पथरी – कारण,लक्षण,उपाय

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पथरी का कारण: आहार के साथ शरीर में प्रविष्ट ऐसे द्रव्य, जो शरीर के लिए विषैले होते हैं, पेशाब के साथ मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाते हैं। शरीर में गए जलीय तत्वों के शुद्धिकरण का कार्य गुर्दों से होता है।

पाचन क्रिया में गड़बड़ी होने से, पानी कम मात्रा में पीने से तथा भोजन में क्षारीय पदार्थों की अधिकता से क्षारीय कणों का निर्माण होता है, जो आकार में बहुत ही छोटे होते हैं। ये कण जब अधिक मात्रा में बनने लगें, तो आपस में मिलकर बड़े-बड़े दानों में बदल जाते हैं, जिन्हें पथरी (अश्मरी) कहा जाता है। पथरी यदि नुकीली हो, तो गुर्दे या मूत्रनली में घाव भी हो सकता है।

पथरी का लक्षण

मूत्रनली या गुर्दे में घाव होने, घाव में संक्रमण होने या मूत्रनली में पथरी के अड़ जाने के कारण भयंकर दर्द होता है। मूत्र मार्ग का अवरोध होने के कारण पेशाब भी रुक सकता है।

पथरी का घरेलू उपाय

पथरी चूंकि भोजन में क्षारीय द्रव्यों की अधिकता के कारण होती है, अत: रोगी को आहार में क्षारीय पदार्थ लेने बंद कर देने चाहिए।

भोजन एवं परहेज

रोगी को पालक, टमाटर, बैंगन, चाय, शराब, चाकलेट, मांस, उड़द, सूखे मेवे व लेसदार पदार्थ नहीं लेने चाहिए। तरबूज व खीरा तथा इन दोनों के बीज, मूली, आंवला, जौ, मूंग की दाल, अनन्नास, बथुआ व चौलाई के साग का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए तथा पानी ज्यादा पीना चाहिए।

गन्ने का एक-एक गिलास रस दिन में दो बार पिएं।

बथुए के पत्तों का रस मिसरी मिलाकर सुबह-शाह एक-एक गिलास पिएं।

कुलथी की दाल का पानी सेंधानमक मिलाकर दिन में दो बार एक-एक गिलास पिलाएं।

आधा चम्मच हलदी को गुड़ के साथ सुबह-शाम दें।

खीरे का रस सुबह खाली पेट 100 ग्राम की मात्रा में लेते रहें, जब तक पथरी न निकल जाए।

रोगी को सुबह खाली पेट 1 गिलास सेब का रस पिलाएं।

कच्चे नारियल का पानी दिन में चार-पांच बार पिएं।

चुकंदर का रस चार चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार लें।

मूली के 50 ग्राम बीज दस गुना पानी में उबालें। पानी आधा रह जाए, तो छानकर सुबह-शाम पिएं।

चौलाई के पत्तों को कूटकर उसका रस निकाल लें। 50 ग्राम की मात्रा में यह रस सुबह-शाम पिएं।

सुबह-शाम मरीज को 1-2 सेब खिलाएं।

रोगी को दिन में तीन-चार बार अंगूर खाने को दें।

आयुर्वेदिक औषधियां

वृहत् वरुणादि क्वाथ, चंद्रप्रथा वटी, गोक्षुरादिगुग्गल, केसरयोग, तिदिक्षार आदि का प्रयोग किया जा सकता है।

पेटेंट औषधियां

डिवाइन के-क्लीन कैप (बी.एम.सी. फार्मा), नेफरॉल कैप्सूल, गोलियां, सीरप (माहेश्वरी), कैलक्यूरी गोलियां (चरक), पथरीना (वैद्यनाथ), सिस्टोन (हिमालय) का प्रयोग भी इस रोग की चिकित्सा हेतु किया जा सकता है।

पथरी – कारण,लक्षण,उपाय

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