तिल्ली वृद्धि – कारण,लक्षण,उपाय

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तिल्ली वृद्धि का कारण: लंबे समय तक जब रोगी टायफाइड, मलेरिया, कालाजार आदि रोगों से पीड़ित रहता है, तो उसकी तिल्ली (प्लीहा) भी दूषित हो जाती है, उसका आकार बढ़ जाता है और वह कड़ी हो जाती है। प्लीहा वृद्धि के कारण रोगी की पाचन क्रिया व रक्त शोधन की क्रिया प्रभावित हो जाती है।

तिल्ली वृद्धि का लक्षण

बाईं ओर की पसलियों के नीचे बढ़ी हुई तिल्ली गांठ के रूप में महसूस होती है, जिसे छूने पर दर्द होता है। भूख में कमी, शरीर और चेहरे पर पीलापन, पेट का फूलना, कमजोरी, बेचैनी आदि।

तिल्ली वृद्धि का घरेलू उपाय

संबंधित रोग की चिकित्सा करें, जिसके चलते प्लीहा वृद्धि हुई हो। इसके अतिरिक्त प्लीहावृद्धि हेतु अलग से निम्न चिकित्सा करें :

5 ग्राम अनार के पत्ते और उसमें 1 ग्राम नौसादर पीसकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी के साथ दें।

मूली काटकर, उस पर नौसादर छिड़क कर रात को खुले में रखें और सुबह खाली पेट खाएं।

प्याज काटकर उस पर सेंधानमक, काली मिर्च और सिरका डालकर लें।

छोटी पिप्पल का एक चम्मच चूर्ण हरड़ के 4 चम्मच काढ़े के साथ या गाय के दूध के साथ सुबह-शाम दें।

हलदी का आधा ग्राम चूर्ण पुराने गुड़ के साथ सूबह-शाम दें।

आक की एक कोंपल गुड़ के साथ सुबह खाली पेट दें।

पलाश के पत्तों पर सरसों का तेल लगाकर तिल्ली के ऊपर बांधें।

पके हुए पपीते पर 1 ग्राम नौसादर डालकर दिन में एक बार रोगी को खिलाएं।

करेले का रस सुबह-शाम, दो-दो चम्मच दें।

अधपका पपीता छीलकर, उसके टुकड़े करके सिरके में एक सप्ताह तक पड़े रहने दें। एक सप्ताह के बाद 50 ग्राम की मात्रा में रोज खिलाएं।

सुबह-शाम 1 चम्मच शहद के साथ पाव भर पपीता खाएं।

100 ग्राम आम के रस में आधा चम्मच सोंठ मिलाकर सुबह खाली पेट खिलाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

प्लीहारि रस, प्लीहार्णव रस, शुण्ठ्यादि चूर्ण, रोहितक लौह, प्लीहारिवटी आदि औषधियों का प्रयोग किया जा सकता है।

पेटेंट औषधियां

फाइलासिल कैप (माहेश्वरी), निरोसिल गोलियां व सीरप (सोल्यूमिक्स), डिवाइन लिव-सी कैप्सूल (बी.एम.सी. डिवाइन फार्मास्यूटिकल्स)।

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