टॉनिक क्या है? टॉनिक के बारे में पूरी जानकारी

Spread the love

टॉनिक क्या है टॉनिक के बारे में पूरी जानकारी: आपने दैनिक जीवन में ऐसे अनेक व्यक्तियों को देखा होगा, जो शरीर की तंदुरुस्ती को बनाए रखने के लिए घूमना, दौड़ना, कसरत करना आदि से जी चुराते है, और इसके बदले में बाजार में उपलब्ध टॉनिक के नाम से मिलने जाली रंगबिरंगी गोलियों, कैप्सूलों और सिरप की शीशियों में पैक दवाओं से अपनी तंदुरुस्ती कायम रखना चाहते है।

लोगों की इसी प्रवृति का लाभ उठाकर बाजार मेँ अनेक प्रकार के टॅानिक मिलने लगे हैं। तंदुरुस्ती बढ़ाने वाले टॉनिकों के अलावा आजकल हेयर टॅानिक (बालों के लिए), स्किन टॉनिक (त्वचा के लिए), सेक्स टॉनिक (शक्ति बढ़ाने के लिए) भी मिलने लगे हैं।

टॅानिकों पर विस्वास

आजकल टॉनिक की शीशियों और विटामिंस की गोलियों व कैंप्सूलों में लोगों को श्रद्धा होने लगी है। ‘बच्चों के पूर्ण विकास के लिए’, ‘पूरे परिवार का टॉनिक’ ‘परिवार की तंदुरुस्ती का राज….टॅानिक’,।

महिलाओ के लिए विशेष रूप से निर्मित टॉनिक’ आदि लुभावने शीर्षकों से पत्र-पत्रिकाओं में , सिनेमा, टी.वी. के पर्दे पर पढ़ने व देखने को मिलते हैं। परन्तु सचाई यह है कि इन टॉनिकों से उतना फायदा नहीं होता है जितना प्रचार किया जाता है। दूसरे, यदि कुछ फायदा होता भी है तो उसके ढेर सारे दुष्प्रभाव भी होते हैं।

यदि टॉनिकों की शीशियों , कैप्सूलो और गोलियों के बल पर व्यक्ति मोटा दोने लग जाए तो फिर कोई भी संपन्न व्यक्ति आपको कमजोर, दुबला-पतला नज़र न आता, क्योंकि वह महंगा-से-महंगा टॅानिक खरीद कर सेवन कर सकता है। परन्तु हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं होता है।

टॉनिक क्या करते हैं

टॉनिक वे पदार्थ होते हैं, जिनके नियमित सेवन करने से शरीर में शक्ति और उत्साह पैदा होता है। उससे न तो एकाएक उत्तेजना पैदा होती है और न ही प्रतिक्रिया से तनाव या अवसाद।

मात्र टॉनिक देकर अब चिकित्सा करना संभव नहीं रहा, क्योंकि बीमारी हटने के बाद ही इनसे फायदा मिलता है।

क्यों दिए जाते हैं टॉनिक

एक सामान्य मेडिकल प्रैक्टिशनर अपनी रोजमर्रा की प्रैक्टिस में रक्त की कमी, भूख न लगना, भोजन न पचना, कमजोरी महसूस होना उम्र के अनुसार शरीर का विकास न होना, रोगमुक्त होने के बाद की कमजोरी दूर करने के लिए सामान्यतया टॉनिक को दवाएं लिखते हैं। जबकि होना यह चाहिए कि पहले तकलीफों का भंलीभांति पता कर लिया जाए।

प्राय: आम लोगों मेँ यह धारणा घर कर गई है कि अधिकाधिक मात्रा मेँ विटामिंस, हार्मोंस, वजन बढ़ाने वाली या तत्काल ताकत देने वाली गोलियां ली जाएं तो तुरंत लाभ होता है जबकि वास्तविकता यह है कि इनकी 90 प्रतिशत से ज्यादा मात्रा मूत्र, श्वास एल मल विसर्जन द्वार से शरीर से निकल जाती है।

कब लाभकारी हैं टॉनिक

विशेषज्ञों की राय के अनुसार भोजन के पहले कभी भी विटामिन की गोली नहीं खाना चाहिए। विटामिन शरीर को तभी लाभ पहुंचाते है , जब शरीर के पाचन संस्थान में प्रोटीन फैट, कार्बोंहाहड्रेट मौजूद रहता है। भोजन के बाद इनका सेवन करने से विटामिंस पूरे प्रभाव के साथ स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होते हैं।

किसी एक विटामिन को जरूरत से अधिक मात्रा दूसरे विटामिन के प्रभाव को कम कर देती है। विटामिन ‘ए’ को हमेशा विटामिन ‘ई’ के साथ लेना चाहिए।

इन दोनों विटामिनों को लेने के बाद आयरन की मात्रा अधिक नहीं लेना चाहिए। यदि आप अधिक कैल्शियम का इस्तेमाल करते है, तो आपके ‘शारीर में मैगनीशियम की मात्रा कम होने का खतरा रहता हैं।

शरीर के लिए मैगनीशियम बहुत आवश्यक हैं , क्योंकि यहीं भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करता है, जिससे हमें शक्ति मिलती है।

विटामिनों से लाभ

अधिक विटामिंस की जरूरत आमतौर पर उन्हें होती है, जो लोग नियमित व्यायाम करते है, खेलते-कूदते हैं, डायटिंग करते हैं, तनाव में रहते हैं, सिगरेट पीते हैं या जो महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियों सेवन करती हैं, उन्हें यदि कम विटामिन मिले, तो सेहत गिरती जाती है।

विटामिनों के सेवन से बालों में चमक आ सकती है, त्वचा स्निग्ध होती है हैं नाखून कड़े हो सकते है। आवश्यकता से अधिक सेवन किए गए विटामिनों के विषाक्त लक्षण भी पैदा को सकते है। विटामिन ‘ए’ की अधिक मात्रा निखार लेते रहने से ‘हाइपर विटामिनोसिस ए’ रोग होने से गुर्दे और तिल्ली क्षतिग्रस्त होने लगते हैं।

हड्डियों में धीरे- धीरे सूजन बढ़ती चली जाती है। परिणामस्वरूप भूख न लगना, अपच, घबराहट , अनिद्रा की शिकायते होने लगती है।

इसी प्रकार विटामिन ‘डी’ की अधिकता से गुर्दे में पथरी , उलटी, मितली, पेट में दर्द, प्यास की अधिकता भूख को कमी और कब्जियत की शिकायत उत्पन्न होने लगती है। विटामिन ‘के’ की अधिकता से बच्चों में पीलिया रोग हो जाता है।

अधिक समय तक या अधिक मात्रा में यदि लौह युक्त टॉनिक लिए जाए तो आमाशय में क्षोभ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप पीड़ा, अपच, वमन आदि की तकलीफ हो सकती है।

भूख बढ़ाने और अच्छा महसूस करने के लिए टॉनिकों में अल्कोहल मिलाया जाता है। प्रारंभ में इसका प्रभाव व्यक्ति को अच्छा मालूम पड़ता है, लेकिन अधिक समय तक सेवन करने से बहुत दुष्प्रभाव देखने को मिलते है। पेट की कई बीमारियां हो जाती हैं। मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से अल्कोहल का बुरा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है।

गिल्सरोफास्फेट्स प्रमुखता से समी टॉनिकों में इस्तेमाल किए जाते है। इनका शरीर में शोषण बहुत धीरे-धीरे होता है, इसीलिए इसके विषाक्त लक्षण भी धीरे-धीरे प्रकट होते है। आमाशय व आंत्र शोथ तथा यकृत की विकृति गिल्सरोफास्फेट्स के आधिक्य से होती है। इसका मुख्यत: प्रयोग तंत्रिका दौर्बल्य में किया जाता है।

शारीरिक शक्ति का क्षय करने वाली बीमारियों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार से हार्मोन के अधिक प्रयोग करने से महिलाओं की दाड़ी-मूंछ आना , भूख बढ़ाने में स्ट्रिकनीन का प्रयोग करने से शारीरिक दुष्प्रभाव, वजन बढ़ाने के लिए एनाबलिक स्टेटायड लेने से गुर्दे संबंधी अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। अत: बिना आवश्यकता के एवं डॉक्टरी परामर्श के इनका परहेज ही करना चाहिए।

टॉनिक के बजाय पौष्टिक आहार लें

भूख न लगने की शिकायत दूर करने के लिए टॉनिक के बजाय पौष्टिक आहार लें। इसके लिए भोजन के पूर्व अदरक की चटनी, नीबू का रस, भुना हुआ जीरा और थोड़ा-सा नमक मिलाकर नियमित दोनों समय सेवन करें।

इससे खुलकर भूख लगेगी। इसी प्रकार से अन्य कमजोरियों को दूर करने के लिए भी आहारों द्वारा ही चिकित्सा करें। इसके अतिरिक्त खेलें या व्यायाम करें। भरपूर नींद लें। दैनिक स्नान करें। साथ ही आगे दिया पौष्टिक आहार सेवन करें-

प्रतिदिन का भोजन

गेहूं, चावल, मक्का, ज्वार या बाजरा (अनाज) 450 ग्राम

दूध, दही या छाछ (दूध व इससे बने पदार्थ) 250 मि.ली.

चना, मूंग, उड़द या मसूर की दाल (दालें) 100 ग्राम

लौकी, टिण्डा, तोरई, भिंडी, आलू आदि सब्जी (सब्जियां) 200 ग्राम

घी, मक्खन, तेल आदि की चिकनाई (तेल या चिकनाई) 50 ग्राम

मौसम के फल जैसे-आम, केला, संतरा, सेब, अमरूद (फल आदि) 50 ग्राम

हमें प्रतिदिन के भोजन में निम्नलिखित तत्वों वाले खाद्यो का प्रयोग करना चाहिए, ताकि शरीर को पौष्टिक तत्व मिलते रहे।

प्रोटीन: शरीर में शक्ति, उत्साह, फुर्तीलापन और शारीरिक विकास के लिए यह जरूरी होता है। इसे दालों से 20-25 प्रतिशत तक प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा यह अनाज, चना मटर, दूध, छाछ, पनीर, फल, मेवों में अधिक पाया जाता है।

कार्बोंहाइड्रेट्स: शरीर में शक्ति पहुंचाने के लिए जरूरी होता है। इसे चीनी और गुड़ से अधिक मात्रा में प्राप्त किया जा सकता है। एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 50 ग्राम गुड़ या चीनी बना चाहिए। यह चावल गेहूँ, मक्का, गन्ना, खजूर, मीठे फल आदि से भी प्राप्त किया जा सकता है।

वसा: शरीर में शक्ति और गर्मी पहुंचाने के लिए जरूरी होता है। इसे तेल वनस्पति घी से प्राप्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ये दूध दही, घी , मक्खन, बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली आदि से भी प्राप्त किया जा सकता है।

खनिज लवण: हड्डियों के मजबूत बनाने, रोगों से शरीर की रक्षा करने और शरीरिक शबित के बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। ये दूध, चावल, गेहूँ फल, साग-सब्जियों में पाए जाते हैं।

कैल्शियम: दांतों और हड्डियों को मजबूत रखने के लिए जरूरी है। यह शरीर का रंग निखारता है , बाल घने व मज़बूत करता है। यह दूध हैं दही, छाछ, पनीर, हरी सब्जियों से प्राप्त किया जा सकता है।

लोहा: इसकी कमी से खून की लाली कम होकर एनीमिया नामक रोग हो जाता है। शहद, गाजर, पालक में यह तत्व काफी मात्रा में होता है। इसके अलावा सूखे मेवों, सेम, दाल, ताजी पत्तियों से भी प्राप्त किए जाते है।

उपरोक्त विधि व मात्रा से आप यदि अपने दैनिक जीवन में पौष्टिक तथा संतुलित आहारों का सेवन करेंगे, तो आपको और किसी टॉनिक के चक्कर में पड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

टॉनिक क्या है? टॉनिक के बारे में पूरी जानकारी

Leave a Comment