स्कर्वी – कारण,लक्षण,उपाय

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स्कर्वी: विटामिन C इंसानी शरीर के लिए बहुत जरुरी है। क्युकी ये नर्व सिस्टम की प्रक्रिया को बनाये रखता है। इसकी कमी से नर्व सिस्टम बिगड़ जाता है। जिससे शरीर पर लाल चकते बनते है और स्किन खुर्दरी हो जाती है इसी को स्कर्वी रोग कहते है।

स्कर्वी के कारण

यह रोग विटामिन ‘सी’ की कमी के कारण होता है। यह रोग किसी भी अवस्था में हो सकता है।

शरीर की कोशिकाओं को परस्पर जोड़ने वाले स्नायु तंतुओं के निर्माण की प्रक्रिया हेतु विटामिन सी की उपस्थिति आवश्यक है। हडि्डयों व दांतों के निर्माण हेतु भी इस विटामिन की आवश्यकता होती है।

यह हमारे शरीर में कुल मिलाकर पांच ग्राम की मात्रा में होता है तथा अधिक होने पर पेशाब के साथ निकलने लगता है। बच्चों को इसकी 25 मि.ली. मात्रा, वयस्क को 70-75 मि.ली. तथा गर्भिणी व प्रसूता को 100-150 मि.ली. मात्रा प्रतिदिन आवश्यक होती है। बच्चों में मां का दूध नहीं मिलने से तथा वयस्कों व तरुणों में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में भोजन के द्वारा न मिलने से इस रोग की उत्पत्ति होती है।

स्कर्वी के लक्षण

6 से 18 महीने के बीच की आयु के शिशुओं में विटामिन सी की कमी के कारण जांघ की हडि्डयों के ऊपर व उनके आवरण के नीचे रक्तस्राव हो जाने के कारण शिशु को दर्द रहता है और टांगों को छूने से ही बच्चा चीखने लगता है। बालक दूध कम पीता है तथा बिना हिले-डुले पड़ा रहता है। बच्चे को हलका-सा बुखार भी रहता है।

तरुण या वयस्क व्यक्ति में शरीर कमजोर, पीता, दुबला व शक्तिहीन हो जाता है और थोड़ी-सी मेहनत करने पर सांस फूलने लगती है। भूख खत्म हो जाती है, मन उदास रहता है और शरीर निष्क्रिय।

टांगों की त्वचा पर बालों की जड़ों के आस-पास की खून की पतली शिराओं में से हलका-हलका रक्तस्राव होने से बालों के चारों ओर के नीचे छोटे-छोटे लाल रंग के चकत्ते निकलने लगते हैं।

बाद में धड़ की त्वचा पर बड़े-बड़े चकत्ते निकल आते हैं। त्वचा खुश्क खुर्दरी तथा मोटी हो जाती है। मसूढ़ों में सूजन व उनसे रक्तस्राव हो सकता है।

रोग के बढ़ने पर टांगों की मांसपेशियों में रक्तस्राव होने से टांगों में दर्द होता है व उनमें गांठे बन जाती हैं, जिन्हें छूने पर तेज दर्द होता है। हृदय की मांसपेशियों में रक्तस्राव होने के कारण हृदय शूल का रोग भी हो सकता है। नाक से भी खून आ सकता है।

स्कर्वी का घरेलू उपाय

कच्चा आम इस रोग में बहुत लाभकारी है। रोगी को कच्चा आम खाने को दें या इसका पन्ना बनाकर दें। आम का मौसम न हो, तो अमचूर का सेवन कराएं।

संतरे के रस में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है, अत: रोगी को दिन में कई बार संतरा खिलाएं या संतरे का रस पीने को दें।

चौलाई का साग खाने को दें।

इस रोग में आलू का प्रयोग काफी प्रभावी है। आलू की सब्जी, आलू का हलवा, आलू के परांठे, आलू का रायता और अन्य जिस रूप में संभव हो, आलू का प्रयोग कराएं।

नीबू संतरा, टमाटर, स्ट्राबेरी, हरी सब्जियों, अंकुरित अनाजों, दालों, प्याज आदि में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है, अत: इनका प्रयोग भोजन में प्रचुर मात्रा में करें।

आयुर्वेदिक औषधियां

कुमारकल्याण रस, लाल तेल, रस पीपरी, आमलकी रसायन, आमलकी फल क्वाथ आदि।

स्कर्वी – कारण,लक्षण,उपाय

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