नमक के नुकसान इन हिंदी

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नमक के नुकसान इन हिंदी: भोजन कितना भी अच्छा क्यों न हो, बिना नमक के वह बेस्वाद और अरुचिकर ही लगता है। कभी-कभी सब कुछ ठीक-ठाक होने के बावजूद यदि नमक ज्यादा हो गया है, तो वह खाया नहीं जाता, इसलिए नमक का कम व उचित उपयोग करने से भोजन न केवल रुचिकर लगता है, वरन् कई बीमारियों को भी हम पनपने नहीं देते हैं।

नमक का परहेज कब करें

जिन रोगियों को खाज, खुजली, उच्च रक्तचाप, रक्त विकार, कुष्ट, सूजन की तकलीफें होती है, उन्हें डॉक्टर परहेज के तौर पर नमक छोड़ने का निर्देश देते हैं। वैसे शरीर के लिए जितने नमक की आवश्यकता होती है, उसकी पूर्ति तो दाल, फल और सब्जियों के सेवन से ही हो जाती है।

नमक न खाने वाले लोग

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि अल्जीरिया के मूल निवासी और कोलम्बिया के तटवर्ती मैदानों में बसने वाले लोग नमक का प्रयोग बिलकुल नहीं करते।

सहारा रेगिस्तान के मूल कबीले के निवासी नमक को त्याज्य समझते हैं। साइबेरिया के मूल निवासी, नेपाल के सुदूर प्रांतों में बसने वाले, प्रशांत महासागर के महाद्वीपों में रहने वाले भी नमक का सेवन नहीं करते, फिर भी वहां के लोगों का शारीरिक बल और स्वास्थ्य किसी से कम नहीं होता।

भारतीय ग्रंथों में नमक के कम प्रयोग पर बल

चरक संहिता में नमक के संबंध में लिखा गया है कि जिस देश व स्थान के व्यक्ति इसका निरंतर उपयोग करते हैं, उनको ग्लानि बहुत रहती है और उनके रुधिर, स्नायु तथा मांस शिथिल हो जाते है। इनके निर्बल रहने से क्लेश सहने मेँ असमर्थ रहते हैं।

जिनको नमक बहुत अनुकूल लगता है, उनके बाल शीघ्र गिर जाते है, जल्दी सफेद हो जाते है, गंजापन का रोग हो जाता है और युवावस्था में ही चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती हैं। नमक का त्याग करने के लिए भारतीय ग्रंथों में एक ‘व्रत’ के रूप में निरूपित किया गया है।

श्रीमद्भगवत गीता में भी कहा गया है-चटपटे, खट्टे, नमकीन, अतिगरम तथा तीक्ष्ण प्रदाहकारक आहार दु:ख, चिंता एवं रोगों को उत्पन्न करने वाले होते है। संसार के कोई भी जीव जंतु प्राकृतिक लवण के अतिरिक्त ऊपर से नमक नहीं खाते, फिर भी वे चुस्त, फुर्तीले एवं स्वस्थ रहते है।

नमक के नुकसान क्या क्या है

हमारे आयुर्वेद शास्त्र में कहा गया है कि नमक पित्त को कुपित करने वाला, भारी गर्म, अधिक प्यास उत्पन्न करने वाला, इंद्रियों के दुर्बल बना कर काम शक्ति को कम करने वाला, बाल सफेद और गंजापन पैदा करने वाला मांस को फाड़ने, कुरेदने वाला है।

अमेरिकी कैंसर अनुसंधान शाला के सदस्य डॉ. फ्रेडरिक एल. हाफमैन ने अपनी पुस्तक ‘कैंसर और आहार’ में लिखा है, “नमक खाने से शरीर में विद्यमान पोटेशियम नष्ट होते है और इसके अभाव में एवं नमक का निष्कासन न होने से कैंसर की उत्पत्ति होती है।

नमक शरीर में हानिप्रद कीटाणु की उत्तेजित्त कर अर्बुद (ट्यूमर) बढ़ाता है।” चीन में आत्महत्या करने का एक साधारण तरीका यह है कि वे नमक का घोल अधिक मात्रा में पी लेते हैं। इसकी चिकित्सा करना एक कुशल चिकित्सक के लिए भी कठिन होता है।

नमक की अधिकता शरीर में अम्ल की मात्रा को बढ़ाती है, क्योंकि क्लोराइड के कारण हाइड्रोक्लोरिक एसिड का निर्माण होता है। इस अम्ल की अधिकता से पेट से अल्सर हो सकता है।

अधिक नमक खाने वालों को पसीना अधिक आता है और प्यास भी अधिक लगती है। रक्त मेँ नमक की अधिकता से रक्त गाढ़ा हो जाता है जिससे रक्त संचार में बाधा पड़ती है। नमक की उपस्थिति से विजातीय द्रव्य शरीर के बाहर कठिनाई से निकल पाते है आजकल उच्च रक्तचाप , ह्रदय रोग, लिवर व गुर्दे के विकार त्वचा रोगों के तेजी से बढ़ने का कारण मुख्य रूप से नमक का अति सेवन ही हैं।

अधिक नमक के सेवन से स्वंय की धड़कन, खुजली, रक्त में लौह तत्व की कमी, पथरी की तकलीफ, मुंहासे, फोड़े-फुंसियां, झाइंया, हड्डियां कमजोर होना मांसपेशियों की लोच कम होना, उन्हें संकुचित करना, पाचन-शक्ति का कमजोर होना, अनिद्रा की तकलीफ, अम्लता (एसिडिटी) की तकलीफ अंगों में जल का जमाव बढ़ना जिससे सूजन, दर्द और मोटापा बढ़ाने जैसी तकलीफें पैदा करता है।

नमक खाने से लाभ

अब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि यदि नमक विष तुल्य है, तो फिर अभी तक शरीर पर उसका प्रभाव क्यों नहीं पड़ा? मानव जाति सैकड़ों वर्षों से नमक का प्रयोग करती आ रहीं है, इसीलिए उसका शरीर और कोष धीरे-धीरे अभ्यस्त हो गए है, फिर भी प्रकृति इस तत्व की उपस्थिति सहन न कर पसीने, मूत्र आदि के रूप में इसे विसर्जित कर देती है।

नमक हमारे भोजन का एक आवश्यक तत्व हैं, जो शारीरिक क्रियाओं के नियमित रखने, ऊर्जा का उचित उपयोग होने तथा धातुओं के निर्माण में विशेष भूमिका निभाता है। ह्रदय को स्पंदित करने, मांसपेशियों को शक्ति देने तथा स्नायुतंत्र में आवेग उत्पन्न करने हेतु भी इसका प्रयोग जरूरी है।

यह हमारे शरीर का एक आवश्यक घटक है, जो कोशिकाओं के बाहरी द्रव में स्थिर रहता है। शरीर में नमक लगभग 250 ग्राम की मात्रा में होता है। सीरम का यह प्रधान घटक है। यह रक्त और शरीर की अन्य धातुओं के मध्य परासरणीय संतुलन (आस्मेटिक प्रेशर) स्थिर रखने के कारण जीवन के लिए अनिवार्य है।

नमक कैसे छोड़ें

नमक का प्रयोग एकाएक बिलकुल बंद कर देना आसान नहीं, फिर भी धीरे- धीरे भोजन मेँ इसकी मात्रा कम करते जाना संभव हैं। जहां तक हो सके, बिना नमक की रोटी खाएं क्योंकि नमक युक्त रोटी दांतों में चिपक कर उनकी जड़ों को कमजोर करती है।

नमक के विकल्प

नमक के विकल्प के रूप में नीबू का प्रयोग सलाद, सब्जियों, फलों पर छिड़क कर तुलसी के पते को स्लाद, सब्जी में डालकर, सूखे पुदीने को दही या रायते में मिलाकर , अजवाइन सब्जियों , नूड़ल्स , मांस में डालकर, काली मिर्च अथवा अदरक सभी खाने की वस्तुओ पर स्वादानुसार छिड़क कर उपयोग में ले सकते है और अधिक नमक के सेवन से बच सकते है।

नमक के नुकसान इन हिंदी

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