तीव्र गुर्दा (वृक्क) शोथ – कारण,लक्षण,उपाय

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तीव्र गुर्दा रोग कारण: जीवाणु संक्रमण या कभी-कभी स्वत: ही शरीर में उत्पन्न एलर्जी के कारण वृक्कों के धमनी गुच्छों में सूजन आ जाती है, जिससे मूत्र का निस्पंदन (छानने की क्रिया) कम हो जाती है। इस रोग में मूत्र कम निकलता है तथा एलब्यूमिन के साथ साथ रक्तकण व धमनी गुच्छों के बहिस्तर की कोशिकाएं (इपीथीलियल सैल) भी मूत्र के साथ बाहर निकलने लगती हैं।

इस रोग में वृक्कों की मूत्रस्त्राविणी नलिकाओं तथा रक्तवाहिनियों में प्राय: कोई विकृति नहीं होती। यह 10 वर्ष की आयु में अधिक होता है और लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में अधिक होता है। बच्चों में लंबे समय तक गला खराब होने के बाद इस रोग की संभावना बढ़ जाती है।

तीव्र गुर्दा रोग लक्षण

रोगी के शरीर विशेष कर चेहरे व पांवों पर सुजन होती है। पहले चार-पांच दिन 100० फारेनहाइट तक हलका बुखार रहता है। पेट में दर्द, उलटी, जी मिचलाना, सांस लेने में कष्ट होना आदि लक्षण मिल सकते हैं।

तीव्र गुर्दा रोग घरेलू उपाय

उपवास इस रोग की चिकित्सा का प्रमुख सिद्धांत है। भोजन न करने से वृक्कों पर कार्य का भार घट जाता है जिससे आराम जल्दी मिलता है। यदि पूर्णत: उपवास सम्भव न हो तो पहले 3 दिन में दो-तीन बार आधा-आधा गिलास पानी, नीबू, ग्लूकोज आदि डालकर ले सकते हैं।

जैसे-जैसे पेशाब की मात्रा बढ़ती जाए, पेय पदार्थों की मात्रा बढ़ाते जाएं। ठोस आहार स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार के बाद ही शुरू करें। इसके अलावा निम्नलिखित उपचार दे सकते हैं-

मक्के के भुट्टे के 20 ग्राम बाल पाव भर पानी में उबालें, आधा रह जाने पर उतार कर गुनगुना पी लें। सुबह-शाम यह एक-एक की मात्रा में लें।

आक के पत्तों को सुखाकर व जलाकर राख कर लें। आधा चम्मच यह राख थोड़ा-सा नमक मिलाकर एक गिलास छाछ में मिलाकर सुबह-शाम लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

बंग भस्म, पुनर्नवा मंडूर, स्वर्ण वसन्त मालती रस, चन्दनासव, देवदार्वाद्यारिष्ट, चन्द्रप्रभा वटी आदि आयुर्वेदिक दवाएं इस रोग में ली जा सकती हैं।

पेटेंट औषधियां

नीरी सीरप व गोलियां (एमिल) भी इस रोग में लाभदायक हैं।

तीव्र गुर्दा (वृक्क) शोथ – कारण,लक्षण,उपाय

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