उन्माद के कारण और उपाय

उन्माद के कारण: भाव प्रधान मानसिक रोग विषाद के विपरीत यह क्रिया प्रधान या चेष्टा प्रधान मानस रोग है, जिसका आरंभ 15 से 30 वर्ष की आयु में हो जाता है। रोगी को नींद बहुत कम आती है। वह अधिक क्रियाशील, अधिक भ्रमणशील, अधिक भाषणशील अधिक गायनशील हो जाता है। रोगी में न विवेक होता … Read more

एग्जिमा – कारण,लक्षण,उपाय

एग्जिमा का कारण: इस रोग में त्वचा पर छोटे-छोटे दानें या चकत्ते बन जाते हैं, जिनमें खुजली व जलन होती है। आयुर्वेद में पामा के नाम से इस रोग का वर्णन किया गया है। किसी भी द्रव्य के प्रति शरीर में असात्म्यता (एलर्जी) उत्पन्न होने से यह रोग होता है। तनाव, चिंता, आदि मानसिक विकार … Read more

कैंसर – कारण,लक्षण,उपाय

कैंसर का कारण: शरीर के किसी भी अंग में कोशिकाओं की संरचना में अज्ञात कारणों से परिवर्तन होकर उनमें कैंसर जन्य तत्वों की प्रवृत्ति बन जाती है। जब ऐसे काफी सारे सेल इकट्टे हो जाते हैं, तो किसी भी अंग में कैंसर की उत्पत्ति होती है। कैंसर की उत्पत्ति शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति में … Read more

गठिया – कारण,लक्षण,उपाय

गठिया का कारण: इस रोग में हाथ-पैर, कंधे, घुटने, एड़ी, कलाई आदि सहित शरीर के जोड़ों में सूजन और दर्द रहता है। प्रौढ़ावस्था में इस रोग की उत्पत्ति अधिक होती है, किंतु आहार-विहार की गड़बड़ी के कारण युवावस्था में भी यह रोग हो सकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में रिह्यूमैटॉयड फैक्टर को इस रोग का … Read more

सूखारोग – कारण,लक्षण,उपाय

सूखारोग का कारण: यह रोग विटामिन ‘डी’ की कमी के कारण होता है। विटामिन डी आंतों में से मुख्य रूप से कैल्शियम और गौण रूप से फास्फोरस के विलयन में सहायक होता हैं। विटामिन डी की कमी के कारण हडि्डयों में कैल्शियम फास्फेट, जो साधारणत: 60 से 65 प्रतिशत तक होता है, घटकर 20-25 प्रतिशत … Read more

बिस्तर पर पेशाब करना – कारण,लक्षण,उपाय

बिस्तर पर पेशाब करना का कारण: दो से तीन वर्ष की आयु तक आते-आते प्राय: बच्चे का मल-मूत्र संबंधी क्रियाओं पर नियंत्रण हो जाता है। यदि पांच वर्ष की आयु के बाद भी बच्चे का मूत्र विसर्जन पर नियंत्रण न हो पाए तो चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है। इस रोग का कारण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक … Read more

बाल यकृत वृद्धि – कारण,लक्षण,उपाय

बाल यकृत वृद्धि का कारण: भोजन में जब वसा और कार्बोहाइड्रेट (40-50 प्रतिशत से) अधिक तथा प्रोटीन (10 प्रतिशत से) कम मात्रा में रहते हों, तो यकृत के सेलों में वसा की मात्रा बढ़ने से यकृत वृद्धि होती है। जन्म से लेकर 2-3 वर्ष की आयु में बच्चों को यह रोग मां का दूध कम … Read more

ज्वर के कारण और घरेलु उपाय

ज्वर के कारण: शरीर का तापमान सामान्य अवस्था में (98.60 फारेनहाइट या 370 सेंटीग्रेड) से बढ़ना ज्वर का सूचक है। वात, पित्त और कफ दोषों की न्यूनाधिकता के आधार पर आयुर्वेद में ज्वर के अनेक भेद बताए गए हैं। वास्तव में ज्वर तो एक सामान्य लक्षण है, जो शरीरगत किसी अन्य रोग को इंगित करता … Read more

दम घुटना – कारण,लक्षण,उपाय

दम घुटना का कारण: फेफड़ों में प्रर्याप्त मात्रा में ताजी हवा न पहुंचने से मस्तिष्क व हृदय आदि महत्त्वपूर्ण अंगों में आंक्सीजन की कमी होने से उत्पन्न दशा को दम घुटना कहा जाता है। पानी में डूबने, गला घोंटने, गले के अंदर सूजन होने तथा विषैली गैसों के धुएं के कारण फेफड़ों में पर्याप्त मात्रा … Read more

नाभिपाक क्या है और घरेलु उपाय

नाभिपाक: प्रसव के समय स्वच्छता का ध्यान न रखने और प्रसव के समय प्रयुक्त उपकरणों के निर्जीवाणुकृत (स्टरलाइज) न होने के कारण शिशुओं में नाभिपाक की शिकायत होती है। नाभिपाक घरेलू उपाय नीम के पत्तों को पानी में उबालकर ठंडा करें और फिर उस पानी से नाभि को धोएं। नाभि को साफ करके उस पर … Read more