प्रदूषण के बारे में रोचक जानकारी

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प्रदूषण के बारे में रोचक जानकारी: जीवन वायु पर ही निर्भर करता है। किसी व्यक्ति को यदि वायु न मिले, तो जीवन समाप्त होने में देर नहीं लगती। परन्तु वर्तमान में दिन-प्रतिदिन वायु में प्रदूषण बढ़ने से श्वास के जरिए हानिकारक तत्व शरीर में चले जाते हैं, जिससे कई तरह को परेशानियों का आगमन हुआ है।

प्रदूषण के कारण

वन, लहलहाते पेड़ -पौधे और हरे -भरे बाग-बगीचे हमेँ शुद्ध वायु प्रदान करते है और कार्बन डाइऑक्साइड के ग्रहण करते है, लेकिन दिन-प्रतिदिन इनकी कटाई करने से वायु-प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

अब शुद्ध वायु आए को कहां से? दूसरी तरफ कारखानों की चिमनियों से, घरों में काम आने जाले ईंधनों से, कूड़े-कच्चे के ढेरों को जलाने से जो गैसें निकलती रहती हैं, वे वायु को लगातार प्रदूषित कर रहीं हैं।

शहरों की वायु के प्रदूषण में 60 प्रतिशत योगदान स्कूटर, मोटर साइकिल, थी व्हीलर, कार, टैक्सी, बस, ट्रक आदि चाहने का होता हैं, जो दिन-रात सड़कों पर दौड़ती-फिरती है। इन गाड़ियों से जो कार्बन डाइऑकसाइड कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ्यूरिक एसिड, हाइड्रोकार्बन्स, नाइट्रोज़न के ऑक्साइड निकलते हैं।

वे हवा में मिल जाते हैं और वातावरण को प्रदूषित कर देते हैं। वैज्ञानिकों का मत हैं कि डीजल की तुलना में पेट्रोल का धुआं अधिक खतरनाक होता हैं। यूं दोनों से कार्बन मोनोऑक्साइड गैसें निकलती हैं, जो आदमी के खून पर बहुत बुरा प्रभाव डालती हैं।

वायु प्रदूषण से हानियां

वाहनों से निकलने वाले धुएं का हाइड्रोकार्बन नाइट्रोजन आक्साइडों के साथ सूर्य की रोशनी में पेराक्सी एसीटो नाइट्राइल नामक पदार्थ का निर्माण करता है, जो सांस की बीमारी पैदा करता हैं ओर वातावरण में धुएं के घने कुहरे के रूप में दिखता है।

वायु प्रदूषण से न केवल दिल को अधिक काम कर अधिक बार धड़कना पड़ता है, बल्कि उसकी बीमारियों में भी वृद्धि हुई है। फेफड़ों का कैंसर, दमा, खांसी, जुकाम, मानसिक बीमारियां, आनुवंशिक बीमारियां, गले की बीमारियां, आंखों में जलन, सिर दर्द, त्वचा के रोग, श्वास नली शोथ, सीसे को विषाक्तता से खून का दूषित होना जैसी तकलीफें भी वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव से हो सकती हैं।

देश के विभिन्न भागों में वातावरण में मौजूद प्रदूषण का सबसे अधिक शिकार बच्चे बनते हैं। एक बच्चा प्रतिदिन उतने धुएं के ग्रहण करता है, जितना कि 20 सिगरेटों से उत्पन्न होता हैं।

पूजा घर में जलाई जाने वाली अगरबत्ती में गंधक और पोटैशियम नाइट्रेट मिलाया जाता है, जिससे हमारा स्नायुतंत्र प्रभावित होता है। कुछ के निर्माण में बेंजोपाइरिन और फीनाड्स पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं।

एल पी जी एवं सी एन जी से चलने वाली कारें, बसें डीजल से चलने वाली बसों और कारों की तुलना में कहीं ज्यादा नुकसानदेह हैं।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के मतानुसार गैसों से चलने वाले वाहन धुएं की जगह काफी मात्रा में महीन कण छोड़ते हैं। ये कण अस्ट्राफाइन पार्टिकल्स के नाम से जाने जाते हैं। इन कणों से फेफड़ें का कैंसर, हार्ट अटैक, सांसों के कई रोग हो जाते हैं। कण काफी महीन होने से ये फेफड़ों में अधिक गहराई तक चले जाते हैं।

प्रदूषण से बचाव के उपाय

औद्योगीकरण से जहां हमने अपने लिए अनेक सुख-सुविधाएं और समृद्धि के साधन जुटा लिए हैं, वहीं औद्योगिक संस्कृति के कारण शहरों में गैसीय असंतुलन दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। बहुत से खतरे तो ऐसे हैं, जिनसे चाह कर भी बच नहीं सकते, लेकिन कुछ खतरों पर नियन्त्रण अवश्य कर सकते हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • हवन द्वारा भी वायु शुद्ध की जा सकती है। इसके लिए अग्नि में धूप, चंदन, राल, अगर, नीम, गंधक, तेजपाल, राई, कपूर, देवदारु, गुग्गुल, घी आदि डालकर विशेष अवसरों यर तथा समम-समय पर घर या मंदिरों में हवन करते रहना चाहिए। इससे आसपास के वातावरण में वायु शुद्ध होगी।
  • पेड़-पौधे अपनी आक्सीजन से पर्यावरण को स्वच्छ रखने मेँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अत: शहरों में बाग-बगीचों की संख्या बढ़ा कर, सड़कों के किनारे वृक्ष लगाकर, घर-घर हरियाली करके इस वायु प्रदूषण की समस्या का बहुत कुछ हल निकाला जा सकता है।
  • उपरोक्त उपायों के अलावा उद्योगों को शहर से दूर लगा कर, वाहनो के रखरखाव पर अधिक ध्यान देकर, हाइड्रोकार्बन मोनो को अहानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड मेँ आक्सीकृत कर, नाइट्रोजन आक्साइड को नाइट्रोजन में बदल कर और बढ़ती हुई जनसंख्या पर रोक लगा कर वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।

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