तनाव के प्रमुख कारण क्या है और कैसे दूर करे

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तनाव के प्रमुख कारण क्या है: हमारे देश में जिस तेजी से औद्योगीकरण और शहरीकरण बढ़ता जा रहा है, उसी तेजी से हमारा मानसिक तनाव भी बढ़कर मानसिक रोगों में परिवर्तित हो रहा है।

इसका प्रमुख कारण है, हमारे जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक विषमताओं का बढ़ना। दिन-प्रतिदिन बढ़ती कठिनाइयों से हमारी मानसिक स्थिति स्थिर न रहकर डावांडोल होती रहती है।

तनाव के प्रमुख कारण – जीवन मशीन बना

दैनिक जीवन में भूख और प्यास की तरह ही अब हर व्यक्ति मानसिक तनाव का अनुभव करता है। यद्यपि मनुष्य ने अपने सुख और आराम के लिए स्वचालित मशीनों और अनेक लाभदायक चीजों का निर्माण अवश्य किया है, लेकिन इनके साथ-साथ हमारा जीवन भी मशीनों जैसा हो जाने से हम अपनी मानसिक शांति खो बैठे हैं।

तनाव ही तनाव

आज मानसिक तनाव जीवन का हिस्सा बन गया है। अब ऐसे व्यक्ति की कल्पना करना असंभव है, जो मानसिक तनाव का अनुभव नहीं करता है। फिर चाहे वह व्यक्तिगत हो, सामाजिक हो, राजनीतिक हो या आर्थिक। अधिकांश लोगों को इन समस्याओं से जूझने में तनावों के दौर से गुजरना पड़ता हैं।

कोई शोरगुल से तनावग्रस्त है, को कोईं ट्रैफिक में फंस जाने के कारण तनावग्रस्त है। कोई बेरोजगारी से तनावग्रस्त है, को कोई बच्चों के बिगड़ने से। इसी प्रकार असफलता, निराशा, कुढ़न, भय, चिंता, गृह कलह, आर्थिक समस्या, व्यावसायिक हानि, मुकदमेबाजी, यौन संबंधों, विवाह संबंधी कुंठाओं इत्यादि कारणों से हर कोई तनावग्रस्त है।

तनाव कब पैदा होता है?

किसी भी प्रकार का तनाव तभी उत्पन्न होता है, जब जिन्हें दो परस्पर विरोधी शक्तियों के बीच द्वंद्व अथवा संघर्ष होता है। हमारे मन की दो भिन्न प्रकार की इच्छाओं, आवेशों या प्रवृतियों द्वारा परस्पर विरोधी दिशाओं में खींचे जाने से मानसिक तनाव पैदा होता है।

फिर यदि मानसिक तनाव क्षणिक व साधारण हैं, तो हमारे शरीर में होने वाले परिवर्तन भी क्षणिक होंगे, लेकिन यदि मानसिक तनाव असामान्य और स्थायी हैं तो उनसे होने वाले शारीरिक, मानसिक परिवर्तन भी हानिकारक व स्थायी होंगें।

तनाव से तकलीफें

मानसिक तनाव बढ़ जाने पर व्यक्ति नशे का आदी हो जाता है।

इसके अतिरिक्त नींद न आना, दिल की धड़कनें बढ़ जाना, चेहरे पर पीलापन झलकना, थकान महसूस होना, भोजन हजम नहीं होना, पसीने आना, सिर दर्द, ह्रदय में पीड़ा, हार्ट अटैक, कब्जियत, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता का अभाव, अल्सर, दमा, मधुमेह, त्वचा रोग, उच्च रक्तचाप होना, टी.वी. जोडों का दर्द, सांस तेज चलना, मेंटल रिटार्डेशन, अवसाद (डिप्रेशन) जैसी बीमारियां होने की पूरी संभावना होती है। इनको अनदेखा करना खतरनाक और घातक हो सकता है।

प्राय: तनावग्रस्त मन: स्थिति में, उत्तेजना, निराशा, घृणा, उदासी, ईंर्ष्या, द्वेष और क्रोधावस्था पाचन-क्रिया को प्रभावित करती है। यदि ये मनोविकार लम्बे समय तक बने रहैं, तो पेट के रोगो के अलावा अल्सर तक हो सकता है।

भय को स्थिति में मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथि व गुर्दे के ऊपर स्थितएड्रिनल ग्रंथि के सक्रिय को जाने से इनके हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है। जिनके रक्त में मिलने से ह्रदय गति और रक्तचाप में बढ़ोत्तरी हो जाती है। ये महत्वपूर्ण ग्रंथियां किसी भी तरह के भय अथवा तनाव से क्रियाशील हो उठती है।

यह भी एक तथ्य है कि सिर दर्द की शिकायत करने वाले लगभग 90% रोगी केवल मानसिक तनाव के कारण इससे पीड़ित होते है। डॉक्टरों के अनुसार आधे सिर का दर्द जिसे माइग्रेन कहते है, का हमला उन लोगों पर ज्यादा होता है, जो स्वयं की स्थिति और अपने आसपास की परिस्थितियों से बहुत अधिक असंतुष्ट व दुखी रहते हैं।

तनाव ऐसे दूर करें

  • तनाव कम करने के उपचारों में सबसे सरल और उपयोगी ‘शिथिलीकरण’ क्रिया है। प्रकृति यहीं कार्य रात में सोने का मौका देकर पूरा करती है। योग साधना में ‘शिथिलीकरण’ को ‘शव आसन’ कहते हैं, जो निर्जीव स्थिति लाकर आराम कुर्सी, पलंग, गद्दा, जमीन पर चित्त बैठकर, पीठ के बल लेटकर, हाथ-पैर सीधे रखकर किया जाता है। शरीर के अंग-प्रत्यंगो के अलावा मस्तिष्क को भी निष्क्रिय पड़ा रहने देने का अभ्यास करें तथा गहरी निद्रा को मन:स्थिति बनाएं, इस उपाय से पूर्ण शांति मिलेगी।
  • हर हाल में मस्त रहने का प्रयास करें। हर तरह की स्थिति का सामना करतें हुए अपनी योग्यता में विश्वास जगाए रखें साथ ही मन में कोई घुटन पैदा हो रहीं हो, तो उसे मन तक ही सीमित न रखें। किसी प्रियजन, विश्वासी मित्र, रिश्तेदार से कह डालें। इससे आपका मन हलका हो जाएगा।
  • एक साथ यदि कई काम आ जाएं, तो घबराए नहीं। प्राथमिकता और महत्त्व के अनुसार एक-एक करके उन्हें निपटाते जाए। शीघ्र ही आपका बोझ दूर हो जाएगा।
  • मिलने-जुलने वाले सहयोगियों से सदा अच्छे संबंध रखने का प्रयत्न करें, जिससे आप हमेशा प्रसन्नता एवं तनाव रहित जीवन अनुभव करेंगे। उनसे बड़ी-बड़ी आशाएं न बांधे और न ही उनके संबंध में हवाई कल्पनाएं गढ़े।
  • जिन्हें जरा-जरा सी बात में क्रोध आ जाता है उनका मस्तिष्क अकसर तनाव की स्थिति में बना रहता है। ऐसे व्यक्तियों को अपने क्रोध पर काबू पाने का उपाय करते रहना चाहिए।
  • मानसिक तनाव की अवस्था में संगीत सुनना, रोचक टी.वी. कार्यक्रम, पिक्चर देखना पत्र पत्रिकाएं पढ़ना, बागबानी करना, पेंटिग करना मन बहलाने के लिए जरूरी हैं। ऐसा करने से कुछ ही समय में आपको मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।
  • नियमित शारीरिक व्यस्थाम करें, इससे आपकी मानसिक क्षमता बढ़ेगी। तनाव को दूर करने का यह एक उत्तम उपाय है। योगासन, प्राणायाम, शवासन आदि से जहां हमारे शरीर को चुस्त रखने में मदद मिलती है, वहीं मस्तिष्क को भी आराम पहुंचकर चित्त प्राप्त होता है।
  • सदैव आशावादी दृष्टिकोण अपनाएं। निराशाजनक व असफलताओं के बारे में न सोचें। जीवन को एक खेल की भावना से जिएं और जीतने की आशा से खेलें।
  • मानसिक तनावों से मुक्ति पाने के लिए स्वयं को व्यस्त रखना भी एक उत्तम उपाय है। क्योंकि यदि आप व्यस्त रहते है, तो बेकार को चीजों में मन का भटकाव नहीं होगा और काफी सकून से रहेंगे।
  • आन्तरिक विद्वेष की भावना पनपने से स्वयं को बचाएं। इससे तनाव तो होगा ही, साथ ही आपके अंदर सद्वृत्तियों का ह्रास भी होगा।
  • नियमित और संयमित जीवनशैली को अपनाने से तनाव पैदा नहीं होता है।
  • अपने कार्यस्थल, बेडरूम में ताजे और सुगंधित पुष्प रखने से भी मन प्रसन्न रहता है।
  • यौन सम्बंधों को हमेशा सहज और स्वाभाविक बनाए रखने से तनाव बिल्कुल गायब हो जाता है। यह मनोवैज्ञानिक सत्य है। यौन मनोविज्ञान के विश्व प्रसिद्ध विद्वान फ्रा़यड ने स्पष्ट कहा है कि यौन सम्मिलन स्त्री-पुरुष, दोनों को ही तन और मन से हलका कर देता है अर्थात् किसी प्रकार का तनाव नहीं रह पाता।
  • आजकल मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए शामक (ट्रैंक्वीलाइजर) दवाओ का प्रयोग आम हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये दवाएं हानिरहित हैं। डॉक्टर के परामर्श से सीमित समय के लिए कभी कभार इन दवाओं का सेवन किया जा सकता है। फिर भी शारीरिक और मानसिक रूप से बिना दवाओं के स्वस्थ रहने के लिए यह जरूरी है कि हम हालात से समझौता कर जीवन के सच्चे सुख और पूर्ण आनन्द की प्राप्ति के लिए तनावपूर्ण स्थितियों से सतत दूर रहने का प्रयत्न करते रहे।

तनाव के प्रमुख कारण क्या है और कैसे दूर करे

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