भाग मिसरी मिलकर सुबह-शाम तीन दिन तक दें।

बारीक पिसा हुआ कुटकी का 1 ग्राम चूर्ण, समभाग चीनी मिलाकर दो से तीन बार रोगी को ताजे पानी के साथ 3 दिन तक दें।

1 ग्राम कुटकी व 1 ग्राम काली मिर्चों का चूर्ण, 1 चम्मच तुलसी का स्वरस व 1 चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम दें।

खाने का पिसा हुआ साधारण नमक तवे पर धीमी आंच में भूनें। भुनते-भुनते जब काफी के रंग का हो जाए, तो उतारकर ठंडा करके बोतल में भर कर रख लें।

ज्वर आने के नियत समय से थोड़ी देर पहले 1 चम्मच भुना हुआ यह नमक एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर लें। इसकी एक खुराक बुखार उतर जाने पर भी लें। यह दवा लगातार दो दिन तक लें।

बेलगिरी के फूल व तुलसी की पत्तियां बराबर मात्रा में लेकर पीस लें व उनका रस निकाल लें। 1 चम्मच रस, 1 चम्मच शहद के साथ दिन में तीन बार लें।

रोगी को दिन में तीन-चार बार चकोतरे खिलाएं। चकोतरे में प्राकृतिक रूप से कुनैन विद्यमान होती है।

आयुर्वेदिक औषधियां

सप्तपर्ण घनवटी, महाज्वरांकुश रस, कृष्णचतुर्मुख रस, चन्दनादि लौह, विषम ज्वारन्तक लौह, सर्वज्वरहर लौह आदि।

पेटेंट औषधियां

चिराकिन गोलियां (झण्डु), सुदर्शनधनवटी (वैद्यनाथ)।

मलेरिया – कारण,लक्षण,उपाय

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