समय समय पर डॉक्टर की जांच जरुरी क्यों?

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समय समय पर डॉक्टर की जांच जरुरी क्यों: अमीर हो या गरीब सभी लंबी उम्र तक जीना चाहते हैं। यह तभी संभव है, जब शरीर की नियमित देखभाल संभव हो सके। इसी देखभाल के अंतर्गत शारीरिक जांच भी समय-समय पर करनी आवश्यक है।

इससे लगने वाली बीमारी का तो पता चलता ही है, साथ ही शरीर में किस तत्व की कमी या अधिकता हो रही है , इसे भी जानकर उन पर नियन्त्रण पाने के लिए समय रहते दवाइयां ली जा सकती हैं।

डॉक्टर की जांच जरूरी क्यों

इससे पहले कि आपका जीना दूभर हो जाए, यह जरूरी है कि आप अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। जवानी में तो आपकी सब भूलें, ज्यादतियां शरीर सहन कर लेता है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे शरीर में अनेक प्रकार की कमियों व अभावों से तकलीफें होना शुरू हो जाती हैं।

यदि बड़ी उम्र में हर साल सिर्फ चंद घंटे आप अपनी डॉक्टरी जांच में लगाएंगे, तो न केवल अपने स्वास्थ्य के प्रति निश्चिंत रहेंगे, बल्कि आपकी बीमारियां समय पर पकड़ में आ जाने से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे।

टालू प्रवृत्ति हानिकारक

कुछ लोग को शरीर में तकलीफ महसूस होने पर भी कुछ दिनो से लेकर महीनों तक टालते रहते हैं कि शायद अपने आप ठीक हो जाए, इसी चक्कर में पड़कर बहुत से लोग अपना बहुत बड़ा नुकसान भी कर लेते है। लोगों का यह विचार भी गलत है कि लंबे समय तक बनी रहने वाली तकलीफ हो, तभी डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

कहा जाता है कि वक्त पर मिली चेतावनी आने वाले संकटों से लड़ने का एक शक्तिशाली हथियार है। शरीर के स्वास्थ्य में आई खराबी की वक्त पर चेतावनी प्राप्त करने के लिए सालाना डॉक्टरी जांच कराना जरूरी होता है

कारखानों में 45 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों की पूरी डॉक्टरी जांच कराने का नियम भी इसीलिए बना है जिसका उद्देश्य यही है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य में आई खराबी को समय पर चिकित्सा सहायता देकर दूर किया जा सके अन्यथा खराबी बढ़कर प्राण घातक भी हो सकती है।

कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि शरीर में बगैर कोई तकलीफ महसूस हुए भी बीमारी शुरू हो जाती हैं, जिसे बगैर जांच के पता नहीं लगाया जा सकता। जैसे स्तन में गांठ।

इसका प्राथमिक अवस्था में किया गया उपचार ही रोग को दूर कर सकता है, अन्यथा अंतिम अवस्था में कैंसर बन जाने पर इलाज़ संभव नहीं होता। इसी प्रकार लगातार रात में बुखार आना, साथ में खांसी टी.बी. (क्षय रोग) को सकता है। यदि निदान समय पर हो जाए, तो यह रोग दवाइयों से पूरी तरह ठीक हो जाता है।

यदा-कदा बड़ी उम्र में किसी बीमारी का इलाज कराने के दौरान किए गए परीक्षणों से अन्य कई बीमारियां प्रकाश में आ जाती है।

जैसे ईं.सी.जी. कराने पर दिल की बीमारी, पेशाब की जांच से मधुमेह की तकलीफ, सिर दर्द, चक्कर आने और घबराहट में उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रैशर) का रहना, रक्त परीक्षण से मधुमेह, जिगर गुर्दे का रोग मालूम पड़ना, खून में हीमोग्लोबिन की जांच से एनीमिया का पता चलना, यहां तक कि दोनों आंखों से बराबर दिखने पर भी जांच कराने पर एक आंख में दृष्टि दोष का पता चलने जैसी जानकारियां मिल सकती हैं।

इसलिए यह आवश्यक है कि यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से ऊपर है और पिछले एक वर्ष या वर्षों से आपने अपना कोई डॉक्टरी परीक्षण नहीं कराया है, तो अब देर न करें और पास के अस्पताल में जाकर अपना पूरा चेकअप कराएं।

घातक परिणामों से बचें

अधिक पान और चूना, तम्बाकू, गुटखे खाने से मुंह का कैंसर हो सकता है। ज्यादा धूम्रपान करने से ह्रदय और फेफड़ों के रोग उत्पन्न हो सकते है।

अधिक समय तक शराब का सेवन करते रहने से आमाशय शोथ, रक्त वाहिनियों की कठोरता, यकृत का सिरोसिस, लंबे समय तक वृक्क शोथ की तकलीफें पैदा हो सकती हैं। कुछ बीमारियों को ‘साइलेंस किलर’, यानी चुपचाप मारने वाली बीमारियां कहा जाता है, जिनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप मुख्य रूप से सम्मिलित हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि कोई भी बीमारी अचानक नहीं होती। प्रत्येक बीमारी के पीछे कोई न कोई विशेष कारण होता है और अकसर हमारे स्वास्थ्य संबंधी नियमों की अवहेलना के कारण ही ये पैदा होती हैं। अत: डॉक्टरी जांच अवश्य कराते रहें और उसी आधार पर शरीर में जिन-जिन तत्वों की कमी है, उसी के अनुसार पौष्टिक आहार सेवन करें।

समय समय पर डॉक्टर की जांच जरुरी क्यों?

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