पान खाने के फायदे और नुकसान

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पान खाने के फायदे और नुकसान: पान मसालों गुटखों आदि के विज्ञापन आकर्षक रूप में पढ़ने, सुनने और देखने को मिलते हैं। धुंआधार प्रचार-प्रसार के कारण और सुविधाजनक पैकिंग में उपलब्ध होने के कारण आजकल लोगबाग इनका नियमित रूप से सेवन करने लगे है। अब तो धीरे-धीरे औरतें और युवतियां भी गुटखे के पाउच चोरी छिपे या खुल कर खाने लगी हैं।

पान

यों तो पान में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें प्रोटीन, चर्बी, काबोंहाइड्रेट, लोहा, चूना, केरोटिन, विटामिन्स प्रमुख हैं, लेकिन अधिक मात्रा में पान खाने से दांत शीघ्र खराब हो जाते हैं।

इसलिए सीमित मात्रा में ही खाना और दांतों व मुंह की सफाई की ओर पूरा ध्यान देकर ही इसका लाभकारी प्रभाव देखा जा सकता है। कभी-कभार खुशी के मौकों पर, अधिक स्वादिष्ट भोजन कर लेने पर औषधि रूप में विभिन्न गुणकारी मसालों से युक्त पान खाना पाचक व असरकारक होता है।

पान मसालों से लाभ

पान मसाला अनेक प्रकार की गुणकारी सामग्री से युक्त होते है जैसे सौंफ, इलायची , लौंग , नारियल छुआरा, चूना, कत्था आदि-आदि। इलायची खांसी व क़फ का शमन करती है, सुगंध देती है और मुख को स्वच्छ करती है।

सौंफ पाचक होती है। लौंग गर्म, रुचिकारक, क़फ, श्वास, खांसी व शीत में लाभकारी है। नारियल छुहारा रुचिकर, पाचक, शक्तिवर्धक है। कत्था कफ और पित्त का नाश करता है? खांसी रोकता है, जबकि चूना बादी और क़फ को नष्ट करता है।

तैयार पाउचों की बिक्री बढ़ी

जब से पान सुपारी के स्थान पर तैयार पान मसालों और गुटखों का चलन हुआ है, इनकी मांग बेतहाशा बढ़ रहीं है। वर्तमान मेँ हमारे देश में पान मसाले, ज़र्दें, गुटखे और सुपारी की रूपा बढ़ कर डेढ़ से दो हजार करोड़ रुपये के बीच हो गई है। आज हालत यह है कि शहरों से लेकर गांवों, कसबों तक में पान मसालों का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

गुटखे से नुकसान

ड्रग एब्यूज इन्फोर्मेशन रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च सेंटर, मुंबई द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार पान मसालों और गुटखों का नियमित सेवन करने वालों के शरीर में हानिकारक पदार्थों की बहुत अधिक मात्रा जमा पाई गई।

पान मसालों में मिलाए जाने वाले विभिन्न पदार्थों से देश में मुंह और गले का कैंसर में बेतहासा वृद्धि हुई है। गुटखा चाहे महंगा हो या सस्ता, सभी ब्रांड के गुटखों, पान मसालों से नुकसान ही होता है।

कैंसर

पान पान मसाले, गुटखों, तम्बाकू या सुपारी अधिक मात्रा में चबाने और अधिक समय तक मुंह में रखने से ‘सबम्यूकस फाइबरोसिस’ की बीमारी हो जाती है। यहीं आगे बढ़कर कैंसर का रूप धारण कर लेती है।

इससे मुंह, गला और नाक प्रभावित हो सकते है, क्योंकि मुंह के अंदर की त्वचा के तंतु सख्त हो जाते हैं, जिससे ऐसी स्थिति भी आ सकती है कि मुंह का खुलना बंद हो जाते है। केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम में मुंह के कैंसर के रोगियों की संख्या विश्व में सबसे अधिक पाई गई है।

दिल की बीमारी

अत्यधिक पान मसाला, गुटखे और तम्बाकू वालों को दिल को बीमारी की संभावना अधिक होती है, क्योंकि सुपारी के साथ मसाले के मिश्रण को खाकर जो असर होता है, उससे दिल को धड़कने अनियमित हो जाती हैं।

सुपारी

आयुर्वेद मतानुसार नई सुपारी हानिकारक होती है। पुरानी सुपारी भारी, कसैली, रूखी, कफ पित्तनाशक, रुचिकारी और अग्नि प्रदीप्त करने वाली होती है। चिकनी सुपारी त्रिदोषनाशक होती है। अधिक समय तक बार-बार सुपारी खाने से मुंह का स्वाद फीका हो जाता है, जीभ कठोर होकर मसूड़ों को नुकसान पहुंचता है।

तम्बाकू

कहावत है कि है अगर कभी न मांगी हो भीख, तो तम्बाकू बना सीखे, यानी तंबाकू को मांग कर बड़े शौक से खाते हैं। गुटखे या पान में सबसे हानिकारक चीज तम्बाकू ही होता है। इसे मुंह में दबाने वाले स्थान पर दाग पड़ जाते हैं तथा कैंसर भी हो जाता है। तम्बाकू में ही निकोटिन नामक हानिकारक तत्व पाया जाता है।

हमारे देश में तम्बाकू को अकेले, चूना लगाकर या पान, चूने, सुपारी के साथ मलकर खाने का प्रचलन सर्वाधिक देखा गया है। तम्बाकू सेवन करने को ज्यादा मात्रा से मुंह के कैंसर होने की आशंका 5 से 6 गुना बढ़ जाती है। भारत में प्रतिवर्ष औसतन 8 लाख लोग तम्बाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण मरते है।

टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई के डॉक्टरों द्वारा तैयार आंकड़ों के आधार पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नईं दिल्ली के डॉक्टरों को लंदन के मिडिल सेक्स अस्पताल मेडिकल कालेज के लेक्चरर डॉक्टर बॉन ने बताया कि तम्बाकू के सेवन से होने वाली अनेक बीमारियां ऐसी हैं, जिनका पता चलने पर निदान संभव है।

हर प्रकार से तम्बाकू सेवन करने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि इसमें न केवल ‘निकोटिन’ नामक विष ही होता है बल्कि कुल 33 प्रकार के विष तम्बाकू में पाए गए हैं।

निकोटिन से ह्रदय की धड़कन और रक्तचाप बढ़ जाता है, शिराओं में संकुचन होता है , भूख मिटती है, आमाशय व आंत में खून के दौरे घटते है , छोटी आंत की ग्रंथियों के स्राव कम होने जैसे अनेक हानिकारक प्रभाव शरीर पर होते हैं।

मुंह का कैंसर अकसर तम्बाकू रखने की जगह पर ही होता है। मुंह में सूजन, गांठ, उभार , लाली, बादामी, काले धब्बे या सफेद चकत्ते, घाव होना खून आना, जलन, पीड़ा का अनुभव दांतों में दर्द व उनका हिलना, बात करने, खाने-पीने, निगलने, चबाने में गले में कठिनाई होना झनझनाहट, जीभ में सूजन, मसूढ़ों में जलन, दर्द जैसे अनेक लक्षण यदि चिकित्सा कराने पर भी 10-15 दिनो में ठीक न हों, तो मुंह की पूरी जांच अपने डॉक्टर से अवश्य करा लेनी चाहिए। यदि कैंसर होना सिद्ध हो जाए, तो उसकी चिकित्सा तुरंत शुरू कराए।

आदत कैसे छोड़ें?

जहां तक हो सके, इनका सेवन कम से कम करें और धीरे-धीरे इन्हें पूरी तरह छोड़ने की कोशिश करें। आदत छोड़ने के लिए इनकी मात्रा कम करके, लंबी अवधि के अंतराल पर खाएं। फिर तलब लगने पर सौंफ, धनिया, दाल, लौंग, इलायची आदि का प्रयोग करते हुए पूरी तरह छोड़ दें।

पान खाने के फायदे और नुकसान

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