मिर्गी – कारण,लक्षण,उपाय

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मिर्गी का कारण: बुद्धि एवं मन की विकृति के कारण आवेगों में आने वाले इस रोग में रोगी थोड़ी देर के लिए मुर्च्छित हो जाता है। रोगी को आग, पानी या किसी भी स्थान पर दौरा पड़ सकता है।

मिर्गी का लक्षण

रोगी काल्पनिक वस्तुएं देखते हुए गिर जाता है, आंखें चढ़ जाती हैं, मुंह से झाग आता है। हाथ-पैरों में ऐंठन व पूरे शरीर में कम्पन रहता है। रोग का वेग थोड़ी देर के लिए आता है, उसके बाद रोगी को होश आ जाता है, उसे ऐसा लगता है, जैसे अभी नींद से सोकर उठा हो।

मिर्गी का घरेलू उपाय

आवेग आने के समय

  • प्याज के रस की 5-10 बूंदें रोगी की नाक में डालें।
  • तुलसी की पत्तियों का 10 ग्राम रस निकाल कर उसमें 1 ग्राम सेंधानमक मिलाकर इसकी 5-10 बूंदें नाक में डालें।
  • राई पीसकर रोगी को सुंघाएं, तुरंत होश आ जाएगा।

आवेग आने के बाद

  • 1-2 ग्राम लहसुन को एक चम्मच तिल के साथ सुबह-शाम 21 दिन तक सेवन करें।
  • 21 जायफलों की माला बनाकर गले में पहनने से मिरगी रोग ठीक होता है।
  • छोटी पिप्पल का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार बराबर मात्रा में शहद के साथ चटाएं।
  • ब्राह्मी के 10 ग्राम रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार चटाएं।
  • ब्राह्मी बूटी को बारीक पीसकर पांच गुने बादाम के तेल में अच्छी तरह खरल करें। इसे छानकर शीशी में रख लें और रोगी की नाक के दोनों नासा छिद्रों में सुबह-शाम डालें। रोगी को पलंग पर इस तरह लिटाएं कि उसका सिर नीचे लटकता रहे, ताकि दवा मस्तिष्क तक पहुंच सके।
  • बच का चूर्ण 5-10 ग्राम बराबर मात्रा में शहद मिलाकर दिन में तीन बार रोगी को दें।
  • मुलेठी का 1 चम्मच चूर्ण तीन गुना पेठे के स्वरस के साथ दिन में 2 बार रोगी को दें।
  • रोगी को दिन में चार-पांच बार सौ-सौ ग्राम अंगूर खिलाएं।
  • सीताफल की सब्जी रोगी को खिलाएं।
  • सुबह-शाम रोगी को 40-50 ग्राम प्याज का रस पिलाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

वातकुलान्तक रस, चण्ड भैरव रस, स्मृतिसागर रस, लघुपंचगव्य घृत, महाचैतस घृत, पलंकपाद्य तेल, कल्याणक चूर्ण, सर्पगन्धा वटी, हिग्वांद्य घृत, चतुर्भुज रस, मोती भस्म आदि।

पेटेंट औषधियां

नैड फोर्ड गोलियां (चरक) की मिर्गी की चिकित्सा में प्रभावकारी हैं।

मिर्गी – कारण,लक्षण,उपाय

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