रोने के फायदे और नुकसान

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रोने के फायदे और नुकसान: रोना एक स्वाभाविक क्रिया है, अत: इस संसार में कोई भी व्यक्ति इस बात का दावा नहीं कर सकता कि उसने कभी रोया ही नहीं। रोना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक होता है।

रोने के हानिकारक प्रभाव

जो बच्चे जन्म लेते ही नहीं रोते उनके जीवित बचने की संभावना कम होती है और जो बच भी जाते हैं, तो उनका शारीरिक विकास ठीक प्रकार से नहीं होता और वे जीवन भर किसी न किसी रोग से ज़कड़े रहते है। जिन बच्चों के आंसू नहीं निकलते, उनका दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता।

उनमें आक्रामक प्रवृति अधिक होने के कारण ये बड़े होकर अपराधी बल सकते है। वैज्ञानिको का मानना है कि जो पुरुष कभी नहीं रोते, वे साधारण प्रकार के व्यक्ति नहीं होते और उनकी यह प्रवृति मानसिक विकृति के कारण होती है।

अकसर देखने में आया है कि जो व्यक्ति होश संभालने के बाद कभी नहीं रोते, वे सांस की तकलीफ, दमा के या फिर बदन पर फोड़े-फुंसी का शिकार हो जाते हैं। इनके अलावा भगंदर, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां होने की संभावना होती है। जो व्यक्ति मानसिक आघातों को चुपचाप सहन कर लेते है, वे पागल भी हो सकते है।

कभी-कभी आंसू रोक लेने से अनेक बीमारियां जैसे-जुकाम, नजला, आँख की अनेक बीमारियां, ह्रदय में पीड़ा, सिर दर्द, चक्कर आना, गरदन का अकड़ना, भोजन करने की इच्छा न होना आदि अनेक प्रकार की तकलीफें हो सकती हैं।

महिलाए और बच्चे जब रो रहे हो, तब उन्हें डरा- धमका कर उनका रोना बन्द न करें, क्योंकि ऐसा करने से वायु जो रोने से बढ़ गई थी, शरीर के किसी स्थान में एकत्र होकर रुक जाती है और पेट में दर्द होना, वायु का गोला उठना, आंखों के आगे अंधेरा छाना, चलकर आना सीने में दर्द की तीव्र अनुभूति आदि अनेक रोग हो सकते है।

अधिक रोने से हानियां

महिलाएं पुरुषों की तुलना में 5 गुना अधिक रोती हैं। इनका अधिकांश रुदन शाम 7 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच होता हैं और सामान्यता इसकी अवधि लगभग 6 मिनट की होती हैं।

बात-बात पर आंसू बहाने से अश्रु-ग्रंथियों को अधिक कार्य करना पड़ता है। जिससे ये ग्रंथियों इतनी कमजोर पड़ जाती हैं कि फिर जरा-जरा सी बात पर आंसू निकलने लगते है और इसकी बजह से आंखों को हानि पहुंचती है। आंखें लाल होकर सूज भी जाती है।

ज्यादा रोने वालों को खाना खाने को इच्छा न होना, मन का दु:खी रहना, उठने-बैठने में भी दर्द का अनुभव करना, खांसी, दमा, दस्त, आवाज बैठना, हिचकी, उलटी होना, गला भारी होना, बेहोशी जैसी अनेक प्रकार की तकलीफें हो सकती है।

रोने के लाभदायक प्रभाव

मनोचिकित्सकों का कहना है कि कभी-कभार पुरुषों का रो लेना किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि आंसू बहा लेने से व्यक्ति तनाव रहित और हलका-फुलका महसूस करता है।

आंसू दुख, चिंता, क्लेश तथा मानसिक आघातों से मुक्ति दिलाने तथा मन हलका कर आकस्मिक मनोव्यथाओं को सहने में सहायता पहुंचाते हैं। आंखों से आंसू उसमें पड़े विजातीय द्रव्यों की बाहर निकालने और आंखों को नम रखने उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए भी निकल पड़ते हैं।

डाक्टरों का कहना है कि जी भर कर रो लेने से मानसिक तनाव से तो मुक्ति मिलती ही है-साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, भगंदर आदि रोगी से भी छुटकारा मिलने में सहायता मिलती हैं। ह्रदय रोग भी कम ही होता हैं। तनाव से उत्पन्न होने वाली बीमारियां जैसे अल्सर और बड़ी आंत की सूजन की शिकायत नहीं रहती।

अमेरिका के वैज्ञानिको ने यह सिद्ध कर दिया है कि रोने से आंखों की खूबसूरती बढ़ती है। इनके मतानुसार आंखों के कार्निया की परत कंजक्टाइवा को लेक्रीमल ग्रंथि द्वारा आंसुओं से नम कर देने के कारण, आंसुओ में मिले क्षारीय तत्वों द्वारा सुंदरता निखर जाती है।

आंसुओं के निकलने पर कार्निया ग्रन्थि से एक तैलीय द्रव निकलता है, जिसकी मदद से कार्निया नम और गहरा बन जाता है। स्त्री में सीरम प्रोलेक्टिन स्तर पुरुषों की अपेक्षा 60 प्रतिशत अधिक होने के कारण वह पुरुष की तुलना में अधिक आंसुओं का उत्पादन करती है। यही वजह है की उनकी आंखें अधिक खूबसूरत होती हैं।

रोने के फायदे और नुकसान

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