विषाद – कारण,लक्षण,उपाय

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विषाद का कारण: भाव प्रधान मानस रोगों में यह सबसे अधिक होता है। जब व्यक्ति का किसी कार्य में दिल न लगे, वह किसी खुशी में शामिल न हो, किसी वस्तु अथवा कार्य में रुचि न रखे और उदास-उदास रहने लगे, तो उसके रोग को ‘विषाद रोग’ कहते हैं।

यह रोग असफलता, धन या प्रिय जन की हानि, वियोग आदि की प्रतिक्रिया के रूप में होता है।

विषाद का लक्षण

रोगी निराश, उत्साहहीन और दु:खी रहता है। वह हर वस्तु या घटना का बुरा पहलू ही देखता-सोचता है। अपने जीवन में हुई पिछली बातों पर उसे पश्चात्ताप रहता है। उसे नींद देर से आती है और जल्दी ही टूट जाती है।

विषाद का घरेलू उपाय

मनोचिकित्सा के अतिरिक्त निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग कर सकते हैं :

8 पीस बादाम व 3 काली मिर्चों को पीस कर एक चम्मच घी में भूनें, जब लाल हो जाए तो उसमें 8 किशमिश भी डाल दें, ऊपर से आधा किलो दूध डालकर इसे पकाएं। यह काढ़ा सुबह-शाम दें।

शंखपुष्पी का चूर्ण सोते समय 4 से 8 चम्मच तक ठंडे पानी के साथ दें।

चुटकी भर जायफल का चूर्ण चार चम्मच आंवले के रस के साथ दिन में तीन बार लें।

रोगी को एक खरबूजा सुबह खाली पेट खिलाएं।

सीताफल की सब्जी रोगी को खिलाएं।

प्याज का रस 50-50 ग्राम सुबह-शाम रोगी को पिलाएं।

आयुर्वेदिक औषधियां

ब्राह्मी घृत, शतावरी घृत, बादाम पाक, सर्पगंधा चूर्ण, जटामासी चूर्ण, सारस्वत चूर्ण, द्राक्षासव, कल्याणक घृत, महापंचगव्य घृत, हिमसागर तेल, सारस्वतारिष्ट।

पेटेंट औषधियां

रट्रेसकैम कैप्सूल (डाबर), सिलैडिन गोलियां (एलारसिन), डिवाइन लाइफ कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा)।

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