साइटिका (गृध्रसी) – कारण,लक्षण,उपाय

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साइटिका: शरीर में एक नस होती है जो रीड की हड्डी से पैर की तरफ जाती है जिसको साइटिक नस कहते है और इसी नस में होने वाले दर्द को साइटिका कहते है।

साइटिका का कारण

रीढ़ की हड्डी कशेरुकाओं से बनी होती है, जिनके बीच चक्रिकाएं (डिस्क) होती हैं। भारी दबाव पड़ने या झटका लगने से कोई डिस्क अपने स्थान से खिसक जाए या फट कर उसके अंदर का द्रव पदार्थ निकल जाए, तो पैर में जा रही नाड़ी दब जाती है, जिससे पैर में दर्द की अनुभूति होती है।

मधुमेह, रीढ़ की हड्डी में सूजन या वृद्धि या श्रोणिगत कैंसर के कारण भी दर्द हो सकता है।

साइटिका का लक्षण

इस रोग में पैर में कूल्हे से नीचे की ओर तेज दर्द होता है। शुरू में कूल्हें से जांघ, फिर घुटने व बाद में पिंडलियों तक दर्द पहुंच जाता है। कभी दर्द बढ़कर एड़ी तक पहुंच जाता है।

साइटिका का घरेलू उपाय

रोगी को 2-3 सप्ताह बिस्तर पर पूर्ण विश्राम करना चाहिए, जिससे डिस्क के फटने या नाड़ी में सूजन के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके।

बकायन वृक्ष की छाल को धूप में सुखाकर कूट लें व छान लें। इसमें बराबर मात्रा में पुराना गुड़ मिलाकर मटर के दाने के बराबर की गोलियां बना लें। एक-एक गोली सुबह व शाम के समय पानी के साथ दें।

कुचला का घी में भूनकर बारीक पीस लें। 125 मि.ग्रा. की मात्रा में सूबह-शाम खाएं।

एक भाग भुनी हुई सफेद फिटकिरी, दो भाग कीकर का गोंद व तीन भाग मीठी सुरंजान लेकर बारीक पीस लें। इसे आधा-आधा ग्राम दिन में तीन बार दें।

मीठा तेलिया दो भाग, फूला हुआ सुहागा चार भाग व काली मिर्च पांच भाग लेकर पीस लें। इसे अदरक के रस में एक सप्ताह तक घोटें और मटर के दाने के बराबर की गोलियां बना लें। एक-एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ रोगी को दें।

एरंड गृध्रसी में अत्यंत प्रभावकारी है। एरंड का 30 ग्राम तेल तीन गुना गोमूत्र में मिलाकर रात को पिएं या एरंड के बीज की गिरी को दूध में खीर बनाकर सुबह-शाम लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

शिवागुग्गुल, पथ्यादिगुग्गुल, लशुनपाक, लशुनाष्टक, शुंठी आदि पायस, महानिम्ब क्वाथ लाभदायक होता है। स्थानीय प्रयोग हेतु सैंधवादि तेल व महामाष तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

साइटिका (गृध्रसी) – कारण,लक्षण,उपाय

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