बिस्तर पर पेशाब करना – कारण,लक्षण,उपाय

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बिस्तर पर पेशाब करना का कारण: दो से तीन वर्ष की आयु तक आते-आते प्राय: बच्चे का मल-मूत्र संबंधी क्रियाओं पर नियंत्रण हो जाता है। यदि पांच वर्ष की आयु के बाद भी बच्चे का मूत्र विसर्जन पर नियंत्रण न हो पाए तो चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है। इस रोग का कारण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक भी हो सकता है।

बिस्तर पर पेशाब करना का लक्षण

बिस्तर पर बिना इच्छा के, विशेष कर रात के समय पेशाब निकल जाना इस रोग का लक्षण है।

बिस्तर पर पेशाब करना का घरेलू उपाय

मनोवैज्ञानिक

विद्यालय में शिक्षक द्वारा तथा घर पर माता-पिता या परिवार के किसी बड़े सदस्य द्वारा बच्चे के साथ की गई डांट-डपट या मार-पिटाई इस रोग का कारण हो सकती है। अत: सबसे पहले बच्चे को प्यार से अपने पास बैठाकर कारण जानने का प्रयास करें।

यदि बच्चे के दिमाग में डर, मार-पिटाई या किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की बात घर कर गई है, तो सांत्वना देकर बच्चे को सामान्य व्यवहार में लें आएं। विद्यालय या घर के वातावरण का कोई डर यदि बच्चे के दिमाग में है, तो बातचीत कर कारण को दूर करें।

शारीरिक

शारीरिक कारणों में पेट में कीड़े होने के अतिरिक्त स्नायविक दुर्बलता ही प्रमुख कारण है, जिसके लिए निम्नलिखित चिकित्सा दे सकते हैं-

रात को सोने से दो-तीन घंटे पहले ही बच्चे को दूध पिला दें व इसके बाद तरल पदार्थ देने से बचें।

2 गुरबंदी बादाम की गिरी व दो किशमिश घी में भूनें, ऊपर से दूध डाल दें। सुबह खाली पेट पहले दूध में से बादाम व किशमिश निकालकर बच्चों को खिलाएं व ऊपर से दूध पिला दें।

एक अखरोट की गिरी व पांचं-छ: किशमिश खिलाएं। 3 वर्ष के बच्चे में खुराक की मात्रा आधी कर लें।

धनिए के बीजों का चूर्ण तवे पर इतना भूनें कि वह लाल रंग का हो जाए। उसमें बराबर की मात्रा में तिल का तेल, कीकर का गोंद व अनार के फूल मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण सोते समय बच्चे को दूध के साथ दें।

यदि पेट में कीड़े हों, तो कीड़े की दवाई दें।

सूखा आंवला व काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीस लें। इन दोनों के वजन से तीन गुना ज्यादा मात्रा में इसमें शहद मिला लें। एक-एक चम्मच दवा सुबह-शाम चटाएं।

राई का चूर्ण 1 ग्राम दिन में तीन बार पानी के साथ दें।

एक भाग अजवायन, दो भाग काले तिल व चार भाग पुराना गुड़ लें। तिल व अजवायन को कूट कर गुड़ में मिलाएं। एक-एक चम्मच दवा दिन में दो बार दूध के साथ दें।

आयुर्वेदिक औषधियां

बंग भस्म, शुद्ध हिंगुल, कुचला, शतावरी, नियो गोलियां (चरक)

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