मियादी बुखार – कारण,लक्षण,उपाय

मियादी बुखार का कारण: इसे मन्थर ज्वर, आन्त्र ज्वर, मोतीझारा इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इस रोग में लगातार कई दिनों तक बुखार रहता है। यह प्राय: गर्मी के मौसम में फैलता है। आंतों में मुख्य रूप से इसका संक्रमण होने के कारण ही इसका नाम आन्त्र ज्वर पड़ा। सालमैनोल टाइफ नामक जीवाणु … Read more

चेचक – कारण,लक्षण,उपाय

चेचक का कारण: यह रोग प्राय: बच्चों में होता है, किंतु किशोरों, युवाओं व वयस्कों में भी हो सकता है। यह विषाणु (वाइरस) जन्य संक्रामक रोग है तथा रोगी के खांसने, छींकने व बोलने से फैलता है। चेचक का लक्षण इस रोग में शरीर में टूटन व दर्द, खुजली, सारे शरीर पर सूजन व लाली, … Read more

मधुमेह – कारण,लक्षण,उपाय

मधुमेह का कारण: रक्त और मूत्र में शर्करा की मात्रा बढ़ जाने के कारण इस रोग को मधुमेह कहा गया है। आयुर्वेद में इसे प्रमेह का ही एक भेद माना गया है। अनियमित आहार, शारीरिक श्रम का अभाव, चिंता, भय, तनाव, विषाद आदि मानसिक कष्टों की अधिकता, मोटापा, उच्च रक्तचाप आदि इस रोग के प्रमुख … Read more

न्युमोनिया – कारण,लक्षण,उपाय

न्युमोनिया का कारण: प्राय: सर्दियों में होने वाला यह रोग उन बच्चों या बड़ों में किसी भी मौसम में हो सकता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो। शारीरिक दुर्बलता या वायु प्रदूषण के कारण अथवा दिन में प्राय: बंद कमरों में रहने वाले व्यक्तियों में ठंड लगने, जीवाणु संक्रमण या किसी अन्य विक्षोभक कारण … Read more

गलघोंटू – कारण,लक्षण,उपाय

गलघोंटू का कारण: यह रोग प्राय: 2-7 वर्ष की आयु के बच्चों में होता है। यह डिप्थीरिया बेसिलस नामक जीवाणु से फैलता है। इसका संक्रमण गले से शुरू होता है और धीरे-धीरे सारे शरीर में फैल जाता है। यदि उचित समय पर इसकी चिकित्सा शुरू न की जाए तो यह रोग घातक सिद्ध होता है। … Read more

हिचकी के कारण और उपाय

हिचकी के कारण: साधारणत: श्वास महापेशी के संकुचन के समय कंठ कपाट खुला रहता है, जिससे सांस अंदर आ जाता है। लेकिन कभी-कभी श्वास महापेशी में अचानक ही संकुचन हो जाता है और यह बार-बार सिकुड़ने लगती है, जबकि कंठकपाट बंद होता है। इससे अंदर का सांस रुक जाता है और ‘हिक’ जैसी ध्वनि निकलती … Read more

दमा (श्वास) – कारण,लक्षण,उपाय

दमा का कारण: फेफड़ों में स्थित श्वासनलियों में दो प्रकार के नाड़ी सूत्र होते हैं। एक प्रकार के नाड़ी सूत्र जिनके उत्तेजित होने से एसीटाइलकोलीन की उत्पत्ति होती है, कोलीनर्जिक कहलाते हैं तथा दूसरे प्रकार के नाड़ी सूत्र जिनके उत्तेजित होने से एड्रीनलीन की उत्पत्ति होती है, एडरीनर्जिक कहलाती हैं। कोलीनर्जिक अथवा पैरासिम्पेथैटिक नाड़ी सूत्रों … Read more

तपेदिक (क्षयरोग-टी.वी.) – कारण,लक्षण,उपाय

तपेदिक का कारण: यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के संक्रमण से होने वाला रोग है। यह शरीर के किसी भी अवयव फेफड़ों, हड्डी, आंत या मस्तिष्क में हो सकता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों में संक्रमण उत्पन्न करता है, क्योंकि संक्रमित व्यक्ति के थूक द्वारा स्वस्थ व्यक्ति में भी आसानी से प्रवेश कर जाता … Read more

जुकाम – कारण,लक्षण,उपाय

जुकाम का कारण: जुकाम में नाक की श्लेष्मकला सूज जाने से नाक बंद हो जाती है या बहने लगती है। नाक के साथ-साथ गले में भी हलकी सूजन रहती है। जुकाम (प्रतिश्याय) गर्मी को छोड़कर बाकी ऋतुओं में अधिक होता है। बालकों में अपेक्षाकृत अधिक होता हे। ऋतुओं के बदलने के समय जब शरीर को … Read more

खांसी Cough के लक्षण और उपाय

खांसी: गले, कंठ, कंठ नली, श्वासनलियों या फेफड़ों में कोई विक्षोभजन्य कारण मौजूद होने पर सांसी उठती है। श्वासनलियों की श्लेष्मकला में जीवाणु अथवा वाइरस के संक्रमण अथवा किसी अन्य कारण से सूजन आ जाने पर उनमें होने वाला श्लेष्म स्राव बंद हो जाता है, जिससे श्वास प्रणाली में खुश्की आ जाती है, जो खांसी … Read more