रक्त प्रदर – कारण,लक्षण,उपाय

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रक्त प्रदर का कारण: हारमोन का असंतुलन, श्रोणि प्रदेश में संक्रमण, चिंता, शोक, भय आदि कारणों से रक्त प्रदर की शिकायत होती है।

रक्त प्रदर का लक्षण

मासिक धर्म के समय रक्त अधिक मात्रा में आना, चार दिन (समान्य) से अधिक दिन तक चलना रक्त प्रदर कहलाता है। मासिक स्त्राव अपने नियत समय (सामान्यतया 20 दिन से 30 दिन) से काफी पहले आ जाना भी रक्त प्रदर की श्रेणी में गिना जाता है।

रक्त प्रदर का घरेलू उपाय

20 ग्राम राल सफेद व 30 ग्राम असगन्ध नागोरी को कूट-पीसकर चूर्ण कर लें। इसमें इनके वजन के बराबर मिस्री कूटकर मिला लें। 2-2 चम्मच दवा सुबह-शाम पानी के साथ दें। इससे रक्तस्त्राव तुरंत ही नियंत्रित हो जाएगा।

5-5 गुलाब के ताजा फूल सुबह-शाम आधा चम्मच मिस्री के साथ खिलाकर ऊपर से गाय का दूध पिलाएं। यह दवा लगभग 1 माह तक खिलाएं।

पके हुए गूलर के फलों को सुखाकर कूटकर चूर्ण बना लें। इसमें समभाग मिस्री मिलाकर रख लें। सुबह-शाम 2-2 चम्मच दवा दूध के साथ दें।

एक भाग सोना गेरू व तीन भाग मुलेठी को कूट-पीसकर रख लें। 1-1 चम्मच पूर्ण दिन में तीन बार चावल के धोवन के साथ दें। इस दवा को एक सप्ताह तक प्रयोग कराएं।

माजूफल, गेरू व पठानी लोध बराबर मात्रा में कूट-पीसकर छान लें। आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ दो सप्ताह खिलाएं।

अनार के सूखे छिलके कूटकर चूर्ण बनाएं और एक-एक चम्मच दवा पानी के साथ सुबह व शाम को दें।

आयुर्वेदिक औषधियां

पुष्यानुग चूर्ण, धात्री लौह।

पेटेंट औषधियां

एमीकोर्डियल सीरप व गोलियां (एमिल), पोसैक्स फोर्ट कैप्सूल (चरक), ल्यूकैम गोलियां व सीरप (माहेश्वरी)।

रक्त प्रदर – कारण,लक्षण,उपाय

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