धूम्रपान क्या होता है – धूम्रपान के दुष्परिणाम

Spread the love

धूम्रपान क्या होता है – धूम्रपान के दुष्परिणाम: बीड़ी, सिगरेट पीना अब एक आम बात हो गई है। पहले यह शौक पुरुषों तक ही सीमित था लेकिन अब तो बच्चे, युवक-युवतियां और महिलाओं ने भी इसे अपना लिया है। धूम्रपान सेहत के लिए बेहद खतरनाक और घातक है।

धूम्रपान क्यों करते हैं?

छोटे एवं स्कूली बच्चे सिगरेट इसलिए पीते है कि वे सबसे अलग दिखें। किशोर और युवा इसलिए सिगरेट पीते है कि अपने समकक्षों और सहपाठियों पर प्रभाव डाल सकें।

उन छात्रों का मानना है कि इससे उनके व्यक्तित्व में निखार आता है। मजदूरों में धूम्रपान के बहाने काम के समय आराम करने का मौका मिलने के कारण भी चलन बढ़ा है।

जहां कुछ लोग शान दिखाने के चक्कर में धूम्रपान करते है, वहीं कुछ दूसरों को अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए ऐसा करते है। कुछ लोग चिंता ,तनाव दूऱ कर स्फूर्ति पाने के लिए धूम्रपान करते हैं। कुछ लोग नशे की तलब लगने के कारण धूम्रपान करते है। इस प्रकार से प्रत्येक व्यक्तियों का धूम्रपान का अलग-अलग कारण होता है।

धूम्रपान से नुकसान

जनरल सी. एवरेट कूप द्वारा 1986 में जारी एक रिपोर्ट ‘जबरन धूम्रपान के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव’ में कहा गया है कि तम्बाकू का धुआं अंदर खींचने से बीमारी का खतरा केवल धूम्रपान करने वालों को ही नहीं होता वायु में छोड़ें गए धुएं को सांस के साथ अंदर लेने वालों को भी हो सकता है।

अमेरिका में ही एक अन्य अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला है कि धूम्रपान करने वालों की बीवियों को दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं उन महिलाओं से तीन गुना अधिक होती हैं, जिनके पति धूम्रपान नहीं करते। यदि दिन में दो पैकेट सिगरेट पीने वाला और एक न पीने वाला साथ-साथ रहते हो, तो समझिए कि धुएं के असर से दूसरे व्यक्ति ने भी तीन सिगरेट तो पी ही ली।

सिगरेट के धुएं के असर से आंखों मेँ जलन, गले में ख़राश, जी मिचलाहट, बार-बार खांसी आना और सिर दर्द जैसी तकलीफें पैदा हो जाती है। यहां तक कि कुछ को इससे एलर्जी , छाती में दर्द या दमे की तकलीफ बढ़ने जैसी तकलीफें भी हो सकती हैं। अब आप स्वयं विचार करें कि जब मात्र धुएं सूंघने से इतनी तकलीफें हो सकती है, तो जो व्यक्ति दिन-रात वर्षों तक सिगरेट पीता है, उसके स्वास्थ्य का क्या हाल होता होगा?

धूम्रपान के कैसे-कैसे विष

रासायनिक परीक्षणों से सिद्ध हो चुका है कि सिगरेट की तम्बाकू में निकोटिन, कार्बन मोनो आक्साइड, पायरीडीन, पायकोलीन, कोलीडीन, काबोंलिक एसिड, सेकोलिन, एंजोलिन, मार्श गैस परफेरोल जैसे 24 प्रकार के विष होते है। तम्बाकू जलाने से जो धुआं निकलता है, उसमें 19 प्रकार के विष रहते है।

जिस कागज से सिगरेट बनती है वह एक विशेष प्रकार के घोल द्वारा बनाया जाता है, उसमें संखिया का मिश्रण होता है। जब यह कागज तम्बाकू के साथ जलता है, तो वह फरफेरोल नामक विष उत्पन्न करता है, जो हमारे मस्तिष्क के ज्ञान तंतुओं पर धीरे-धीरे तथा लंबे समय तक प्रभाव डालता रहता है।

निकोटिन से रक्तचाप, ह्रदय की धड़कन बढ़ना, ह्रदय के लिए हानिकारक कोलेस्ट्रोल का बढ़ना, मस्तिष्क के स्नायुतंत्र कमजोर होना, फेफड़ें का कैंसर होना जैसी तकलीफें उत्पन्न होती है।

कार्बन मोनो आक्साइड शरीर को प्राप्त होने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को कम करती है, जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है और इसकी कमी से ह्रदय पर दबाव पाता है, जिससे हार्ट-अटैक होने की संभावना होती है। दमा ओर नेत्र रोग भी इसकी वजह से होते है।

पायरीडोन से आंतों की खुश्की और कब्ज, कोलोडीन से सिर चकराने लगता है और स्नायु शिथिल हो जाते हैं। मार्श गैस से वीर्य पतला होता है, दिल की बीमारी श्वास संबंधी रोग और आंखों की कमजोरी होती है। एलोजीन से रक्त दूषित होकर रक्त विकार पैदा होते हैं। कार्बोंलिक एसिड से स्मरण शक्ति को क्षति और गहरी नींद नहीं आती।

व्यक्ति जब किशोरावस्था से ही धुम्रपान करना शुरू कर देते है हैं तो उनका पूरा शारीरिक विकास नहीं हो पाता और शरीर अनेक बीमारियों से जकड़ जाता है। चक्कर आना, आंखों की कमजोरी धुंधलापन, खांसी, शारीरिक कमजोरी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटना जैसी शिकायते होना आम बात होती हैं।

हर सिगरेट मनुष्य की 5 मिनट की आयु घटाती है। दो पैकेट सिगरेट रोज पीने वाला व्यक्ति अपनी जिदगी के 38 वर्ष कम कर लेता है। धूम्रपान से मुंह से दुर्गन्ध आती है।

होंठों की त्वचा पर कालिमा छा जाती है। होंठ सूखे व रूखे हो जाते है, अत: उन्हें मुलायम रखने के लिए व्यक्ति बार-बार जीभ निकाल का होंठों पर घुमाता रहता है, दांतों का रंग पीला पड़ जाता है तथा उन पर काले धब्बे भी पड़ जाते है। जीभ की स्वाद ग्रंथियां नष्ट हो जाती हैं, जिससे भोजन का असली स्वाद नहीं मिलता।

चेहरे की त्वचा में खिंचाव उत्पन्न होने से झुर्रियां पड़ने लगती हैं। आँखों की चमक जाती रहती है। आंखें लाल, भारी, बुझी-बुझी सी लगती है। आंखों के नीचे कालापन घेर लेता है। काले बाल भूरे होने लगते है। मीठी सुरीली आवाज में भारीपन आ जाता है और किसी से बात करने से पहले गला साफ करना पड़ता है।

फिल्टर सिगरेट भी नुकसानदेह

यदि आप यह समझते है कि फिल्टर युक्त सिगरेट अपेक्षाकृत कम नुकसानदेह है, को आप भूल कर रहे हैं, क्योंकि कोई भी सिगरेट सुरक्षित नहीं है। फिल्टर से कार्बन मोनो आक्साइड कम नहीं होती।

महिलाओ में धूम्रपान के खतरे

धूम्रपान के कारण महिलाओँ में अनेक रोग को सकते है और उनके होने वाले बच्चे के जीवन को ख़तरा भी हो सकता है। धुम्रपान करने वाली गर्भवती माता के शिशु का आकार छोटा हो सकता है, जन्म के दौरान उसकी मृत्यु हो सकती है, गर्भपात हो सकता है, विकलांग और अविकसित शिशु को जन्म दे सकती है।

यहां तक कि समय से पूर्व रजोनिवृत्ति होकर अनेक विकार उत्पन्न हो सकते है। स्तन पान करने वाले शिशु के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

धूम्रपान छोड़ने के उपाय

यद्यपि धूम्रपान की आदत छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन प्रयत्न करके दृढ़ निश्चय और उसका विकल्प अपना कर काफी हद तक इसे छोड़ा जा सकता है। इसकी आदत छोड़ने के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिए-

  • जब सिगरेट की तलब लगे, इलिप पोपलर के तने की छाल चबाएं।
  • मेडिकल स्टोर से ‘बेंट्रोन’ टेब्लेट्स खरीद कर भोजन के बाद इसका सेवन करें। इसके प्रभाव से आपके स्नायु निकोटिन की उस कमी को महसूस नहीं कर पाएंगे , जो सिगरेट के अभाव में उन्हें करना चाहिए। इस गोली का स्वाद निकोटिन जैसा होता है और वह वैसा ही असर करती है लेकिन इसमें निकोटिन नहीं होता। अत: फेफड़ों पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसका निर्माण लेबनान के नीले फूल और पत्ते से होता है। बेंट्रोन को आप चाहे जब छोड़ सकते हैं और इसको आदत भी नहीं पड़ती।
  • लोबेलिन नामक दवा से सिगरेट छोड़ने में सहायता अवश्य मिलती है, लेकिन बहुत कम लोगों को इससे शायद होता है।
  • सिल्वर नाइट्रेट के 10.25 प्रतिशत घोल से गहरे करने से मुंह का स्वाद बदल कर सिगरेट को लत छूट जाती है। गरारे दिन भर में 2-4 बार करें।
  • आजकल बाजार में आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर्स पर ‘निर्दोष’ हर्बल सिगरेट जड़ी बूटियों के पाउडर से बनी हुई मिलती है, जो सिगरेट की तलब लगने पर पी जा सकती है। इसके पीने से स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीँ होता और पीने वाले को ताजगी, स्फूर्ति का अहसास होता है।
  • यदि सिगरेट छोड़ने के लिए किसी विकल्प का सहारा न लेना चाहे तो प्रतिदिन पीने की संख्या को सीमित या कम करते जाएं।
  • उपर्युक्त उपायों के अलावा जहां तक हो सके, सिगरेट पीने वालों की संगति न करें। जेब में सिगरेट का पैकेट और माचिस न रखें।
  • सिगरेट पीने की तलब लगे, तो च्यूंगगम मुंह मेँ डाल कर घंटों चबाते रहें। तथा अपने आप को कार्यों में व्यस्त रखे, क्योंकि फुरसत में ही आदमी को सिगरेट पीने की लालसा होती है। इन उपायों से आपको सिगरेट छोड़ने में मदद मिलेगी।

धूम्रपान क्या होता है – धूम्रपान के दुष्परिणाम

Leave a Comment