शीतपित्त – कारण,लक्षण,उपाय

Spread the love

शीतपित्त: त्वचा में उभरे हुए, स्पष्ट किनारों वाले, खुजलीयुक्त लाल रंग के चकत्तों को शीतपित्त कहा जाता है। ये चकत्ते अस्थायी होते हैं। वातावरण में उपस्थित किसी भी तत्व भोजन, दवा, वस्त्र द्वारा शरीर में पैदा हुई आसात्म्यता (एलर्जी) के कारण ऐसे चकत्ते शरीर में होते हैं।

शीतपित्त के कारण

पेट में कीड़े होने पर भी ऐसे चकत्ते हो जाते हैं। जीवाणु संक्रमण के अतिरिक्त भावनात्मक उद्वेग के कारण भी यह संभव है। शीतल जल या वायु के संपर्क में आने से भी लक्षण प्रकट हो सकते हैं।

शीतपित्त के लक्षण

त्वचा में स्पष्ट किनारों वाले, खुजली युक्त उठे हुए उभार हो जाते हैं। गले या जीभ में सूजन भी हो सकती है। कभी-कभी सांस लेने में कठिनाई, सिर दर्द, पेट दर्द के लक्षण भी मिल सकते हैं।

शीतपित्त के घरेलू उपाय

यदि पेट में कीड़ों के कारण शीतपित्त के लक्षण प्रकट हुए हों, तो कीड़ों की चिकित्सा करें।

नीम के पानी में नमक मिलाकर रोगी को पिलाएं व उलटी करा दें।

2 ग्राम अजवायन को दोगुने गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम लें।

1 ग्राम नीम के पत्तों का चूर्ण घी में मिलाकर चटाएं।

सोंठ, पिप्पली, काली मिर्च व अजवायन सभी समान भाग लेकर कूट-पीस लें। आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम लें।

2 चम्मच अदरक का रस 15-20 ग्राम गुड़ के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

1-2 ग्राम गेरू 1 चम्मच शहद या घी में मिलाकर सेवन करें।

आयुर्वेदिक औषधियां

हरिद्राखण्ड, अमृतादिक्वाथ, सूतशेखर रस, त्रिकटु चूर्ण व अरटीप्लेक्स गोलियां (चरक) लाभदायक होती हैं।

शीतपित्त – कारण,लक्षण,उपाय

Leave a Comment