चमड़ी का रोग – कारण,लक्षण,उपाय

Spread the love

चमड़ी का रोग का कारण: भावनात्मक उद्दीपन के साथ शरीर में रक्त की अशुद्धि होने से यह रोग होता है।

चमड़ी का रोग के लक्षण

बाहरी वस्तुओं के संपर्क में अधिक आने वाले कोहनी, घुटने, कमर व पीठ आदि अंगों पर स्पष्ट किनारों वाला, ऊपर उठे हुए छोटे-छोटे दानें निकलते हैं, जिन पर सफेद रंग का छिलका होता है।

ये सूखे-से एवं लाल रंग के होते हैं। आकार में धीरे-धीरे बढ़ते हुए इसका व्यास लगभग 3 से. मी. तक हो जाता है। आकार में बढ़ते जाने से आसपास के दानें मिलकर जाल की तरह दिखते हैं। ये प्राय: शरीर में दोनों ओर आमने-सामने निकलते हैं। आकार में गोल होने के कारण ही आयुर्वेद में इस रोग को मंडल के नाम से कहा गया है। जहां-जहां चकत्ते बनते हैं, वहां बाल नहीं रहते।

चमड़ी का रोग के घरेलू उपाय

1-1 चम्मच कुटे हुए कुटकी व चिरायता लेकर चीनी मिट्टी या कांच के बरतन में एक कटोरी पानी में रात को भिगो दें। सुबह पानी निथार कर व छानकर पी लें। पुन: उस पात्र में अगले दिन के लिए पानी डाल दें। एक बार का डाला चिरायता व कुटकी चार दिन तक प्रयोग में लाएं व चार दिन के बाद उसे फेंक दें। इस प्रकार हर चार दिन बाद दवा बदलते रहें। लगभग दो माह के प्रयोग से रोग ठीक हो जाएगा।

गोपाल कर्कटी के फल को पीसकर उसका रस लगाएं।

बादाम को पीसकर थोड़े-से पानी में इतना उबालें कि वह चटनी की तरह गाढ़ा हो जाए। इसे रात को सोते समय लगाएं व सुबह उठकर धो लें।

नीबू का रस लगाएं।

एक चम्मच चंदन का चूर्ण एक गिलास पानी में उबालें। एक तिहाई रह जाने पर इसे उतार लें व ठंडा होने के बाद एक चम्मच गुलाब जल मिलाकर पिएं। ऐसी एक मात्रा दिन में तीन बार सेवन करें।

करेला, सहिजन, नीम के फूल आदि स्वाद में कड़वे आहार द्रव्यों का प्रयोग करें। नमक, दही, मिर्च-मसालों का परहेज करें।

आयुर्वेदिक औषधियां

कुष्ठराक्षस तेल, गुग्गुल तिक्कतक घृत, चित्रक गुटी, राजराजेश्वर रस, चित्रकादि लेप, गण्डौरादि लेप का प्रयोग इस रोग में सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

चमड़ी का रोग – कारण,लक्षण,उपाय

Leave a Comment