टी.वी के बारे में जानकारी

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टी.वी के बारे में जानकारी: इसमें संदेह नहीं कि टी.वी. आज मनोरंजन, तनाव दूर करने और थकान मिटाने का एक मात्र साधन होने के करण इसे देखना अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।

आज की संस्कृति को टी.वी. संस्कृति बनाने में केबलों का महत्वपूर्ण योगदान है। दिन-रात तरह-तरह के कार्यक्रम विभिन्न चैनलों पर देखना अब आम लोगों की आदत में शुमार हो गया है, टी.वी. लगातार और नियमित देखते रहने से कई तरह की परेशानियां, मसलन नींद कम आना, आंखों पर तनाव, आदि हो जाती है। इसलिए इनको कम देखना चाहिए।

टी.वी का स्वास्थ्य पर बुरा असर

प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. नीला बोहरा के मतानुसार काफी निकट से और अधिक समय तक टी.वी. देखने वाले बच्चे में चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, तनाव, मिर्गी, मोटापा और अवसाद जैसी बीमारियां हो सकती है।

टी.वी. पर दिखाए जाने वाले दृश्य बच्चों के अवचेतन में गहराई से बैठ जाते है और इसका असर उन पर कभी भी हो सकता है।

बच्चे तर्क-वितर्क किए बिना टी.वी. से संदेशों और दृश्यों को सही मान बैठते हैं और उनकी नकल करते हैं। परिणामत: अपनी जान से भी उन्हें हाथ धोना पड़ता है।

इंदौर कैंसर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. महेश रावत के मत्तानुसार टी.वी से निकलने वाली विशेष प्रकार की किरणे बच्चों के शरीर पर हानिकारक प्रभाव डालती है।

यदि यह प्रक्रिया चलती रहे, तो बच्चों में रक्त-कैंसर के लक्षण उभरने शुरू हो जाते हैं। पिछले 4-5 वर्षों मेँ इस प्रकार के कैंसर में वृद्धि हुई है।

एक अन्य शोध के अनुसार, टी.वी. से निकलने वाली खास किस्म की किरणे बच्चों के दिमाग की कार्यप्रणाली की प्राय: ठप्प कर देती है।

इससे जब एक बार दिमाग सुन्न हो जाता है, तो आंखें टी.बी. पर टिक जाती हैं अत: सम्मोहित होकर बच्चा लगातार टी.बी. देखता रहता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसे स्कूली बच्चे जो 2 या 2 से अधिक घंटे तक रोजाना टी.बी. देखते है, उनके शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा होने का बहुत अधिक खतरा होता है।

शोधों से यह भी पता चला है कि वर्तमान में प्रचलित नए तरह की फोटोग्राफी, जिसमें चित्र बड़ी तेजी से हिलेते और बदलते हैं, साथ ही साथ रोशनी में घट-बढ़ का तेज क्रम चलता है, जिससे बच्चे के नाजुक मस्तिष्क पर काफी गलत प्रभाव पड़ता है।

आंखों की रोशनी कम होना, चक्कर आना, दिमाग का शीघ्र थक जाना जैसे लक्षण दुष्परिणाम स्वरूप देखने को मिलते है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार, हमारे देश में 52 लाख मिर्गी के रोगी है जिनमें से 3 लाख लोग लगातार टी.वी. देखने से इस रोग के शिकार हुए है।

टी.वी. देखते समय दिमाग की प्रकाश संवेदी कोशिकाएं बहुत तेजी से प्रतिक्रिया व्यक्त करती है, जिससे मस्तिष्क के आणविक स्तर में असामान्य परिवर्तन होने लगते है। जिससे मस्तिष्क में असामान्य तरल पदार्थ बहने से मिर्गी के दौरे पड़ना शुरू हो जाते हैं। यह मनोप्रेरित्त मिर्गी कहलाती है।

अधिक टी.वी. देखने वाले लोगों के मस्तिष्क की सोचने की शक्ति कुंठित हो जाती है। उन्हें किसी विषय पर जल्दी सोचने और पढ़ने पर ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई होती है। स्मरण शक्ति कम को जाती है। उनकी रचनात्मक शक्ति कम हो जाती है। शारीरिक दृष्टि से वे जल्दी थक जाते हैं।

नेत्र विशेषज्ञों की राय है कि अधिक और लगातार टी.वी. देखने से दृष्टि कमजोर हो जाती है आंखों के दृष्टि पटल सूख जाते है, जिससे आंखों में जलन होने लगती है दृष्टि दोष उत्पन्न होकर चश्मा लगाना पढ़ सकता है। जो पहले से चश्मा लगाते रहे है, उनका नंबर बढ़ सकता है। रंगों की गहरी चमक और बार-बार अवरुद्धत्ता के कारण होने वाली झपझपाहट से सिर और आंखों में दर्द के अलावा थकान महसूस होती है।

टी.वी. देखने के दुष्प्रभाव से ऐसे बचें

  • आज आवश्यकता इस बात की है कि टी.वी. देखने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों को कठोर रुख अपनाना चाहिए। बच्चों को देखते के लिए स्वस्थ मनोरंजक कार्यक्रमों का ही चुनाव करना चाहिए, कार्यक्रमों को लगातार कई घंटे तक नहीं देखना चाहिए बल्कि बीच -बीच में थोड़ा विश्राम अवश्य दें।
  • टी.वी. एकदम पास से न देखकर कम से कम 8-10 फीट की दूरी से देखना चाहिए।
  • टी.वी. देखने के दौरान सिनेमा हाल की तरह अंधेरा न कर बल्ब या ट्यूब लाइट की रोशनी में देखना चाहिए।
  • डरावने, भयानक या अश्लील कार्यक्रमों को बच्चों के न देखने दें, क्योंकि इनका प्रभाव बच्चों के मन पर बुरा ही पड़ता है।
  • यदि आपके सिर में तेज दर्द हो रहा हो, मानसिक संतुलन ठीक न हो, आंखें थकी और लाल हो रही हो नींद सता रहीं हो , ऐसा शारीरिक रोग जिसमें तीव्र पीड़ा का अनुभव हो रहा हो चित्र आंखों के दोष के कारण स्पष्ट न दिख रहे हो, तस्वीर लगातार हिल-डुल रहीं हो, तो ऐसी हालत में टी.वी. कतई न देखें। क्योंकि इससे परहेज न करने वालों के शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़ सकते हैं।

टी.वी के बारे में जानकारी

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