श्वेत प्रदर – कारण,लक्षण,उपाय

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श्वेत प्रदर का कारण: स्त्रियों की योनि से सफेद रंग का स्त्राव निकलना श्वेत प्रदर कहलाता है। योनि को नम रखने व संक्रमण से बचाने हेतु होने वाले स्वाभाविक स्त्राव से यह भिन्न होता है।

यौनांगों की सफाई न रखने, किसी संक्रमित पुरुष से यौन संबंध बनाने के कारण तथा हस्तमैथुन के कारण होने वाले संक्रमण से यह रोग हो जाता है। सिंथेटिक धागों से बने अंत: वस्त्र भी इस रोग की उत्पत्ति में सहायक हैं।

श्वेत प्रदर का लक्षण

योनि से सफेद रंग का स्त्राव निकलना प्रदर रोग का मुख्य लक्षण है। यह स्त्राव दुर्गंधित भी हो सकता है और इससे योनि मार्ग में खुजली भी उत्पन्न हो सकती है।

श्वेत प्रदर का घरेलू उपाय

भुने हुए चनों का छिलका उतार कर केवल चनों का चूर्ण बना लें और उसमें सम भाग मिसरी मिला लें। यह चूर्ण एक-एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम ठंडे पानी से दें।

माजूफल 1 भाग, बड़ी इलायची 1 भाग व मिस्री दो भाग। इनका चूर्ण बना लें। इसकी 2-2 ग्राम दवा सुबह-शाम पानी के साथ दें।

किशमिश 10 ग्राम व भुने हुए चने की दाल 10 ग्राम मिलाकर सुबह-शाम लें।

एक-एक पका हुआ केला सुबह-शाम घी के साथ लें।

पिसा हुआ माजूफल 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम लें।

एक साबुत गोला (नारियल) लेकर उसके ऊपर की ओर से एक छोटा सा टुकड़ा काट दें, फिर उसमें पिसा हुआ कमरकस भर दें। काटा हुआ टुकड़ा वापस उसके स्थान पर रख कर पूरे गोले पर गुंधे हुए आटे का मोटा लेप कर दें। इसे उपलों की हलकी आंच में रख दें। जब आटा पककर लाल हो जाए, तो इसे निकाल लें।

आटे को हटाकर, गोले के भार के बराबर मिसरी मिलाकर कूट लें। एक से दो चम्मच तक सुबह-शाम गाय के दूध से खिलाएं। यह चूर्ण प्रदर के साथ-साथ शारीरिक कमजोरी को भी खत्म करता है।

गूलर का पका हुआ फल साबुत खाकर पानी पिएं।

अनार के पत्ते 20 ग्राम व सौंफ एक ग्राम में 5 काली मिर्च पानी के साथ पीसकर छानें और सुबह-सुबह पिएं।

1 चम्मच नीम का तेल एक कटोरी मिसरी मिले गाय के दूध से सुबह के समय रोगी को पिलाएं।

चौलाई की जड़ का चूर्ण आधा से एक चम्मच की मात्रा में चावलों के धोवन में या शहद में मिलाकर सुबह-शाम दें।

रोगी को दिन में चार-पांच बार सौ-सौ ग्राम अंगूर खिलाएं।

आधा चम्मच आंवले का चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम रोगी को दें।

चौलाई की जड़ का छिलका एक पाव पानी के साथ रगड़ें व इसे सुबह-शाम रोगी को दें। यदि जड़ न मिले, तो पत्तियां व टहनियां ही प्रयोग में लाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

गोदन्ती भस्म, शिलाजीत्वादि लौह, सुपारी पाक, नागकेसर चूर्ण, आंवला चूर्ण, मोचरस चूर्ण, माजूफल चूर्ण, आशोकारिष्ट, प्रदरारि लौह, पुष्यानुग चूर्ण, प्रदरान्तक लौह आदि।

पेटेंट औषधियां

एन. एस ल्यू. गोलियां (एमिल), फैमीप्लेक्स गोलियां (चरक), ल्यूमिटॉल गोलियां (सोल्यूमिक्स) व ल्यूकोल गोलियां (हिमालय), ल्यूकैम सीरप व गोलियां (माहेश्वरी)।

श्वेत प्रदर – कारण,लक्षण,उपाय

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