स्नान करने के फायदे

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स्नान करने के फायदे: हमारे यहां बिना स्नान किए कोई भी धार्मिक कार्यं करना, खाना बनाना और उसे खाना अशुभ व अहितकर माना जाता है। इन सब मान्यताओं के पीछे यही धारणा है कि हम अपनी शारीरिक सफाई, स्वच्छता की ओर पूरा ध्यान दें और निरोगी रहें।

स्नान से लाभ

स्नान करने से न केवल बाहरी त्वचा व अंगो की सफाई होती है, वरन् मांसपेशियों की शिथिलता दूर होती है और सारे शरीर में स्फूर्ति आती है। रोम कूप खुल जाते हैं और सारा मैल साफ़ हो जाता है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है और पेट सबंधी शिकायतें दूर होती हैं।

महर्षि याज्ञवल्क्य का कहना था कि नियमित रूप से स्नान करने वाले व्यक्ति को रूप, शारीरिक कांति, तेज प्रभाव, बल, पवित्रता, पूरी आयु, निरोगता, मानसिक स्थिरता, दुस्वप्न न आना, यश, कीर्ति और सूक्ष्म बुद्धि जैसे गुण प्राप्त होते है।

नींद अच्छी आती है

वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि नहाने से नींद अच्छी आती है, क्योंकि ठंडे पानी से स्नान करने अथवा स्नान करके ठंडी हवा में सोने से नींद भरपूर आती है। इससे शरीर में जो शीतलता और नमी होती है, वह मन-मस्तिष्क को विश्राम देती है।

ठंडे पानी से स्नान करना लाभदायक

ठंडे पानी से स्नान करने में शरीर की गर्मी बहार से ठंडक पाकर अंदर तेज हो जाती है, फलत: कफ को सोख लेती है और कफ से उत्पन्न होने वाले रोगों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अतिरिक्त सिर पर डाला गया पानी नेत्रों को भी लाभ पहुंचाता है। वहीं अधिक गर्म पानी से स्नान करने से नेत्रों को हानि पहुंचती है एवं बाल गिरने झड़ने आदि की समस्याएं उत्पन्न हो सकती है।

स्नान न करने से हानियां

नियमित स्नान नहीं करने से व्यक्ति का हुलिया बिगड़ा हुआ नज़र आता हैं। बाल बिखरे, उलझे, गंदे रहते हैं। आंखें मटके से भरी हुई होती है। नाखून मैल से भरे होते हैं। शरीर मेँ जहां-तहां मैल की तहें जमी हुई नज़र आती हैं शरीर बदबू से भरा होता है।

ऐसे व्यक्ति को देखकर हर व्यक्ति का मन अरुचि से भर जाता है। त्वचा की अनेक बीमारियां ऐसे व्यक्ति की अपनी गिरफ्त मेँ लिए रहती हैं। इसके अलावा भूख कम लगना, चर्म रोग होना, शरीर से दुर्गंध आना, तन्द्रा, आलस्य, जम्हाई, शरीर का तेज नष्ट, बल व स्फूर्ति का अभाव जैसे दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

त्वचा के रोग

हमारी त्वचा विशेष प्रकार की बनी हुई है, जिसमें रोम-कूप व ग्रंथियां लाखों की संख्या में मौजूद होती हैं। इनके दो ही कार्य होते है-एक तो शरीर की गंदगी बाहर निकालना और दूसरा, त्वचा को सूखने तथा झुर्री पड़ने से बचाना। जब ये निरंतर कार्य करती है, तो त्वचा पर मैल जमा हो जाती है।

यों तो इन ग्रंथियों में से निकला हुआ पसीना त्वचा को ठंडा रखता है और तेल उसकी हानिकारक तत्वों से रक्षा करता है। फिर भी इन यर वातावरण की धूल जमा होकर त्वचा के छिद्र बंद हो जाते है। ऐसी अवस्था में यदि नहाया न जाए, तो सारे शरीर में खाज, खुजली, एक्जिमा, फोड़े-फुंसियों की तकलीफें बढ़ने लगती हैं। व्यक्ति इन त्वचा की बीमारियों से स्वयं तो परेशान रहता ही है, संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को भी संक्रमण लगने का पूरा अंदेशा रहता है।

इस प्रकार से उपर्युक्त दुष्परिणामों एवं रोगों से बचने के लिए स्नान करना अत्यंत आवश्यक होता है।

स्नान करने के फायदे

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