तपेदिक (क्षयरोग-टी.वी.) – कारण,लक्षण,उपाय

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तपेदिक का कारण: यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के संक्रमण से होने वाला रोग है। यह शरीर के किसी भी अवयव फेफड़ों, हड्डी, आंत या मस्तिष्क में हो सकता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों में संक्रमण उत्पन्न करता है, क्योंकि संक्रमित व्यक्ति के थूक द्वारा स्वस्थ व्यक्ति में भी आसानी से प्रवेश कर जाता है।

भोजन में पौष्टिक आहार की कमी, अधिक मेहनत करने से आई कमजोरी, शुद्ध वायु व प्रकाश की कमी तथा प्रदूषण के कारण रोग प्रतिरोधक शक्ति में कमी होने से संक्रमण होता है। छोटे बच्चों में खसरा व काली खांसी के कारण विभिन्न ग्रंथियों में हुए शोथ के कारण भी इस रोग के होने की संभावना हो सकती है।

मधुमेह के रोगी में दुर्बलता आ जाने के कारण भी इस रोग के जीवाणु के प्रति शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है। क्षय रोगी के संपर्क में प्रत्यक्षत: रहने वालों को यह रोग होने की संभावना अधिक रहती है। कमजोर स्त्री द्वारा बार-बार गर्भ धारण करने से भी यह रोग हो सकता है। रोग ठीक होने के बाद भी स्त्रियों में गर्भकाल के समय यह रोग पुन: प्रकट हो सकता है।

तपेदिक का लक्षण

लगातार बुखार रहना, शरीर में कमजोरी आना, वजन में लगातार कमी आते जाना इस रोग के मुख्य लक्षण हैं। यदि फेफड़ों में संक्रमण हो, तो लगातार खांसी के साथ बलगम भी आता है। खांसी के साथ खून भी आ सकता है।

तपेदिक का घरेलू उपाय

बराबर भाग में लिए गए खजूर और मुनक्कों के 20 ग्राम कल्क में 1 ग्राम पीपल का चूर्ण मिलाकर एक चम्मच मिस्त्री व एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार दें।

धनिया, पिप्पली, सोंठ और अनार के बीजों की समान मात्रा लेकर बनाया गया काढ़ा 15 से 30 मि.ली. की मात्रा में दिन में 2 बार दें।

लहसुन की 1-2 कली सुबह-शाम ताजे पानी से लें। लहसुन में विद्यमान अलील सल्फाइड क्षय रोग के जीवाणुओं की वृद्धि रोकने में पूर्णत: सक्षम है या लहसुन की दो कली छील व पीसकर पाव भर दूध में उबालें। गाढ़ा होने पर पिएं। इसे दिन से 2 बार लें।

पेठे का स्वरस 20 मि.ली. एक चम्मच शहर में मिलाकर दिन में तीन-चार बार दें। पेठे के स्वरस के स्थान पर पेठे की मिठाई 100 से 150 ग्राम ले सकते हैं।

बासा (अडूसा) का स्वरस 20 मि.ली. की मात्रा में एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार दें।

छोटी इलायची, तेजपात, नागकेसर और लौंग 1-1 भाग, मुनक्का, मुलेठी, मिस्त्री और छोटी पीपल 4-4 भाग लेकर कूट व छानकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधा चम्मच सुबह-शाम शहद के साथ रोगी को दें।

एक भाग पिप्पली चूर्ण लें। 4 भाग मिस्त्री और 16 भाग वासा (अडूसा) के स्वरस को मंद आंच पर पकाएं। गाढ़ा होने पर पिप्पली चूर्ण इसमें मिला लें। फिर इसमें दो भाग गाय का घी मिलाकर बार-बार चलाएं। ठंडा होने पर इसमें चार भाग शहद मिलाएं। एक से दो चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम रोगी को चटाएं।

पांच-सात पीस खजूर लेकर 250 ग्राम दूध में धीमी आंच पर औटाएं। आधा घंटे बाद इसे उतार लें। पहले खजूर चबा-चबाकर खाएं, ऊपर से दूध पी लें।

बेलगिरी के पके फल का शरबत पिएं।

एक पका केला लेकर आधा कप दही में अच्छी तरह मिला लें। एक चम्मच शहद और एक कप नारियल का पानी मिलाकर सुबह-शाम लें।

दिन में तीन-चार बार रोगी को अंगूर का रस पिलाएं।

चार-चार अंजीर गाय के दूध में उबालकर रोगी को पहले अंजीर खिलाएं, बाद में दूध पिलाएं।

दो-दो केले दिन में तीन-चार बार खाने को दें।

केले के पत्तों का चार चम्मच रस, दो चम्मच शहद मिलाकर रोगी को दिन में तीन-चार बार दें।

मुनक्का, पिप्पल और मिस्री बराबर मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। एक-एक चम्मच दिन में तीन बार शहद के साथ लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

माणिक्य रस, भृंगराजासव, श्रृंग्यर्जुनाद्य चूर्ण, कर्पूराद्यचूर्ण, जीवन्त्यादि घृत, पाराशर घृत, कुंकुमाद्य घृत, द्राक्षावलेह, चन्दनादि तेल, चातुर्भद्रावलेह), अष्टांगावलेह, वासावलेह, अगस्त्य हरीतकी, सूतशेखर रस, शुण्ठ्यादि चूर्ण, जयमंगल रस, सितपूर्णेन्दु रस, वसन्तमालती रस, मुस्ताद्यवलेह, यन्मान्तक लौह, क्षयकेसरी रस, पिप्पल्यासव, कुमुदेश्वर रस आदि।

पेटेंट औषधियां

डिवाइन हैल्थ एड व डिवाइन लाइफ कैप्सूल (बी.एम.सी. डिवाइन फार्म), स्वामला कम्पाउन्ड (धूतपापेश्वर)।

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