पीलिया – कारण,लक्षण,उपाय

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पीलिया का कारण: रक्त में पित्त की मात्रा विभिन्न कारणों से बढ़ जाती है, तो रक्त को कमी उत्पन्न हो जाती है, जिससे शरीर पर पीलापन आने से इसे पीलिया कहा जाता है। अवस्थानुसार पांडु व कामला इसके दो भेद हैं। पांडु रोग की वृद्धि होने पर वही कामला का रूप ले लेता है।

किसी वायरस या जीवाणु के कारण यकृत में शोथ होने, पित्त के अवरुद्ध होने या लारजेक्टील जैसी शामक औषधियों के प्रयोग से यकृत की कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से यह रोग होता है। अनेक एलोपैथिक औषधियां यकृत की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रोग उत्पन्न कर सकती हैं।

पीलिया का लक्षण

आंखों व शरीर पर पीलापन, भूख में कमी, पेशाब में पीलापन होना, अजीर्ण, कब्ज़, प्यास व सारे शरीर में जलन। बुखार भी आ सकता है।

पीलिया का घरेलू उपाय

इसमें पानी की स्वच्छता अति आवश्यक है, अत: पानी उबाल कर ठंडा करके पिएं।

एक सप्ताह तक गोमूत्र में भिगोई हुई 1 छोटी हरड़ सुबह खाली पेट लें।

छोटी हरड़ का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में गुड़ की एक डली के साथ सुबह-शाम दें। साथ में शहद भी दे सकते हैं।

गिलोय का रस दो चम्मच की मात्रा में लेकर इसमें इतना ही शहद मिलाकर, सुबह खाली पेट दें।

त्रिफला या दारू हलदी या नीम के पत्तों का काढ़ा बनाकर, शहद मिलाकर 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट दें।

पीपल की पांच कोंपलें मिसरी या चीनी के साथ पीसकर एक गिलास पानी में घोलकर सुबह-शाम रोगी को दें।

मूली के पत्तों का दस चम्मच रस दस ग्राम मिसरी मिलाकर सुबह खाली पेट लें।

गन्ने का रस एक-एक गिलास दिन में तीन-चार बार लें। इसी रस में एक मूली का (पत्तों समेत) रस भी मिला लिया जाए तो लाभ और भी ज्यादा मिलता है।

आधा ग्राम फूली हुई फिटकिरी को 1 गिलास छाछ में मिलाकर दिन में तीन बार लें।

अंगूर, संतरा या अनार का रस पिएं।

घीया, तोरी, टिंडा, पालक, चौलाई और परवल की सब्जी लें।

धनिया, पुदीना, व टमाटर का खूब प्रयोग करें।

कच्चे आंवेले का रस 4-4 चम्मच मिसरी मिलाकर दिन में तीन बार लें।

पपीता, जामुन, सेब, लीची और आलू-बुखारा जैसे फलों का प्रयोग करें।

अनार के पत्तों का चूर्ण गाय के दूध या मट्ठे के साथ दें।

बेलगिरी के 20-30 पत्ते कूटकर चटनी बना लें, उसमें चुटकी भर काली मिर्च डालकर छाछ के साथ दिन में तीन बार लें।

पपीते के 2-3 कोमल पत्ते पीसकर पानी के साथ सुबह-शाम लें।

एक चौधाई चम्मच पिसी हुई हलदी गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार लें।

1 चम्मच मुलेठी बारीक पीसकर कासनी के बीज (10) व नमक मिला कर पानी के साथ सुबह-शाम लें।

एक पका केला और 4 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लें।

रोगी को खाली पेट पाव भर आलू बुखारे खिलाएं।

पीलिया के रोगी को सुबह खाली पेट पाव भर पके हुए जामुन खिलाएं। यदि ताजा जामुन न मिले तो जामुन का रस एक कटोरी पिएं।

शहतूत का सेवन दिन में कई बार करें या शहतूत का शरबत पिएं।

गाजर का एक-एक गिलास रस दिन में तीन बार पिलाएं।

छोटे-छोटे प्याज छीलकर रात को सिरके अथवा नीबू के रस में डाल दें। सुबह इसे निकालकर काली मिर्च डालकर खाली पेट लें।

साबुत घिया (लौकी) को हलकी आंच पर बैंगन की तरह भूनकर, भुर्ता बनाकर उसका पानी निथार लें। इस पानी में मिसरी मिलाकर सुबह-शाम 50-100 ग्राम की मात्रा में लें।

टमाटर के एक गिलास रस में नीबू का रस मिलाकर सुबह-शाम लें।

लहसुन की 2-3 कलियां बारीक-बारीक पीसकर एक कटोरी दूध के साथ सुबह-शाम पिएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

मण्डूर भस्म, कामला हर रस, आरोग्यवर्धिनी वटी, पुनर्नवामण्डूर, चिचांदि लेह आदि।

पेटेंट औषधियां

डिवाइन लिव-सी कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा), लिव-52 सीरप (हिमालय), लिवोमिन सीरप (चरक), लिवम सीरप व गोलियां (माहेश्वरी), एमलीक्योर डी.एस. सीरप व कैप्सूल (एमिल), साइटोजन गोलियां (चरक), एम्लीक्योर सीरप व गोलियां (एमिल), निरोसिल गोलियां व सीरप (सोल्यूमिक्स), सेनलिन गोलियां, सीरप व ड्राप्स (संजीवन) पीलिया में लाभदायक हैं।

पीलिया – कारण,लक्षण,उपाय

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