थकान क्या है और कैसे दूर करे?

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थकान क्या है और कैसे दूर करे: आमतौर पर यह देखने में आता है कि साधन संपन्न अफ़सर, अमीर व्यक्ति भी बुरी तरह थकान की महसूस करता है। जबकि उसके पास सुख के सभी साधन उपलब्ध होते है। थकान में वह अपने में क्रिया-शक्ति का अभाव पाते हैं।

इसके विपरीत आम आदमी, कठोर काम करके तथा कम पौष्टिक आहार लेकर जीवन यापन करने पर भी अपना जीवन सक्रिय रूप से जीते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि काम की अधिकता या पौष्टिक भोजन के स्तर की कमी ही थकान का कारण नहीं है, बल्कि कुछ दूसरी बातें भी हैं, जो थकान उत्पन्न करती हैं और काम न करने की इच्छा पैदा करती हैं।

थकान क्या है?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार थकान रुचि और इच्छा कम होने की अवस्था है। थकान का सामान्य अर्थ मन अथवा शरीर की सामर्थ्य के घट जाने से लिया जाता है। ऐसी हालत में आदमी से काम नहीं होता या बहुत कम होता है। थका हुआ आदमी निष्किय पड़ा रहता है।

सामान्य रूप से जब अधिक परिश्रम किया जाता है, तो हमारी मांसपेशियां, पुट्ठे आदि शक्तिशाली बनते है। शरीर की कार्यक्षमता भी बढ़ जाती है, लेकिन सीमा से अधिक किया गया परिश्रम मानसिक, शारीरिक या स्नायु संबंधी थकावट उत्पन्त करता है।

थकान का प्रभाव

हमारे मन और शरीर दोनों पर थकान का प्रभाव पड़ता है। मानसिक रूप से थकान की दशा में आदमी की सोचने समझने की शक्ति कम हो जाती है। वह अपने काम पर भी ठीक से ध्यान नहीं दे पाता है, जबकि शारीरिक रूप से उत्पन्न थकान में शारीरिक सामंजस्य नहीं रह पाता है।

ऐसी दशा में हमारी मांसपेशियों और स्नायु तंत्र में दुग्धाम्ल (लेक्टिक एसिड) नामक विषपूर्ण तत्व अधिक बनता है। इसके अधिकाधिक बढ़ जाने से शरीर में लकवे की बीमारी भी पैदा हो सकती है। पूरे शरीर का शिथिल पड़ना इस बात का द्योतक है कि यह अम्ल शरीर में फैल चुका है।

अंग विशेष में बढ़े इस अम्ल से उस विशेष स्थान पर ही थकान मालूम पड़ती है। कुछ लोगों को जल्दी थकावट आने का कारण शरीर में रक्त की मात्रा आवश्यकता से भी कम होना, थाइराइड ग्रंथि का ठीक से काम न करना या फिर मधुमेह आदि रोग से ग्रस्त होना है।

मनोवैज्ञानिकों के मतानुसार थकान की दशा में किसी वस्तु के अनुभव ज्ञानेन्दिय से मस्तिष्क तक पहुंचने और स्नायुओं को प्रतिक्रिया होने में सामान्य दशा से अधिक समय लगता है। जब हमें किसी कार्य में आनंद आता है, तो हम लगातार काम करते रहने पर भी थकावट महसूस नहीं करतें, जबकि एक ही प्रकार के कार्य करते रहने से लंबी अवधि के बाद रुचि कम होकर मन में उब पैदा हो जाती हैं, इसी कारण थकान महसूस होती है।

थकान के प्रकार

सामान्य तौर पर थकान चार प्रकार की मानी जाती है- मानसिक, शारीरिक स्नायविक व ऊब या बोरियत।

मानसिक थकान-दिमागी काम करने या दिमाग पर जोर पड़ने से मन की सामर्थ्य कम हो जाती हैं और मानसिक थकान होती है। इस प्रकार मानसिक थकान से मस्तिष्क थक जाता है।

शारीरिक थकान-शारीरिक काम करने से मांसपेशियों की सामर्थ्य कम हो जाती है और थकान की अनुभूति होती हैं। मस्तिष्क और शरीर का पारस्परिक संबंध होने से शारीरिक थकान का मस्तिष्क पर और मानसिक थकान का शरीर पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक हैं।

स्नायविक थकान-मानसिक संघर्ष की अवस्था में अवचेतन मन के अत्यधिक थक जाने से भी स्नायु संबंधी थकान उत्पन्न होती है।

ऊब या बोरियत-एक ही प्रकार के कार्य को काकी समय तक करते रहने के कारण उब उत्पन्न होती है। ऊब में शक्ति के भली प्रकार से निकल न पाने के कारण हमेँ थकान महसूस होती है।

जो व्यक्ति स्वभाव से दब्बू और संकोची होते हैं या जिनका बॉस या जीवन साथी कठोर स्वभाव का और डांट-फटकार करने वाला होता है, उनकी भावनाएं दब जाती हैं और उन्हें लगातार मानसिक घुटन का सामना करना पड़ता है। ऐसी भावनाएं भी लोगों को निष्क्रिय और थका हुआ बनाती हैं।

इसके अलावा मधुमेह का रोगी शर्करा की मात्रा घटने पर अपने का थका हुआ पाता है। एनीमिया के रोगी को भी ज़रा-जरा से काम करने के बाद अधिक थकान का अनुभव होता है। थकान के अन्य कारणों में कार्य में अरुचि, प्रेरणा का अभाव , मनोरंजन न करना, मानसिक अस्वस्थता अथवा शारीरिक रोग आदि हो सकते हैं।

थकान दूर करने के उपाय

इसके लिए नीचे लिखे मनोवैज्ञानिक उपायों को अपनाना चाहिए-

नींद- भरपूर नींद लेने से मस्तिष्क के तंतु और शरीर के स्नायु, दोनों को आराम मिलने से इसे थकान दूर करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय माना जाता है। इससे शक्ति फिर से प्राप्त हो जाती है और थकान दूर हो जाती है।

विश्राम-आराम से बैठने या लेटने से भी थकान दूर हो जाती है , क्योंकि इससे शरीर और मन ढीले पड़ जाते है तथा शक्ति फिर से प्राप्त हो जाती है। वास्तव में विश्राम एक व्यावहारिक योग है जिसे शिथिलीकरण कहते है।

कार्यं में परिवर्तन-शारीरिक, मानसिक तथा स्नायविक थकान दूर करने के लिए तथा बिना थके अधिक काम किया जा सके, इसके लिए शरीर के विशेष अंगों पर जोर पड़ने वाले काम में परिवर्तन करते रहना चाहिए।

काम और आराम का संतुलन-काम की कमी और आराम की अधिकता से ऊब पैदा होती हैं, जिससे थकान पैदा होती है। उसी प्रकार काम की अधिकता से शारीरिक थकान आती है अत: आराम और काम के बीच संतुलन बनाए रखें।

कार्यं में रुचि और प्रेरणा उत्पन्न करें-आराम के अलावा थकान दूर करने के लिए रुचि और प्रेरणा का कम महत्त्व नहीं होता। रुचि का खेल खेलना, पुस्तके पढ़ना , रुचिकर पेय लेना, टी वी के शिक्षाप्रद कार्यक्रम देखना प्रेरणा के कारण बनते हैं।

मनोरंजन-शारीरिक और मानसिक तनाव को कम करने के लिए टी. वी. कार्यक्रम देखना, मन पसंद गाने सुनना, ताश खेलना, पिकनिक मनाने आदि से तुरंत लाभ मिलता है।

शारीरिक व्यायाम-खेलकूद से लेकर घूमने-फिरने का कोई भी नियमित व्यायाम करने से आदमी की कार्यक्षमता 20 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। जो व्यक्ति मानसिक कार्य करते हैं, वे कार्य के मध्य में यदि थोड़ा-सा-हलका व्यायाम या खेलकूद कर ले, तो अपना कार्य अच्छी तरह तथा प्रसन्नत्ता पूर्वक कर सकेंगे।

इस प्रकार थकान आने के कारण आने कार्य में अरुचि, प्रेरणा का अभाव, मानसिक या शारीरिक तनाव, मनोरंजन न करना या कोई और क्यों न हो, यदि आप उपरोक्त उपायों में रुचि लें और उन्हें अपनाएं, तो कोई कारण नहीं कि थकान की गिरफ्त में आप फंस सकें।

थकान क्या है और कैसे दूर करे?

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