मियादी बुखार – कारण,लक्षण,उपाय

Spread the love

मियादी बुखार का कारण: इसे मन्थर ज्वर, आन्त्र ज्वर, मोतीझारा इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इस रोग में लगातार कई दिनों तक बुखार रहता है। यह प्राय: गर्मी के मौसम में फैलता है। आंतों में मुख्य रूप से इसका संक्रमण होने के कारण ही इसका नाम आन्त्र ज्वर पड़ा।

सालमैनोल टाइफ नामक जीवाणु से फैलने वाला यह रोग अशुद्ध पानी व भोजन के कारण होता है।

मियादी बुखार का लक्षण

जीवाणु संक्रमण के 12-14 दिन बाद इस रोग के लक्षण प्रकट होते हैं। 12-14 दिन के इस समय में शरीर में सुस्ती, सिर में दर्द व भूख की कमी रहती है। 12-14 दिन बाद बुखार चढ़ता है, जो बढ़ता चला जाता है। सुबह बुखार कम होता है, परंतु सायंकाल से बढ़ना शुरू हो जाता है।

रोगी सुस्त रहता है, उसका पेट कुछ अफारा हुआ व स्पर्श करने पर गर्म प्रतीत होता है। प्यास अधिक लगती है। प्रथम सप्ताह के अन्त में पेट तथा छाती पर मोती जैसे चमकते हुए छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगते हैं। दूसरे सप्ताह में दाने लुप्त होने लगते हैं व बुखार उतरने लगता है। यदि चिकित्सा न की जाए, तो यह बुखार लंबे समय तक चलता है।

मियादी बुखार का घरेलू उपाय

यदि दाने निकलने शुरू हो गए हों या न निकले हों और प्रयोगशाला की जांच से मोतीझारा की पुष्टि हो जाए, तो निम्न योग प्रयोग में ले आएं :

  • 2 पके हुए अंजीर, 5 दाने मुनक्के व 3 ग्राम खूबकलां को 400 ग्राम पानी में पकाएं। आधा बचा रहने पर अच्छी तरह मल कर छान लें और मिसरी मिलाकर रोगी को पिलाएं। यह दवा सुबह-शाम, दोनों समय दें। जब तक दाने निकलते रहें, दवा देते रहें। साथ में तुलसी के 5-5 पत्ते भी खिलाते रहें। इसके सेवन से 3 दिन से लेकर 1 सप्ताह के अंदर बुखार उतर जाएगा। यदि बीच में दस्त लग जाएं, तो दवा बंद कर दें।
  • केसर 1 ग्राम व 15 तुलसी के पत्ते पीसकर पानी में घोलकर रोगी को पिलाएं।
  • यदि दाने खूब निकल आए हों, तो निम्न योग दें-250 ग्राम ऊर्क गावजबां मिट्टी के सकोरे में लेकर उसमें 19 हरे पत्ते लिसौड़ा के भिगो दें। प्यास लगने पर यह दवा मिसरी डालकर पिलाएं, इससे 3-4 दिन में बुखार उतर जाएगा।
  • 1 ग्राम केसर, 2 ग्राम काली मिर्च, 5 ग्राम लौंग, 5 ग्राम जावित्री व 10 ग्राम तुलसी के पत्ते लेकर साफ पानी के साथ पीस लें। पिसने पर इसमें 5 ग्राम मोती भस्म अच्छी तरह से मिला लें और इसकी 125 मिली ग्राम की गोलियां बना लें। एक-एक गोली सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ दें।
  • एक पका केला और चार चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

सौभाग्य वटी, सिद्ध प्राणेश्वर रस, संजीवनी वटी, सितोपलादि चूर्ण, ज्वरहर लौह, पंचतिक्तादि क्वाथ आदि।

पेटेंट औषधियां

खमीरा मरवारीद खास (हमदर्द) जोकि एक यूनानी दवा है, आन्त्र ज्वर में दी जाए तो दाने शीघ्र व सुगमता से निकल आते हैं।

मियादी बुखार – कारण,लक्षण,उपाय

Leave a Comment