माइग्रेन (आधासीसी) – कारण,लक्षण,उपाय

Spread the love

माइग्रेन: ये रोग आधे सिर में होता है और गजब का दर्द रहता है कुछ घंटो तक इसलिए इस रोग को आधासीसी रोग कहते है

माइग्रेन का कारण

आयुर्वेद में इस रोग का उल्लेख अर्धावभेदक के नाम से आया है। इसका वेग कभी-कभी उठता है और दर्द का घंटों तक रहता है। यह दर्द प्राय: आधे सिर में रहता है, लेकिन कभी-कभी पूरे सिर में और गरदन में भी फैल जाता है।

सिर को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्तवाही धमनियों के फैल जाने या उनमें रक्त के अधिक भर जाने के कारण यह रोग हो जाता है।

अजीर्ण, जीवाणु संक्रमण, एलर्जी आदि कारणों से रक्तवाहिनियों की कार्यप्रणाली पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे मांसपेशियों को पूरा रक्त नहीं मिल पाता और तीव्र दर्द के रूप में यह रोग प्रकट होता है। क्रोध, चिंता, तनाव आदि मानसिक कारणों से भी यह रोग हो सकता है।

माइग्रेन का लक्षण

सुबह उठते समय सिर चकराने लगता है और आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है। उलटी महसूस होती है। 10-15 मिनट के बाद एक कनपटी के पास दर्द अनुभव होता है। जिधर दर्द होता है, उधर की आंख की पुतली फैली हुई मिलती है। 2-3 घंटे के बाद दर्द कुछ कम होने लगता है। रोगी को कमजोरी महसूस होती है व उसे नींद आ जाती है। उठने पर दर्द खत्म या कम हुआ मिलता है।

माइग्रेन का घरेलू उपाय

धनिए की गिरी, काली मिर्च व उस्तेखद्दूस सम मात्रा में लें। 1 ग्राम दवा ठंडाई की तरह पीसकर दो चम्मच शहद के साथ पाव भर पानी में मिलाकर तीन दिन तक सूर्योदय से पहले दें।

रीठे का छिलका पानी में पीसकर दो-दो बूंद नाक में टपकाएं।

गाय का ताजा घी या सरसों का तेल दो-दो बूंद सुबह-शान उस ओर की नाक में डालें, जिधर दर्द हो रहा हो।

पीपल के सूखे पत्ते को गोलाकार मोड़कर उसमें अजवायन के बीज रखकर बीड़ी की तरह पिएं।

दालचीनी व छोटी इलायची बराबर मात्रा में पीसकर रख लें। एक चम्मच चूर्ण को 4 गुना तिल के तेल में गर्म करें। तेल को उतार कर, ठंडा कर माथे व सिर पर मालिश करें।

आयुर्वेदिक औषधियां

मुण्डी योग, त्रिफला चूर्ण या षडगं क्वाथ को चंद्रप्रभावटी के साथ देने का विधान इस रोग की चिकित्सा हेतु बताया गया है। षड्बिंदु तेल, अणु तेल या दशमूल तेल का प्रयोग नस्य हेतु किया जा सकता है।

पेटेंट औषधियां

सिफाग्रेन गोलियां व नाक में डालने की दवा (चरक) ट्रक्नीवील फोर्ट गोलियां (चरक) व गोदन्ती मिश्रण गोलियां (वैद्यनाथ)।

माइग्रेन (आधासीसी) – कारण,लक्षण,उपाय

Leave a Comment